February 11, 2026 11:02 am
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नाम में ही दर्शन: PMO अब ‘सेवा तीर्थ’, राजभवन अब ‘लोक भवन’, मोदी सरकार का जन-केंद्रित प्रशासन का मॉडल

मोदी सरकार प्रशासनिक ढांचे को नई पहचान दे रही है. इसका मकसद सत्ता से ज्यादा सेवा और अधिकार से ज्यादा जिम्मेदारी तय करना है. इस कड़ी में सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट में बन रहे नए पीएम कार्यालय का नाम ‘सेवा तीर्थ’ रखा गया है.राजभवनों को नया नाम दिया जा रहा है. राजभवन अब लोक भवन के नाम से जाने जाएंगे. इस तरह देश के पब्लिक इंस्टीट्यूशन्स में गहरा बदलाव हो रहा है. गवर्नेंस का आइडिया सत्ता से सेवा और अथॉरिटी से जिम्मेदारी की ओर बढ़ रहा है.

यह बदलाव सिर्फ एडमिनिस्ट्रेटिव नहीं बल्कि कल्चरल और मोरल है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गवर्नेंस की जगहों को कर्तव्य और ट्रांसपेरेंसी दिखाने के लिए नया रूप दिया गया है. हर नाम, हर बिल्डिंग और हर सिंबल अब एक सिंपल आइडिया की ओर इशारा करता है…सरकार सेवा के लिए होती है. राजपथ पहले ही कर्तव्य पथ बन गया.

ऐसा नाम जो वेलफेयर दिखाता है, एक्सक्लूसिविटी नहीं

एक लैंडमार्क सड़क अब एक मैसेज देती है. ये परिवर्तन बताता है कि पावर कोई हक नहीं है बल्कि यह एक ड्यूटी है. प्रधानमंत्री के ऑफिशियल घर का नाम 2016 में लोक कल्याण मार्ग रखा गया. एक ऐसा नाम जो वेलफेयर दिखाता है, एक्सक्लूसिविटी नहीं. हर चुनी हुई सरकार के आगे आने वाले काम की याद दिलाता है. पीएमओ वाले नए कॉम्प्लेक्स को सेवा तीर्थ कहा जाता है.

आइडियोलॉजिकल बदलाव को दिखाते हैं ये बदलाव

एक वर्कप्लेस जिसे सेवा की भावना दिखाने के लिए डिज़ाइन किया गया है और जहां नेशनल प्रायोरिटीज़ बनती हैं. सेंट्रल सेक्रेटेरिएट का नाम कर्तव्य भवन है. यह एक बड़ा एडमिनिस्ट्रेटिव हब है जो इस सोच के आस-पास बना है कि पब्लिक सर्विस एक कमिटमेंट है. ये बदलाव एक गहरे आइडियोलॉजिकल बदलाव को दिखाते हैं. भारत का लोकतंत्र पावर के बजाय जिम्मेदारी और स्टेटस के बजाय सेवा को चुन रहा है. नामों में बदलाव सोच में भी बदलाव है.

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