त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय भूमिपूजन, आनंद (गुजरात) में छत्तीसगढ़ से एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में घनश्याम तिवारी हुए शामिल

आनंद (गुजरात), 5 जुलाई 2025।
भारत में सहकारिता आंदोलन को सशक्त, पारदर्शी और आधुनिक स्वरूप देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम के रूप में, त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय (TSU) का भूमि पूजन समारोह 5 जुलाई 2025 को गुजरात के आनंद में अत्यंत गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों से सहकारी नेतृत्व, संगठनकर्ता और नीतिनिर्माता उपस्थित रहे।
इस ऐतिहासिक समारोह में छत्तीसगढ़ से एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में घनश्याम तिवारी, प्रदेश संयोजक, पैक्स प्रकोष्ठ, सहकार भारती छत्तीसगढ़ ने सहभागिता कर प्रदेश का गौरव बढ़ाया। उनकी उपस्थिति न केवल संगठनात्मक प्रतिनिधित्व थी, बल्कि छत्तीसगढ़ की सहकारी नीति, नवाचार, और जमीनी कार्य संस्कृति की राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुति भी थी।
*सहकारिता के नवयुग की आधारशिला*
भूमिपूजन समारोह का शुभारंभ माननीय केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के करकमलों से हुआ। अपने संबोधन में उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा पिछले 4 वर्षों में 60 प्रमुख इनिशिएटिव लिए गए हैं ताकि सहकारिता को पारदर्शी, समावेशी और जन-संपृक्त बनाया जा सके।
श्री शाह ने कहा कि 30 करोड़ से अधिक नागरिक सहकारी संस्थाओं से जुड़े हैं, और 40 लाख कर्मचारी इस आंदोलन में सक्रिय हैं। इस विशाल नेटवर्क को प्रशिक्षित और योग्य बनाने के लिए त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय की स्थापना की जा रही है।
*भाई-भतीजावाद का अंत, योग्यता को प्राथमिकता*
मंत्री जी ने यह भी स्पष्ट किया कि अब सहकारिता क्षेत्र में नियुक्तियाँ केवल प्रशिक्षित व्यक्तियों को ही मिलेंगी। विश्वविद्यालय से डिग्री, डिप्लोमा या प्रमाण-पत्र प्राप्त करने वालों को ही प्राथमिकता दी जाएगी। इससे भाई-भतीजावाद समाप्त होगा, और योग्यता आधारित सहकारिता तंत्र विकसित होगा।
*20 लाख कर्मियों को प्रशिक्षण, 200 संस्थाओं से नेटवर्क*
त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय का उद्देश्य अगले 5 वर्षों में PACS, डेयरी, मत्स्य, कपड़ा, खादी, और ग्रामीण विकास से जुड़ी सहकारी संस्थाओं के 20 लाख कर्मियों को प्रशिक्षित करना है।
विश्वविद्यालय में पीएचडी से लेकर परिचालन स्तर के सर्टिफिकेट कोर्स तक विभिन्न पाठ्यक्रम उपलब्ध होंगे। साथ ही 200 से अधिक सहकारी संस्थाओं को जोड़कर एक राष्ट्रीय सहकारी नेटवर्क तैयार करने का लक्ष्य भी निर्धारित है।
*छत्तीसगढ़ की विशिष्ट उपस्थिति: विचार और अनुभव साझा किए गए*
छत्तीसगढ़ से एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में शामिल हुए घनश्याम तिवारी ने “डिजिटल पैक्स”, “युवा सहकारिता”, “सहकारी प्रशिक्षण का ग्राम केंद्रित मॉडल”, और “छत्तीसगढ़ के PACS नवाचार” जैसे विषयों पर अनुभव साझा किए।
उन्होंने यह भी प्रस्ताव रखा कि छत्तीसगढ़ में विश्वविद्यालय के अध्ययन केंद्र खोले जाएं ताकि राज्य के सहकारी कार्यकर्ताओं को स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षण उपलब्ध हो सके।
उनकी प्रस्तुतियों को कार्यक्रम में उपस्थित विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और नीति-निर्माताओं ने अत्यंत गंभीरता से सुना और सराहा।
*त्रिभुवनदास पटेल के नाम से समर्पित विश्वविद्यालय*
यह विश्वविद्यालय भारत में सहकारिता के जनक कहे जाने वाले त्रिभुवनदास किशीभाई पटेल के नाम पर स्थापित किया जा रहा है, जिन्होंने आनंद मॉडल और अमूल जैसी संस्थाओं के माध्यम से सहकारिता को जन-आंदोलन बनाया।
उनकी स्मृति में यह विश्वविद्यालय सहकारिता को आधुनिक शिक्षा, प्रबंधन, शोध और नवाचार से जोड़ने का माध्यम बनेगा।
*छत्तीसगढ़ की सशक्त सहकारी पहचान को मिला राष्ट्रीय मंच*
घनश्याम तिवारी की सहभागिता इस बात का प्रमाण है कि छत्तीसगढ़ की सहकारी सोच, कार्यसंस्कृति और नेतृत्व अब केवल स्थानीय न होकर राष्ट्रीय विमर्श का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है।
त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय के माध्यम से देशभर में सहकारिता को नया आयाम मिलेगा — और इस परिवर्तनकारी युग की नींव में छत्तीसगढ़ की भी महत्वपूर्ण भूमिका अंकित हो गई है।





