March 12, 2026 6:51 pm
ब्रेकिंग
"नेताजी की अस्थियां कहां हैं?"—सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से किया इनकार; याचिकाकर्ता से पूछा ऐसा सवाल क... Share Market Crash Today 2026: क्यों गिरा आज शेयर बाजार? जानें वे 5 बड़े कारण जिनसे निवेशकों को लगा ... Rahul Gandhi in Lok Sabha: लोकसभा में गूंजा ईरान संकट, राहुल गांधी ने सरकार को घेरा; पूछा— "अमेरिका ... Iran Conflict Update: ईरान में फंसे 9000 भारतीय, विदेश मंत्रालय (MEA) ने बताया वतन वापसी का पूरा प्ल... बड़ी खबर: टेरर फंडिंग केस में शब्बीर शाह को सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत! 7 साल बाद जेल से आएंगे बाहर... LPG Crisis in Rural Areas: ग्रामीण इलाकों में गैस सिलेंडर बुकिंग के नियमों में बदलाव, अब 45 दिन करना... दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर बड़ा अपडेट: अभी इतना काम है बाकी, इन वाहनों को नहीं देना होगा 1 रुपया... संसद में गूंजी थाली-चम्मच की आवाज! LPG संकट पर TMC महिला सांसदों का अनोखा विरोध; सदन में भारी हंगामा... थरूर का मणिशंकर अय्यर को करारा जवाब: "विदेश नीति भाषण देने के लिए नहीं, देश के हित के लिए होती है!" ... फारूक अब्दुल्ला पर हमला? पूर्व CM का खौफनाक खुलासा— "मुझे लगा पटाखा फूटा, बाद में पता चला गोली चली!"...
हिमाचल प्रदेश

उरी हाइड्रो पावर प्लांट: वो प्रोजेक्ट जो पाकिस्तान के निशाने पर था! ऑपरेशन सिंदूर के दौरान क्यों किया गया था इसे टारगेट, भारत के लिए क्यों है यह लाइफलाइन?

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की तरफ से भारत के उरी हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट को निशाना बनाने की कोशिश की गई, जिसे देश के सुरक्षा बलों की जबरदस्त सक्रियता की वजह से नाकाम कर दिया गया. ये हाइड्रो प्रोजेक्ट्स एलओसी से महज कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर मौजूद हैं. इनका नाम उरी-I हाइड्रो प्रोजेक्ट और उरी-II हाइड्रो प्रोजेक्ट है. ये हाइड्रो प्रोजेक्ट्स जम्मू और कश्मीर के बारामूला जिले के उरी शहर में झेलम नदी में स्थित है.

ये चालू हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्लांट है. ये लाइन ऑफ़ कंट्रोल (LOC) के बहुत पास है, जो असल में भारत और पाकिस्तान के बीच बॉर्डर है. जानते हैं इन हाइड्रो प्रोजेक्ट् से जुड़ी कुछ अहम बातें आखिर पाकिस्तान की तरफ से इन्हें क्यों निशाना बनाने की कोशिश की गई.

उरी हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स

उरी-I हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट 1997 में शुरू हुआ था. इसकी कुल इंस्टॉल्ड कैपेसिटी 480 मेगावाट है. इसका मालिकाना हक केंद्र सरकार के पास है. हालांकि, इस पावर प्लांट को नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHPC) के जरिये चलाया जाता है. इस पावर प्लांट का यूनिट साइज़ 480 मेगावाट है,इसमें 120 मेगावाट की 4 यूनिट हैं.

उरी-II हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट को 2014 में शुरू किया गया था. ये एक रन-ऑफ-द-रिवर स्कीम है. इसकी इंस्टॉल्ड कैपेसिटी 240 मेगावाट है. यहां 60 मेगावाट के 4 यूनिट हैं. ये झेलम नदी पर इसलिए है ताकि इसकी हाइड्रोपावर क्षमता का इस्तेमाल किया जा सके.

ये झेलम नदी पर बनाया गया है जो कि भारत और पाकिस्तान में बहती है. ये सिंधु नदी की एक सहायक नदी है. ये कश्मीर घाटी का मुख्य जलमार्ग है.झेलम की सबसे बड़ी सहायक नदी किशनगंगा (नीलम) नदी है. ये मुजफ्फराबाद के पास मिलती है और पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में जाती है. कुनहर इसकी दूसरी सबसे बड़ी सहायक नदी है, जो कंघन घाटी के कोहाला ब्रिज पर पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) और पाकिस्तान को जोड़ती है.

कैसे हो सकता था नुकसान?

ये हाइड्रो प्रोजेक्ट्स देश में बिजली उत्पादन का काम करते हैं. जम्मू कश्मीर में आवश्यकता के मुताबिक बिजली प्रोडक्शन नहीं हो पाने की वजह से ये बाहर से बिजली आयात करनी पड़ती है. ऐसे में देश के इतने संवेदनशेल क्षेत्र जो एलोसी से ज्यादा नजदीक के पावर प्लांट्स को नुकसान पहुंचाने पर राज्य में बिजली आपूर्ति की समस्या उत्पन्न हो जाती, जिससे बहुत सी आवश्यक चीजों की आपूर्ति ठप हो जाती. यहां के आपूर्ति नहीं होने की वजह से राज्य के करीब 20-30 प्रतिशत का क्षेत्र ब्लैक आउट हो जाता, जिससे स्कूल, अस्पताल, उद्योग आदि को नुकसान होता. ये हाइड्रो प्रोजेक्ट्स दूसरे राज्यों की बिजली ट्रांसमिशन के लिए पूरे देश में एक-दूसरे से जुड़े होते हैं.

NHPC का क्या काम है?

नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉर्पोरेशन (NHPC) का काम भारत और विदेश में कन्वेंशनल और नॉन-कन्वेंशनल सोर्स के ज़रिए बिजली के सभी पहलुओं में एक साथ और अच्छे से विकास की प्लानिंग करना है. इन प्लांनिंग को समय-समय पर बढ़ाना और ऑर्गनाइज़ करना है. इसमें पक्की प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करना, पावर स्टेशंस और प्रोजेक्ट्स का कंस्ट्रक्शन, ऑपरेशन और मेंटेनेंस करना है.

इसके साथ ही स्टेशनों पर बनी बिजली का ट्रांसमिशन, डिस्ट्रीब्यूशन, ट्रेडिंग और बिक्री इनके काम का हिस्सा है. यह काम केंद्र सरकार द्वारा समय-समय पर तय की गई नेशनल इकोनॉमिक पॉलिसी और लक्ष्यों के तय पैरामीटर के अनुसार राज्य सरकार को पानी और दूसरी जरूरतों का भी ख्याल रखा जा सकता है

Related Articles

Back to top button