February 24, 2026 8:53 am
ब्रेकिंग
Ramadan 2026- साल में दो बार आएगा रमजान का महीना? जानिए कब बनेगा ऐसा दुर्लभ संयोग और क्या है इसके पी... Paneer Shimla Mirch Recipe: शेफ कुनाल कपूर स्टाइल में बनाएं पनीर-शिमला मिर्च की सब्जी, उंगलियां चाटत... Kashmir Encounter News: घाटी में आतंक का अंत! 'ऑपरेशन त्रासी' के तहत सैफुल्ला सहित 7 दहशतगर्द मारे ग... Jabalpur News: जबलपुर के पास नेशनल हाईवे के पुल का हिस्सा ढहा, NHAI ने पल्ला झाड़ा; कहा- यह हमारे अध... बड़ा खुलासा: शंकराचार्य पर FIR कराने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी का खौफनाक अतीत! रेप और मर्डर जैसे संगीन ... Crime News Bihar: एक क्लिक पर बुक होती थीं लड़कियां, बिहार पुलिस ने उजागर किया मानव तस्करी का 'मामी-... Namo Bharat New Routes: दिल्ली-मेरठ के बाद अब इन 3 रूटों पर चलेगी नमो भारत, जानें नए कॉरिडोर और स्टे... Haryana News: पंचायतों के राडार पर सिंगर मासूम शर्मा, विवादित बयान/गाने को लेकर मचा बवाल, जानें क्या... बड़ी खबर: बिहार के IG सुनील नायक को आंध्र पुलिस ने पटना में किया गिरफ्तार! पूर्व सांसद को टॉर्चर करन... NCP-SP vs Ajit Pawar: पायलट सुमित कपूर की भूमिका पर उठे सवाल, विधायक ने अजीत पवार विमान हादसे को बता...
बिहार

बिहार SIR: राजनीतिक दलों को सुप्रीम कोर्ट का आदेश-जिनके नाम छूट गए BLA से उनकी मदद कराएं

बिहार में चल रहे चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान यानी SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई हुई है. इस दौरान शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में कहा कि चुनाव आयोग ने हमारे निर्देशों का अनुपालन किया है. उसकी ओर से हलफनामा भी दिया गया है. कोर्ट ने आदेश देते हुए कहा कि राजनीतिक दलों के बीएलए द्वारा आपत्तियां और दावे दर्ज कराए जाएं. 12 राजनीतिक दलों के बीएलए, जो 1.6 लाख बीएलए हैं और प्रति दस के हिसाब से 16 लाख आपत्तियां और दावे शेष दस दिनों में दर्ज करा सकते हैं. नए वोटर जुड़ रहे हैं. राजनीतिक दल के प्रतिनिधि तय तिथि तक आपत्ति और दावे की जानकारी चुनाव आयोग को मुहैया कराएं.

कोर्ट ने कहा कि हम आश्चर्यचकित हैं कि 1.6 लाख बीएलए राजनीतिक दलों के हैं और उनकी तरफ से आपत्तियां सामने नहीं आ रही हैं. वो आपत्तियां और दावे करें. हर एक वोटर का अधिकार है कि वो मतदाता बनने का आवेदन करे और आपत्ति भी दर्ज कराए. इन वोटरों की सहायता 12 राजनीतिक दलों को करनी चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राजनीतिक दल अपने बीएलए को निर्देश दें कि वो ब्लॉक्स, पंचायतों, रिलीफ कैंप, गांवों समेत सभी क्षेत्रों में वोटरों की सहायता करें. आधार समेत अन्य दस्तावेज, जो ग्यारह में नहीं हैं, वो मुहैया कराएं.

सुप्रीम कोर्ट को चुनाव आयोग ने बताया 22 लाख वोटर मृत हैं और 7 लाख के डबल हैं. इस पर अदालत ने कहा कि हम मानकर चलते हैं कि 22 लाख वोटर मृत हैं, लेकिन डबल क्यों? चुनाव आयोग ने कहा कि यह आयोग का कर्तव्य है कि वह डबल ईपीआईसी ना होने दे और जो लोग बिहार से बाहर भी ईपीआईसी रखते हैं. उनका हटाना पड़ता है.

बिहार चुनाव आयोग को क्या दिया निर्देश?

शीर्ष अदालत ने कहा कि बिहार सीईओ को हम आदेश देते हैं कि वो राजनीतिक दलों के अध्यक्ष और महासचिव को नोटिस जारी करें कि वो इस मसले पर अदालत के आदेश पर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करें. बीएलए ऑनलाइन और निजी तौर पर 65 लाख हटाए गए मामलों में आपत्तियां और दावों की पेशकश कर सकते हैं. चुनाव आयोग के बीएलओ फिजिकल फॉर्म में दिए गए बीएलए द्वारा मुहैया कराए गए आपत्ति और दावों की पुष्टि के लिए नोट दें. वेबसाइट पर आवेदन कराने को लेकर भी एक्नॉलेज किया जाए.

इससे पहले याचिकाकर्ता की वकील वृंदा ग्रोवर ने कहा कि यह समस्या 65 लाख लोगों से परे है. जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि हमें तो बस राजनीतिक दलों की निष्क्रियता पर आश्चर्य है. बीएलए नियुक्त करने के बाद, वे क्या कर रहे हैं? लोगों और स्थानीय राजनीतिक व्यक्तियों के बीच दूरी क्यों है? आखिर राजनीतिक दलों ने सहयोग के नाम पर चुप्पी क्यों साध रखी है. आगे क्यों नहीं आ रहे हैं और आप इसे लेकर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करें. वहीं, चुनाव आयोग ने कहा कि एडीआर समेत कोई भी राजनीतिक दल आगे नहीं आ रहे हैं और यहां पर बिना किसी आधार के आरोप लगा रहे हैं.

याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि राज्य के कई इलाकों में बाढ़ है, वो नहीं आ सकते. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राजनीतिक दलों के बीएलए सहायता करें. इस परआयोग ने कहा कि सभी राजनीतिक दलों के बीएलए हैं. सुप्रीम कोर्ट ने सवाल पूछा कि राजनीतिक दल क्यों आगे नहीं आ रहे, आरोप से इतर जमीन पर काम करें, हकीकत का पता लगेगा.

‘राजनीतिक दलों के पास 1.60 लाख बीएलए’

आयोग ने कहा कि राजनीतिक दलों के पास 1.60 लाख बीएलए हैं और अगर अगले दस दिनों में प्रति बीएलए 10 आपत्ति या दावों का सत्यापन करें तो 16 लाख लोगों के बारे में वैरिफिकेशन किया जा सकेगा. 65 लाख छूटे हुए लोगों में बीएलए की ओर से यह कार्यवाही महत्वपूर्ण होगी और वह भी हकीकत जान सकेंगे. वह डिजिटली और निजी तौर पर लोगों से मिलकर यह सहायता कर सकते हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा यह तो बेहतर तरीका हो सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने आयोग से पूछा कितने नए 18 साल वाले वोटर जुड़े हैं और क्या नए को जोड़ने में भी बीएलए काम आ सकते हैं. चुनाव आयोग ने कहा कि ERO बिना उचित जांच के किसी का भी नाम नहीं काट सकते और इसके बाद डीएम-सीईओ के पास अपील का अधिकार लोगों के पास है, जो 25 सितंबर तक अपील कर सकते हैं.

Related Articles

Back to top button