ऑपरेशन सिंदूर की थीम पर बना गणेश पंडाल, पर्वतराज भी कर रहे श्रद्धालुओं को आकर्षित

दुर्ग : गणेश चतुर्थी का पर्व 27 अगस्त को पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाएगा.10 दिनों तक चलने वाले इस उत्सव के दौरान पूरा देश बप्पा की भक्ति में सराबोर रहेगा. दुर्ग जिले में भी अलग-अलग समितियों ने गणेशोत्सव को लेकर भव्य पंडाल तैयार किए हैं. जिनकी थीम और साज-सज्जा लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है.
सेक्टर 7 में ऑपरेशन सिंदूर की थीम : सेक्टर-2 के न्यू आजाद गणेश उत्सव समिति ने पर्वतराज थीम पर पर्यावरण संदेश देता भव्य पंडाल बनाया है. वहीं भिलाई के सेक्टर-2 स्थित न्यू आज़ाद गणेश उत्सव समिति ने इस साल अपने 41वें गणेशोत्सव को बेहद खास बनाने के लिए पर्वतराज थीम पर भव्य पंडाल का निर्माण किया है.
इस बार का 41वां साल बेहद खास है. पर्वतराज थीम का मकसद लोगों को पर्वत और जंगलों के महत्व के बारे में जागरूक करना है – अनिल सिंह,उपाध्यक्ष
कोलकाता से आए कारीगर संतोष ने बताया कि लगभग 45 कारीगरों ने 40 से 45 दिनों की कड़ी मेहनत के बाद इस पंडाल को तैयार किया है.पंडाल में कपड़ा, पॉप और सीमेंट का उपयोग करते हुए हरियाली से ढके पहाड़ों का खूबसूरत दृश्य प्रस्तुत किया गया है.
पंडाल के प्रवेश द्वार पर मुख्य पर्वतराज की भव्य प्रतिमा के साथ दो सिपाही नजर आते हैं.वहीं अंदर राजस्थानी शैली की सजावट दर्शकों को राजस्थान की पारंपरिक कला की झलक दिखाती है –संतोष, कोलकाता के कारीगर
ऑपरेशन सिंदूर की थीम से सजा पंडाल : वहीं सेक्टर-7 स्थित युवा खेल एवं सांस्कृतिक मंडल ने इस साल देशभक्ति पर आधारित ऑपरेशन सिंदूर थीम पर शानदार पंडाल का निर्माण किया है. ये पंडाल परंपरा और आधुनिकता का संगम प्रस्तुत करता है.पंडाल में आधुनिक एलईडी लाइट्स, हाई-टेक साउंड सिस्टम और शानदार साज-सज्जा दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर रही है. इसके साथ ही मेले में फूड स्टॉल्स भी लगाए गए हैं, जो उत्सव के आकर्षण को और बढ़ा रहे हैं.
समिति के अध्यक्ष चन्ना केशवलू ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर थीम का उद्देश्य युवाओं और आम लोगों में देशभक्ति की भावना जागृत करना है. कोलकाता से आए कारीगरों ने इस पंडाल को विशेष रूप से तैयार किया है.
आपको बता दें कि ट्विन सिटी में गणेशोत्सव पर्व को लेकर खास तैयारियां की जाती है.यहां के भव्य पंडालों में हजारों की संख्या में भीड़ जुटती है. हर साल भिलाई नगरी के पंडाल ना सिर्फ भक्तों को गणेश प्रतिमाओं के भव्य दर्शन कराते हैं,बल्कि श्रद्धालुओं को संदेश भी देते हैं.





