February 23, 2026 5:53 pm
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ममता बनर्जी कल शहीद सभा से फूकेंगी चुनावी बिगुल, भाजपा से मुकाबले की रणनीति का करेंगी ऐलान

पश्चिम बंगाल में अगले साल विधानसभा चुनाव है, लेकिन एक साल पहले से ही पूरा बंगाल चुनावी मोड में है.सोमवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी शहीद सभा को संबोधित करेंगी और 2026 के चुनाव की रणनीति का ऐलान करेंगी. अगले साल चुनाव से पहले 21 जुलाई की ममता की आखिरी सभा है. तृणमूल कांग्रेस पहले ही भाजपा शासित राज्यों में बंगालियों के उत्पीड़न के मुद्दे पर बोल चुकी है. ममता बनर्जी ने बंगाली अस्मिता को मुद्दा बनाना शुरू कर दिया है. ममता बनर्जी का आरोप है कि भाजपा बांग्ला भाषियों को निशाना बना रही है और उसे बांग्लादेशी करार दिया जा रहा है. सोमवार की शहीद सभा से ममता बनर्जी एक बार फिर से एनडीए सरकार पर निशाना साधेगी.

यह सभा न सिर्फ पार्टी के लिए राजनीतिक संकल्प का प्रतीक रही, बल्कि इस बार यह बंगाली अस्मिता, केंद्र बनाम राज्य और भाजपा के खिलाफ जन भावनाओं को एकजुट करने की रणनीति के रूप में उभरी हैं.

अगले साल विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भाजपा पहले ही सक्रिय हो गई है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह राज्य का दौरा कर चुके हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी दो बार राज्य का दौरा कर चुके हैं और अपनी सभा में तृणमूल कांग्रेस पर जमकर हमला बोला है. अब ममता बनर्जी भी ममता बनर्जी के खिलाफ अपनी रणनीति का ऐलान सोमवार की शहीद सभा से करेंगी.

’21 जुलाई’ को क्यों ममता मनाती हैं शहीद सभा?

यह सभा हर साल 21 जुलाई को मनाई जाती है, जो 1993 में हुए उस आंदोलन की याद दिलाती है जिसमें ममता बनर्जी, उस समय युवा कांग्रेस नेता के रूप में, मतदाता पहचान पत्र को अनिवार्य करने की मांग को लेकर राइटर्स बिल्डिंग की ओर मार्च कर रही थीं. पुलिस की फायरिंग में उस दिन 13 कार्यकर्ताओं की जान चली गई थी.

इस घटना ने ममता बनर्जी की राजनीतिक सोच और करियर को पूरी तरह बदल दिया. 1998 में तृणमूल कांग्रेस के गठन के बाद यह दिन पार्टी के लिए शहीद दिवस बन गया.

शहीद सभा अब केवल श्रद्धांजलि का आयोजन नहीं, बल्कि तृणमूल कांग्रेस के लिए चुनावी अभियान, जनसंघर्ष, और राजनीतिक संकल्प का केंद्र बन चुकी है. ममता बनर्जी ने इस मंच से 2026 के चुनावों के लिए संदेश देंगी.

चुनावी बिगुल फूकेंगी ममता बनर्जी

इस वर्ष की ‘शहीद सभा’ इसलिए भी अहम है, क्योंकि यह 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले ममता बनर्जी की अंतिम बड़ी सार्वजनिक सभा मानी जा रही है. भाषण के दौरान ममता द्वारा बंगालियों के उत्पीड़न, राज्य के प्रति केंद्र की ‘उपेक्षा’, और केंद्र सरकार द्वारा ‘राज्य के बकाया फंड’ न देने जैसे मुद्दों को उठाए जाने संभावना है. इसके साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इस बार तृणमूल कांग्रेस अपनी चुनावी रणनीति को “बंगाली अस्मिता” के इर्द-गिर्द केंद्रित करेगी.

इस बार तृणमूल कांग्रेस ने 21 जुलाई के कार्यक्रम से पहले ही सड़कों पर उतरकर विरोध की शुरुआत कर दी थी. 16 जुलाई को ममता और अभिषेक बनर्जी ने भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया, जिससे यह संकेत साफ हो गया कि पार्टी इस बार चुनावी अभियान को लंबी दूरी तक ले जाने के मूड में है.

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