बस्तर में नेशनल हाइवे 30 गड्ढों में तब्दील, हर दिन यहां से गुजरती है हजारों गाड़ियां

बस्तर: छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल बस्तर में मौजूद नेशनल हाइवे 30 छत्तीसगढ़ को पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश और तेलंगाना से जोड़ती है. प्रतिदिन इस नेशनल हाइवे 30 में हजारों की संख्या में गाड़ियां चलती हैं. लेकिन इन दिनों जगदलपुर से सुकमा के बीच की सड़कें मुसीबत बन गई हैं. सड़क पूरी तरह गड्ढों में तब्दील हो गई है. सड़क में गड्ढे हैं या गड्ढे में सड़क यह कह पाना मुश्किल है. हाइवे से आवागमन करने वाले राहगीरों और मरीजों को प्रतिदिन जर्जर सड़क से दो चार होना पड़ रहा है. गड्ढों की वजह से सड़क दुर्घटनाएं बढ़ गई हैं. गाड़ियां गड्ढों की वजह से जर्जर और खराब हो रही हैं. सफर को पूरा करने में चार से पांच गुणा ज्यादा वक्त लग रहा है. राहगीरों और गाड़ी चालकों का कहना है कि तमाम दिक्कतों को जानने के बाद भी नेशनल हाइवे के अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं.
आंध्र प्रदेश और तेलंगाना से जोड़ती है हाइवे: बस ड्राइवरों ने बताया कि कामानार से तोंगपाल के बीच सड़क इतनी खराब है कि पैदल चलना मुश्किल है. उस रुट पर यात्रा करने वाले यात्री व बस को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. इतने गड्ढे हो गए हैं कि गाड़ी कहां से निकाले यह समझ नहीं आता है. बड़े बड़े गड्ढों से टकराकर गाड़ियां खराब हो रही हैं. पट्टे टूट रहे हैं. यात्री परेशान होकर नीचे उतरते हैं और गड्ढे में पत्थर डालकर गाड़ी को आगे बढ़ने में सहयोग करते हैं. सबसे अधिक परेशानियों का सामना मरीजों को करना पड़ता है.
ड्राइवर और मुसाफिर दोनों परेशान: बस कंडक्टर ने कहा कि NH-30 में सड़क के बुरे हाल हैं. जहां 25 मिनट का टाइम सफर में लगना चाहिए वहां 2 घण्टे से अधिक समय लग रहा है. गाड़ी मालिक से लेकर मुसाफिर तक परेशान हैं. कई राहगीर तो परेशानी के चलते दंतेवाड़ा घूमकर अपने गंतव्य तक जाना पसंद कर रहे हैं. मुसाफिरों का कहना है कि अगर अफसर सड़क की हालत पर ध्यान दें तो कुछ काम होगा.
प्रदेश में डबल इंजन की सरकार है. केंद्र में भी बीजेपी की सरकार है. बावजूद इसके सड़क का हाल सबके सामने है. हर दिन हादसे हो रहे हैं लेकिन अफसर को कोई चिंता नहीं है. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सुकमा के निवासी हैं बस्तर सांसद भी स्थानीय निवासी हैं. इसके बाद भी हाइवे का हाल देख लीजिए क्या है. एनएच की दशा ऐसी की है कि यहां से पैदल निकलना भी एक समस्या है: रोहित सिंह आर्या, स्थानीय जनप्रतिनिधि
”सड़क नहीं समुद्र कहिए और गाड़ी को नाव समझिए”: स्थानीय नागरिक शिवानंद कश्यप ने बताया कि सड़क बहुत अधिक खराब है. ऐसा लगता है जैसे सड़क पर नहीं बल्कि समुद्र के बीच नाव में बैठे हैं. और नाव डगमगा रही है. कभी इधर कभी उधर. इस स्थिति में मरीजों को काफी परेशानी होती है. इसी हाइवे से होकर मरीजों को डिमरापाल ले जाया जाता है.
सांसद ने दिया भरोसा: बस्तर सांसद महेश कश्यप ने कहा कि निश्चित ही तोंगपाल दरभा से केशलुर के बीच सड़क खराब है. बारिश के कारण सड़क का मरम्मत नहीं किया जा रहा है. जैसे ही बारिश थम जाएगी वैसे ही मरम्मत कार्य किया जाएगा. हालांकि इस रूट पर फ़ॉर लेन सड़क स्वीकृत है. लेकिन मरम्मत करके राहगीरों को परेशानी से दूर किया जाएगा.





