February 12, 2026 12:55 am
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किसके दम पर अचानक रूस को धमकाने लगे जेलेंस्की, इस स्ट्रेटेजी से बढ़ाई पुतिन की टेंशन

लगातार तीसरे दिन भी रूस पर यूक्रेन से ताबड़तोड़ प्रहार का सिलसिला जारी है. रूस ने शनिवार को 93 ड्रोन गिरा दिए फिर रूस के कई शहरों में धमाके हुए. रूस में हमले के पीछे NATO की मदद साफ दिखाई दे रही है क्योंकि यूक्रेन के ड्रोन सटीक निशाने के साथ रूस के अहम ठिकानों को टारगेट कर रहे हैं. रूसी तेल ठिकानों को निशाना बनाने के साथ ही सेना से जुड़ी हर चीज पर यूक्रेन प्रहार कर रहा है. रूस के सोची में यूक्रेन ने फिर एक तेल डिपो का नष्ट कर दिया है, वहीं वोल्गोग्राद में गैस पाइपलाइन को निशाना बनाया जिससे रूस की कई फैक्ट्री में काम रुक गया है.

रूस में हालात अब वैसे ही हैं, जैसा अमेरिका और यूरोप ने तय किया है. जंग में यूक्रेन की धमाकेदार वापसी का असर तीसरे दिन भी नजर आ रहा है. हर प्रहार से रूस को बड़ा नुकसान पहुंचाने की रणनीति है. इसलिए रूस में ऑयल रिफाइनरी पर हमले हो रहे हैं. गैस पाइपलाइन को टारगेट किया जा रहा है. रूसी सेना से जुड़े कारखाने और रूसी सेना की सप्लाई लाइन पर प्रहार हो रहा है. शनिवार की रात रूस का सोची इलाका यूक्रेन का प्राइम टारगेट था. रात के अंधेरे में धमाकों के बाद आग की लपटें आसमान छू रही थीं.

रूस को धमका रहे जेलेंस्की

रिपोर्ट के मुताबिक, सोची में लगातार 20 धमाके हुए. हमलों में रूस के एक ऑयल डिपो में आग लग गई. एक गोदाम को भी यूक्रेन ने ड्रोन से निशाना बनाया . यूक्रेनी ड्रोन हमलों से सोची में आग की लपटें उठने लगी. इस डीपो के करीब मौजूद एयरपोर्ट पर 52 उड़ाने रोक दी गईं. रूस के सोची इलाके में लगातार ड्रोन की आवाज़ गूंज रही थी.

ट्रंप से हौसला और यूरोप से हथियार मिलने के बाद यूक्रेन का हमला तीन दिनों से जारी है. लगातार तीन दिनों से यूक्रेन ड्रोन हमले कर रहा है और रूस के कई ठिकानों को भस्म कर चुका है. रूस एयर डिफेंस यूक्रेनी ड्रोन को रोकने में लगातार नाकाम हो रहे हैं. सोची में रोसनेफ्ट नाम के ऑयल डिपो की सुरक्षा के लिए रूस एंट्री ड्रोन नेट का भी इस्तेमाल किया था, लेकिन हमलों को रोका नहीं जा सका.

यूक्रेन के हमले की रफ्तार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शनिवार रात रूस ने कुल 93 ड्रोन गिराए फिर भी धमाके नहीं रोक सका. रूस पर ताबड़तोड़ हमले के बाद राष्ट्रपति जेलेंस्की की आवाज में भी बुलंदी आ गई है. कल तक हथियार के लिए गिड़गिड़ा रहे जेलेंस्की अब रूस को धमकी दे रहे हैं. जेलेंस्की यही आखिरी लाइन सबसे अहम है. रूस को युद्ध खींचने का अंजाम भुगतना होगा.

काला सागर के रास्ते भी यूक्रेन ने किया प्रहार

ट्रंप ने भी कुछ दिन पहले ऐसा ही संकेत दिया था इसलिए जाहिर है कि अब रूस में विनाश का तूफान लाने के लिए यूक्रेन को पर्याप्त बारूद मिलने वाला है. यूक्रेन का तेल ठिकानों के साथ ही अब गैस सप्लाई सिस्टम को भी टारगेट कर रहा है. सोची में तेल डिपो नष्ट हो गया तो वहीं रूस के वोल्गोग्राद में गैस पाइपलाइन को निशाना बनाया गया. सेंट्रल एशिया-सेंटर गैस पाइपलाइन में ड्रोन हमले से भयंकर धमाका हुआ. ये पाइपलाइन तुर्कमेनिस्तान से उज्बेकिस्तान आती है और फिर कजाकिस्तान होते हुए रूस में गैस की सप्लाई पहुंचाती है.

गैस पाइपलाइन में धमाके से रूस के सैन्य औद्योगिक क्षेत्र में हड़कंप मच गया है. गैस की सप्लाई रुकने की वजह से सेना से जुड़े देमीखोव मशीन प्लांट में काम बंद हो गया है. इसके अलावा मिग एयरक्राफ्ट फैक्ट्री में काम रोकना पड़ा है. इसके साथ ही मैग्नम बारूद फैक्ट्री में काम प्रभावित हुआ है. हालांकि वोरोनिश में रिहायशी इलाके में ड्रोन से आग लग गई. माना जा रहा है कि ड्रोन का मलबा गिरने की वजह से इमारत में आग लग गई.

काला सागर के रास्ते भी यूक्रेन ने जबरदस्त प्रहार किया. काला सागर के ऊपर यूक्रेन के 60 ड्रोन गिराए गए. वोरोनिश में 18 ड्रोन गिराए गए. बेलगोरोद में 7 ड्रोन नष्ट किए गए. ब्रियांस्क में 3 ड्रोन गिराए गए, लेकिन यूक्रेन का एक ड्रोन ब्रिज तक पहुंचने में कामयाब रहा. रिपोर्ट के मुताबिक यहां यूक्रेनी सेना ने माइन्स लगा दिया था जिसे एक ड्रोन से ब्लास्ट कराया गया.

अब यूक्रेन के लॉन्ग रेंज ऑपरेशन को समझिए

  • रेयाजान ऑयल रिफाइनरी यूक्रेनी सीमा से 500 KM दूर है.
  • नोवोकुइबिशेव्स्क रिफाइनरी यूक्रेनी सीमा से 850 KM दूर है.
  • वोरोनिश का तेल डिपो यूक्रेनी सीमा से 200 KM दूर है.
  • मिलिट्री इलेक्ट्रॉनिक प्लांट पेंजा यूक्रेनी बॉर्डर से 600 KM दूर है.
  • क्रास्नोदर क्राई का ड्रोन बेस यूक्रेनी सीमा से 400 KM दूर है

रूस के 500 KM की रेंज में ज्यादा ड्रोन हमले हो रहे हैं वक्त के साथ ये बढ़ भी सकता है क्योंकि यूक्रेन 1 हजार किलोमीटर तक हमला करने में सक्षम है. यूक्रेन जिस तरह से रूसी सेना से जुड़ी हर चीज को तबाह कर रहा है उससे जाहिर हो रहा है कि ये प्लानिंग अमेरिका-यूरोप के कमांडर्स एक बहुत सटीक इंटेलिजेंस के साथ कर रहे हैं और यूक्रेन के जरिए उसे अंजाम दिया जा रहा है.

रूस से इंतकाम के लिए हमले जारी हैं, रोस्तोव में फिर रूसी सेना की सप्लाई को टारगेट किया गया. यहां बिजली स्टेशन पर हमला किया गया, जिसकी वजह से फिर रेल रूट बंद करना पड़ा है. 15 दिन में रोस्तोव के रेल रूट पर 2 बार हमला किया जा चुका है. इन हमलों से रूसी सेना की पूर्वी यूक्रेन में हथियार सप्लाई प्रभावित हुई है.

रूस के अलावा जेपोरिजिया में रूसी कब्जे वाले इलाके मेलितोपोल में भी रूसी सेना के काफिले पर हमला हुआ. ये यूक्रेनी एजेंसी खुफिया एजेंसी का हमला था. हमले में बस में सवार 5 चेचन लड़ाकों की मौत हुई है. यूक्रेनी खुफिया एजेंसी लगातार हमले का प्लान कर रही है और जेपोरिजिया में रूसी काफिले पर हमले हो रहे हैं.

जर्मनी से यूक्रेन को मिलेंगे एयर डिफेंस

रूस में लगातार हमलों से लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है, लोग धमाकों के साथ वीडियो बना रहे हैं और सोशल मीडिया पर अपलोड करके सरकार पर निशाना साध रहे हैं. ड्रोन के अलावा अमेरिका गाइडेड बम यूक्रेन की दूसरी ताकत बना है. यूक्रेनी मिग-29 खारकीव में लगातार उड़ान भर रहे हैं और फ्रंटलाइन पर जबरदस्त बमबारी हो रही है. अमेरिकी GBU बम से बेलगोरोद बॉर्डर पर मौजूद तमाम रूसी ठिकानों को नष्ट किया जा रहा है. अगस्त के 3 दिनों में रूस के 920 सैनिकों की मौत हो चुकी है. 43 आर्टिलरी सिस्टम और 123 वाहन नष्ट हो चुके हैं.

जर्मनी से जल्द यूक्रेन को एयर डिफेंस मिलेंगे जिससे राजधानी कीव को सुरक्षित कवच दिया जाएगा. इसके साथ ही पोलैंड भी यूक्रेन को हथियार का पैकेज देने का मन बना रहा है. एक्सपर्ट के मुताबिक, ट्रंप चाहते हैं कि रूस में भारी तबाही हो ताकि पुतिन भी बातचीत की टेबल पर आने के लिए मजबूर हों. इसलिए यूक्रेन से ताबड़तोड़ हमले के साथ ही रूस की धमकियों का जवाब भी दिया जा रहा है.

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