March 7, 2026 1:42 pm
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दिल्ली/NCR

दिल्ली में राहुल गांधी के डिनर से क्या बिहार के महागठबंधन का तीखापन भी कम हो गया?

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को अपने सहयोगियों को एकजुट बनाए रखने को लेकर एक ‘संजीवनी’ मिल गई है. चुनाव में ‘वोट चोरी’ और बिहार में जारी वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के खिलाफ प्रदर्शन के जरिए कांग्रेस विपक्षों दलों को अपने साथ लाने में कामयाब रही है. ये मुद्दा ऐसा है जिस पर सभी विपक्षी दल राजी दिख रहे हैं और उनकी अगुवाई में साथ बने हुए हैं. अब राहुल गांधी ने अपने आवास पर डिनर पर सभी को न्योता देकर बन रही ‘एकता’ को और पुख्ता करने की कोशिश की है.

कर्नाटक के महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र का हवाला देते हुए राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाया और इसे संविधान के खिलाफ करार दिया. इस सनसनीखेज आरोप के बाद कांग्रेस नेता ने अपने आवास पर विपक्षी दलों के ‘इंडिया’ गठबंधन के 25 घटक दलों नेताओं के लिए डिनर का इंतजाम किया. डिनर से पहले राहुल ने महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र में वोटर लिस्ट में कथित धांधली को लेकर एक प्रजेंटेशन भी दिया. इस दौरान वहां उपस्थित सभी नेताओं ने बिहार में जारी SIR प्रक्रिया के साथ-साथ ‘वोट चोरी’ मॉडल का विरोध करने का संकल्प भी लिया.

SIR प्रक्रिया के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश

‘वोट चोरी’ के आरोप के साथ-साथ राहुल गांधी बिहार में SIR प्रक्रिया के खिलाफ माहौल बनाने में जुटे हैं. विपक्षी सदस्यों के साथ संसद को चलने नहीं दिया जा रहा है. अब कांग्रेस पार्टी के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बताया कि डिनर के दौरान आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने SIR प्रक्रिया के खिलाफ निकाली जाने वाली यात्रा पर चर्चा की. साथ ही उन्होंने एक सितंबर को इसके खत्म होने के दौरान गठबंधन के सभी नेताओं को शामिल होने के लिए न्योता भी दिया. साथ ही विपक्षी नेता सोमवार को इन दोनों मसलों पर दिल्ली में संसद भवन से चुनाव आयोग मुख्यालय तक विरोध मार्च निकालेंगे.

भले ही राहुल गांधी ने अपने ‘वोट चोरी’ के आरोप के लिए बेंगलुरु के महादेवपुरा क्षेत्र का जिक्र किया. लेकिन इसका असर बिहार में आगामी चुनाव में भी दिखाई देगा, ये तो तय लग रहा है. लोकसभा चुनाव के बाद से करीब-करीब निष्क्रिय पड़ चुके इंडिया गठबंधन में कांग्रेस जान फूंकने की कोशिश कर रही है. इसका अंदाजा ऐसे लगाया जा सकता है कि पिछले साल 2024 में हुए लोकसभा चुनाव के तुरंत बाद जून में गठबंधन की आखिरी बैठक की गई थी, तब यह बैठक कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर हुई थी. इस बार राहुल गांधी के आवास पर 25 विपक्षी दलों के कई शीर्ष नेता शामिल हुए.

राहुल की डिनर पार्टी में शामिल हुए मुकेश सहनी

कांग्रेस की अगुवाई में बिहार में जारी SIR प्रक्रिया को लेकर लगातार विरोध किया जा रहा है. कांग्रेस विपक्षी दलों के दम पर SIR प्रक्रिया पर चर्चा की मांग को लेकर संसद नहीं चलने दे रही है. इनकी एकजुटता बढ़ती जा रही है. इस डिनर के जरिए बिहार चुनाव में गठबंधन में शामिल दलों के बीच अपनी खटास को भी कम करने का मौका मिला. राहुल की डिनर पार्टी और इंडिया गठबंधन की बैठक में शामिल होने के बाद मुकेश सहनी ने कहा कि हम लोग लगातार लगे हुए हैं, हम लोग कोशिश करेंगे कि वोटर्स का वोट न कटने पाए. चुनाव आयोग अपना काम सही तरीके से नहीं कर रहा है. ‘वोट चोरी’ को रोकने की कोशिश में हम लोग लगे हुए हैं

इंडिया गठबंधन बिहार में महागठबंधन के नाम पर चुनाव लड़ता है और इसकी अगुवाई राष्ट्रीय जनता दल यानी आरजेडी कर रही है. महागठबंधन में शामिल दलों के बीच बिहार चुनाव के लिए सीट शेयरिंग को लेकर बातचीत जारी है, लेकिन अभी यह किसी मुकाम पर नहीं पहुंच पाई है. मुकेश सहनी की पार्टी विकासशील इंसान पार्टी भी महागठबंधन का हिस्सा है, लेकिन सीट शेयरिंग पर हो रही देरी को लेकर वह कहीं नाराज भी दिख रहे हैं. यही वजह है कि पिछले दिनों मुकेश सहनी ने सोशल मीडिया के जरिए राज्य में 60 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया.

सीट शेयरिंग पर महागठबंधन में दिख रहा तनाव

मुकेश सहनी के 60 सीटों पर उम्मीदवार लड़ने के एकतरफा ऐलान से महागठबंधन की एकता पर सवाल उठने लगे थे, और यह कहा जाने लगा कि मुकेश सहनी 2020 के चुनाव की तरह ही इस बार भी कहीं चुनाव से ऐन पहले पाला न बदल लें. पिछली बार सीट शेयरिंग पर बात नहीं बनने से मुकेश सहनी भड़क गए और महागठबंधन से बाहर निकलकर एनडीए का दामन थाम लिया. बीजेपी ने अपने कोटे से मुकेश सहनी की पार्टी को 11 सीटों पर चुनाव लड़ने का मौका दिया और 4 सीटों पर जीत भी हासिल करने में कामयाब भी रही.

तब तेजस्वी यादव ने मुकेश सहनी को 25 सीटें और उपमुख्यमंत्री का पद नहीं दिया तो इस बार वह जो 60 सीटें चाह रहे हैं, उसके भी मिलने की संभावना कम नजर आ रही है. सत्ता पर अपनी पकड़ पुख्ता करने के इरादे से तेजस्वी यादव इस बार पिछली बार की तुलना में अधिक सीटों पर चुनाव लड़ना चाहते हैं. ऐसे में वह मुकेश सहनी की VIP को 60 सीटें नहीं देने जा रहे. जो कांग्रेस 2020 के चुनाव में 70 सीटों पर लड़ी थी उसे भी पिछली बार की तुलना में कम सीटें मिलने की संभावना जताई जा रही है.

बिहार में महागठबंधन का क्या होगा

महागठबंधन में अंदरखाने में सीट शेयरिंग पर तनातनी की स्थिति बनी हुई है, इस बीच दिल्ली में राहुल गांधी ने अपने आवास पर डिनर पार्टी में तेजस्वी यादव और मुकेश सहनी को एक जगह बुलाकर महागठबंधन के लिए बड़ा काम किया है. संबंधों में जो कड़वाहट घुलती दिख रही थी, उसमें गिरावट आने के आसार बढ़ गए हैं. हो सकता है कि कांग्रेस दोनों मसलों पर बिहार में इस कदर माहौल बनाने में कामयाब हो जाए कि इसके दवाब में मुकेश सहनी के पास महागठबंधन में बने रहने का फैसला लेना पड़ जाए.

बिहार में महागठबंधन का क्या होगा, मुकेश सहनी फिर से साथ छोड़ते हैं या नहीं, यह सब अगले कुछ दिनों के प्रदर्शन और चुनावी माहौल पर निर्भर करेगा. कांग्रेस को अन्य क्षेत्रीय दलों को अपने साथ बनाए रखने के लिए ‘वोट चोरी’ और बिहार में SIR के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन का सिलसिला बनाए रखना होगा.

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