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सरकार के साथ कदमताल करते-करते पहलगाम हमले पर कैसे ‘अपनों’ ने कांग्रेस को बैकफुट पर धकेला?

पहलगाम आतंकी हमले के बाद से मोदी सरकार के साथ कांग्रेस सुर में सुर मिलाती हुई नजर आ रही थी. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी भी केंद्र सरकार के साथ कदमताल करते हुए नजर आ रहे थे, लेकिन पार्टी के कुछ विवादास्पद बयान ने सारे किए धरे पर पानी फेर दिया है. सीएम सिद्धारमैया, विजय वडेट्टीवार, सैफुद्दीन सोज और मणिशंकर अय्यर जैसे दिग्गजों के पहलगाम पर दिए गए बयानों से कांग्रेस कशमकश में है तो बीजेपी को मौका मिल गया. बीजेपी की आक्रामक सियासत ने कांग्रेस को बैकफुट पर लाकर खड़ा कर दिया है.

कांग्रेस अपने नेताओं के बयान पर घिर गई है, जिसके चलते ही पार्टी नेताओं को चुप रहने की हिदायत दी है. सिद्धारमैया, विजय वडेट्टीवार, सैफुद्दीन सोज और मणिशंकर अय्यर के बयानों से पार्टी ने खुद को अलग कर दिया है, लेकिन बीजेपी ने अब भी सख्त तेवर अपना रखे हैं. कांग्रेस पर पाकिस्तान परस्त और आतंकियों को क्लीन चिट देने के आरोप लगा रही है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या कांग्रेस इस सियासी मझधार से बाहर निकल पाएगी, या उसकी राष्ट्रीय छवि को गहरा झटका लगेगा?

कांग्रेस अपने ही नेताओं के बयान से घिरी

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि वे पाकिस्तान के साथ युद्ध के पक्ष में नहीं हैं. उन्होंने तर्क दिया कि युद्ध से दोनों देशों को नुकसान होगा और इसके बजाय कूटनीतिक समाधान की जरूरत है. महाराष्ट्र के कांग्रेस विधायक विजय वडेट्टीवार ने हमले के पीड़ितों के उस दावे पर सवाल उठाया, जिसमें कहा गया था कि आतंकियों ने गोली मारने से पहले उनकी धार्मिक पहचान पूछी थी. वडेट्टीवार ने कहा, ‘क्या आतंकियों के पास इतना समय होता है? आतंकियों की कोई जाति या धर्म नहीं होता. सरकार को इस हमले की जिम्मेदारी लेनी चाहिए.’

कांग्रेस नेता पूर्व केंद्रीय मंत्री सैफुद्दीन सोज ने कहा कि पहलगाम हमले को लेकर पाकिस्तान की बात को ‘स्वीकार’ करना चाहिए. उन्होंने इसे खुफिया विफलता का परिणाम बताया. कांग्रेस के दूसरे वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने हमले को ‘विभाजन की अनसुलझी समस्याओं’ से जोड़ा, जिसे बीजेपी ने ‘इतिहास की गलत व्याख्या’ और ‘आतंकवाद को जायज ठहराने’ की कोशिश बताया. कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा ने भी हमले को देश में मुसलमानों पर होने वाले हमले से जोड़ा. इन कांग्रेसी नेताओं के बयानों ने बीजेपी को कांग्रेस पर हमला करने का मौका दे दिया है.

कांग्रेस को फिर से घेरने में जुटी बीजेपी

कांग्रेस नेताओं के बयान को लेकर बीजेपी ने आक्रामक तेवर अपना लिया है. बीजेपी इसे ‘आतंकियों को बचाने’ और पाकिस्तान पर नरमी बरतने की कोशिश बता रही है. बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने आरोप लगाया कि सिद्धारमैया का बयान पाकिस्तानी टीवी चैनलों पर दिखाया जा रहा है, जो कांग्रेस की ‘राष्ट्र-विरोधी मानसिकता’ को दिखाता है. बीजेपी ने इसे ‘पाकिस्तान को क्लीन चिट’ देने वाला बताया. सोज और सिद्धारमैया ने बाद में अपने बयान पर सफाई दी, लेकिन तब तक यह पाकिस्तानी मीडिया में सुर्खियां बन चुका था.

बीजेपी ने इन बयानों को ‘कांग्रेस की असली मानसिकता’ का सबूत बताते हुए तीखा हमला बोला. बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि कांग्रेस के नेता सर्वदलीय बैठक में पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई का समर्थन करते हैं, लेकिन बाद में उसके खिलाफ बोलने से बचते हैं. बीजेपी के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने बकायदा प्रेस कॉफ्रेंस करके कहा कि कांग्रेस पार्टी कहती है कि सरकार के फैसलों के साथ हैं, लेकिन कांग्रेस के कुछ नेता गलत बयानबाजी कर रहे हैं.

रविशंकर प्रसाद ने कहा कि मुझे कांग्रेस से कुछ ऐसी ही उम्मीद थी. हमने उनकी बात सुनी. कांग्रेस के कुछ बड़े नेता ऐसी बातें कह रहे हैं, वे ऐसा क्यों कह रहे हैं? उनका एजेंडा क्या है? मैं राजनीतिक मुद्दे नहीं उठाना चाहता, लेकिन काफी दुखी हूं और शोक मना रहा हूं. लेकिन जो पैटर्न सामने आया है, उसे देखते हुए मैंने सोचा कि मुझे इसे पार्टी के मंच से सबके सामने रखना चाहिए. इस तरह बीजेपी के तमाम नेता कांग्रेस को घेरने में जुट गए हैं.

बैकफुट पर खड़ी नजर आ रही कांग्रेस

कांग्रेस अपने ही नेताओं के बयान से बैकफुट पर खड़ी नजर आ रही है. कांग्रेस पार्टी की प्रतिक्रिया से ही इसको लेकर अंदाजा लगाया जा सकता है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पहलगाम में हुए जघन्य आतंकी हमले पर सर्वदलीय बैठक में पार्टी का रुख साफ कर दिया था. उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में इस मुद्दे पर एक प्रस्ताव भी पारित किया गया था. जयराम रमेश ने एक्स पर एक पोस्ट में भी पार्टी की स्थिति साफ की है, लेकिन पार्टी के कुछ नेता मीडिया में अपनी बात रख रहे हैं, जो उनकी व्यक्तिगत राय है. कांग्रेस पार्टी का उनके बयानों से कोई लेना देना नहीं है.

जयराम रमेश ने अपने बयानवीर नेताओं को हिदायत देते हुए कहा कि इस अत्यंत संवेदनशील समय में कोई भी बयान देने से परहेज करें. कांग्रेस नेताओं को अगर कोई बयान देना है तो पार्टी के सीडब्ल्यूसी का प्रस्ताव और अधिकारिक बयान के लिहाज से ही अपने विचार दें. साथ ही कहा कि मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी द्वारा व्यक्त विचार और अधिकृत एआईसीसी पदाधिकारियों के विचार ही कांग्रेस पार्टी की आधिकारिक स्थिति को दिखाते हैं.

उन्होंने कहा कि पहलगाम त्रासदी के लिए जिम्मेदार सुरक्षा विफलता का विश्लेषण किया जाना चाहिए, लेकिन इस समय कुछ कांग्रेस नेताओं द्वारा व्यक्त विचारों को पार्टी के विचारों के रूप में नहीं जोड़ा जाना चाहिए. इस तरह कांग्रेस ने साफ और सख्त संदेश दे दिया है कि पहलगाम मुद्दे पर पार्टी लाइन से अलग बयान न दें, नहीं तो कार्रवाई हो सकती है. कांग्रेस का यह निर्देश पार्टी के उन नेताओं के लिए विशेष रूप से था, जिनके बयानों ने विवाद को हवा दी.

कांग्रेस को अपनी छवि को बचाने की चुनौती

राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे जिस तरह से पहलगाम हमले के बाद ही फ्रंटफुट पर सरकार के साथ खड़े हैं, जिसे लेकर मोदी सरकार और बीजेपी को कोई मौका नहीं लग रहा. ऐसे में मणिशंकर अय्यर से लेकर रॉबर्ट वाड्रा और सिद्धारमैया के बयानों ने कशमकश में डाल दिया है. कांग्रेस अतीत में ऐसे बयान देकर सियासी नुकसान उठा चुकी है. कांग्रेस के कुछ नेताओं के द्वारा उरी और पुलवामा अटैक के बाद सवाल खड़े किए गए थे. इसके बाद एयर स्ट्राइक पर भी सरकार से सबूत मांगे थे. इसे लेकर कांग्रेस निशाने पर आ गई थी, जिसे लेकर बीजेपी ने कांग्रेस की इमेज को राष्ट्र विरोधी कठघरे में खड़ा करने की कोशिश की थी.

पहलगाम हमले को लेकर राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे जिस तरह से संदेश देने में जुटे थे कि सरकार के साथ खड़े हैं, वैसे में कांग्रेस के कुछ नेताओं के बयानों से सारे किए धरे पर पानी फेरता हुआ नजर आ रहा. सिद्धारमैया और वडेट्टीवार जैसे नेताओं के बयान कांग्रेस की राष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंचा रहे हैं. बीजेपी इसी के चलते राष्ट्रीय सुरक्षा और देशभक्ति के मुद्दे पर कांग्रेस को घेरने में जुट गई है. यह रणनीति 2019 के पुलवामा हमले के बाद भी देखी गई थी, जब बीजेपी ने विपक्ष को ‘राष्ट्र-विरोधी’ करार दिया था. यही वजह है कि कांग्रेस ने अपने उन नेताओं को हिदायत दे दी है, जिनके बयानों के चलते बीजेपी को घेरने का मौका मिला है.

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