February 22, 2026 6:36 pm
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भारत ने बनाया पनडुब्बियों से लड़ने वाला स्वदेशी योद्धा, नौसेना को जल्द मिलेगा नया ताकतवर युद्धपोत ‘INS अर्णाला’

भारतीय नौसेना 18 जून 2025 को अपना नया युद्धपोत INS अर्णाला शामिल करने जा रही है. यह जहाज खासतौर पर पनडुब्बियों से लड़ने के लिए बनाया गया है. इसे विशाखापत्तनम के नेवल डॉकयार्ड में एक खास समारोह में कमीशन किया जाएगा. इस मौके पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान मुख्य अतिथि होंगे. अर्णाला ऐसा पहला जहाज है, जो शैलो वॉटर क्राफ्ट यानी उथले पानी में काम करने वाले पनडुब्बी रोधी जहाजों की सीरीज का हिस्सा है. कुल 16 ऐसे जहाज बनाए जा रहे हैं. इसे कोलकाता की गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) ने एलएंडटी शिपबिल्डर्स के साथ मिलकर तैयार किया है.

यह जहाज आत्मनिर्भर भारत अभियान का बड़ा उदाहरण है, क्योंकि इसमें 80% से ज्यादा हिस्से देश में ही बनाए गए हैं. भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL), महिंद्रा डिफेंस, एलएंडटी और MEIL जैसी कई भारतीय कंपनियों ने इसके निर्माण में योगदान दिया है. इसके साथ ही 55 से ज्यादा छोटी और मझोली भारतीय कंपनियों (MSMEs) को भी इस प्रोजेक्ट से फायदा मिला है.

महाराष्ट्र के अर्णाला किले से लिया गया है नाम

जहाज का नाम महाराष्ट्र के वसई के पास स्थित ऐतिहासिक अर्णाला किले से लिया गया है, जिसे मराठा योद्धा चिमाजी आप्पा ने 1737 में बनवाया था. जैसे वह किला दुश्मनों से डटकर लड़ा, वैसे ही यह जहाज भी समंदर में देश की सुरक्षा के लिए तैनात रहेगा.यह 77 मीटर लंबा और 1490 टन भारी जहाज है, जो डीजल इंजन और वॉटरजेट सिस्टम से चलता है.

देश की समुद्री ताकत को मिलेगा बढ़ावा

यह भारतीय नौसेना का पहला ऐसा बड़ा जहाज है जो इस तकनीक से चलता है. अर्णाला को पनडुब्बियों की निगरानी, सर्च और रेस्क्यू मिशन, और कम तीव्रता वाले समुद्री ऑपरेशनों के लिए तैयार किया गया है. इसकी तैनाती से भारत की तटीय सुरक्षा और भी मज़बूत होगी और देश की समुद्री ताकत को बढ़ावा मिलेगा.

भारतीय नौसेना के नए जंगी जहाज ‘अर्णाला’ का शिप क्रेस्ट यानी प्रतीक चिन्ह जारी किया गया है. इस क्रेस्ट में एक ऑगर शेल (घोंघे जैसी संरचना) को नीले रंग की पृष्ठभूमि पर दिखाया गया है और नीचे देवनागरी में अर्णाला लिखा है. यह ऑगर शेल अपनी मजबूत और घुमावदार बनावट के लिए जाना जाता है. यह दिखाता है कि अर्णाला जहाज भी उतना ही मजबूत, सतर्क और समुद्र की चुनौतियों से लड़ने में सक्षम है.

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