लघु गौण फलों के बीज से बढ़ाएं आमदनी, बारिश में पौध रोपण करना कितना फायदेमंद

रायपुर : बारिश के सीजन में माइनर फॉरेस्ट प्रोड्यूस यानी लघु गौण फल जिसमें हर्रा, बहरा, करोंदा, चार, बेर, बेल, चिरौंजी के पौधे तैयार किए जाते हैं. इन पौधों को कैसे तैयार करना है. पौधे तैयार होने के बाद इसके रोपण की क्या विधि है, किस तरह पौध रोपण करना चाहिए और पौधे का रोपण करते समय किस तरह की सावधानी बरतनी चाहिए, इन बातों को ध्यान रखना बेहद जरुरी है. साथ ही बारिश के सीजन में पौधारोपण के क्या फायदे हैं, कौन से क्षेत्र के किसान इन पौधों का रोपण करते हैं.आईए जानते हैं.
बारिश के सीजन में ही बीज करें तैयार : वनग्राम में रहने वाले लोग इन फलों के बीज को जुलाई के महीने में एकत्र नहीं करते हैं, तो ये बारिश के सीजन में नदी नालों में बहकर खराब हो जाते हैं. ऐसे में लघु गौण फल के पौधे जुलाई के महीने में ही तैयार कर लेनी चाहिए. इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर घनश्याम साहू ने बताया कि पूरे प्रदेश में 60 हजार वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र है. पूरे प्रदेश में 668 वनग्राम है. इन वन ग्रामों में महत्वपूर्ण जिले जिसमें दंतेवाड़ा, बीजापुर, नारायणपुर, सुकमा वैसे ही सरगुजा अंचल में कोरिया, जशपुर जैसी जगहों पर वन ग्राम है.
बारिश के सीजन में बीज होते हैं अंकुरित : किसान और वन आश्रित ग्राम के लोगों के लिए बारिश के सीजन में माइनर फॉरेस्ट प्रोड्यूस (लघु गौण फल) जिसमें हर्रा, बहर्रा, करोंदा, चार, चिरौंजी, बेल और बेर है. इन सब फलों का बीज से पौध रोपण किया जाता है. वन धन समिति, वन ग्राम समिति या स्व सहायता समूह इन फलों के बीज से पौधा तैयार करते हैं. यह सभी तरह के फल गर्मी के दिनों में फल देते हैं.बारिश के सीजन में फलों के बीज में अंकुरण आना शुरु हो जाता है.
इन सभी तरह के फलों के बीज से पौध तैयार होता है. बीज को इकट्ठा करना बहुत आवश्यक होता है. मानसून सीजन में जुलाई के महीने में इन बीजों से पौधे तैयार नहीं कर पाए तो यह बीज बारिश में बहकर नदी नालों में जाने के बाद खराब हो जाता है. इसलिए वन आच्छादित क्षेत्र में नए पौधे तैयार नहीं हो पाते है. ऐसे में किसान या वनग्राम में रहने वाले लोगों को विशेष रूप से यह ध्यान रखना होगा की इन बीजों को इस सीजन में एकत्र करके पाली बैग में डालकर पौधे तैयार कर लेना चाहिए. इससे वृक्षारोपण में भी सहायता मिलेगी- डॉ घनश्याम साहू, वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक,IGKVV
खेतों के मेड़ में भी लगा सकते हैं पौध : वन ग्राम में वनों की संख्या को भी बढ़ाया जा सकता है. किसान खेत के मेड़ों पर भी लघु गौण फलों को लगा सकते हैं. सभी फल बहु उपयोगी हैं. यह ऑक्सीजन देने के साथ इमारती लकड़ी देने के साथ ही फल देते हैं. इन फलों की पत्तियों से आसानी से खेतों में खाद भी तैयार किया जा सकता है. जिससे पर्यावरण को भी बचाया जा सकता है.





