March 12, 2026 10:41 pm
ब्रेकिंग
"नेताजी की अस्थियां कहां हैं?"—सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से किया इनकार; याचिकाकर्ता से पूछा ऐसा सवाल क... Share Market Crash Today 2026: क्यों गिरा आज शेयर बाजार? जानें वे 5 बड़े कारण जिनसे निवेशकों को लगा ... Rahul Gandhi in Lok Sabha: लोकसभा में गूंजा ईरान संकट, राहुल गांधी ने सरकार को घेरा; पूछा— "अमेरिका ... Iran Conflict Update: ईरान में फंसे 9000 भारतीय, विदेश मंत्रालय (MEA) ने बताया वतन वापसी का पूरा प्ल... बड़ी खबर: टेरर फंडिंग केस में शब्बीर शाह को सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत! 7 साल बाद जेल से आएंगे बाहर... LPG Crisis in Rural Areas: ग्रामीण इलाकों में गैस सिलेंडर बुकिंग के नियमों में बदलाव, अब 45 दिन करना... दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर बड़ा अपडेट: अभी इतना काम है बाकी, इन वाहनों को नहीं देना होगा 1 रुपया... संसद में गूंजी थाली-चम्मच की आवाज! LPG संकट पर TMC महिला सांसदों का अनोखा विरोध; सदन में भारी हंगामा... थरूर का मणिशंकर अय्यर को करारा जवाब: "विदेश नीति भाषण देने के लिए नहीं, देश के हित के लिए होती है!" ... फारूक अब्दुल्ला पर हमला? पूर्व CM का खौफनाक खुलासा— "मुझे लगा पटाखा फूटा, बाद में पता चला गोली चली!"...
देश

दुलारचंद की हत्या से मोकामा की जंग हुई और तीखी, क्या जातिगत समीकरणों में उलटफेर करेगी यह राजनीतिक रंजिश?

बिहार का मोकामा, जो दशकों से बाहुबली राजनीति का गढ़ रहा है. अब फिर से जातीय गोलबंदी के भंवर में फंस चुका है. मोकामा में जन सुराज पार्टी के नेता दुलारचंद की मौत केवल एक अपराध नहीं, बल्कि जातीय और राजनीतिक समीकरणों की नई शुरुआत भी मानी जा रही है. विधानसभा चुनाव से पहले यह क्षेत्र एक बार फिर से चर्चा में आ गया है.

कांग्रेस नेता अखिलेश सिंह का कहना है कि बिहार की राजनीति में मोकामा हमेशा सुर्खियों में रहा है. चुनाव में मोकामा अपने बाहुबल की वजह से हॉट क्षेत्र रहा है. उन्होंने कहा कि यहां भूमिहार जाति के नेताओं का दबदबा रहा है. यादव जाति के बड़े प्रभाव वाले इस इलाके में भूमिहार जाति ने अपनी दबंग छवि से यहां वर्चस्व कायम किया. उन्होंने कहा कि छोटे सरकार के नाम से मशहूर, अनंत सिंह दो दशक से इस सीट की राजनीति पर हावी रहे हैं. लेकिन दुलारचंद यादव की हत्या ने एकाएक उस संतुलन को हिला दिया है.

दुलारचंद की हत्या से जातीय समीकरण पर असर

दरअसल, कभी लालू यादव के बेहद करीबी रहे दुलारचंद यादव का राजनीतिक सफर कई दलों और समीकरणों से गुजरा, लेकिन उनकी हत्या ने इस बार पूरे मोकामा क्षेत्र में जातीय ध्रुवीकरण को फिर से जगा दिया है. भूमिहार जाति के नेता भी मानते हैं कि इसका असर सिर्फ मोकामा और उसके आसपास नहीं बल्कि पूरे बिहार की सियासी जातीय समीकरण पर पड़ेगा.

यादव और धानुक समुदाय

वहीं जेडीयू नेता नीरज कुमार का कहना है कि अब यादव और धानुक समुदाय के समीकरण इस सत्ता-संतुलन को चुनौती दे रहे हैं. बदले माहौल में यादव समाज आरजेडी के लिए और नाराज दिख रहा है. वहीं परंपरागत रूप से नीतीश कुमार का वोट बैंक धानुक समाज अब जनसुराज प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी, जो इसी समाज के हैं, इनके साथ गोलबंद हो रहा है. ऐसे में यहीं से मोकामा का सियासी समीकरण भी उलझता हुआ दिख रहा है.

दुलारचंद हत्याकांड के बाद बिहार में 1990 के दशक वाली जातीय गोलबंदी जैसी सियासी तस्वीर भी उभरती हुई दिख रही है. मोकामा को भूमिहारों की राजधानी कहा जाता है, यहां 30 फीसदी से ज्यादा आबादी भूमिहारों की है. यही वजह है कि 1952 से लेकर अभी तक इस सीट पर भूमिहार समाज से आने वाले लोग ही विधानसभा जाते रहे हैं.

Related Articles

Back to top button