बस्तर जिले में अधिकारी-कर्मचारी संघ का धरना, कहा- सरकार कर रही वादाखिलाफी

जगदलपुर: छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में शुक्रवार को अधिकारियों और कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया. आंदोलन के चलते कलेक्ट्रेट, तहसील और जिला पंचायत जैसे सरकारी दफ्तरों में ताले लटक गए और आम लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा.
मोदी की गारंटी पर सवाल: कर्मचारियों ने वादा पूरा न करने का आरोप लगाया. कहा कि, राज्य और केंद्र सरकार ने चुनाव के समय कई वादे किए थे, लेकिन अब तक उन पर अमल नहीं हुआ है. आंदोलनकारियों ने कृषि मंडी से रैली निकाली और बस्तर कलेक्टर को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा.
मोदी गारंटी के तहत वेतन विसंगति दूर करने, 30 दिन से अधिक छुट्टी की सुविधा और DA (महंगाई भत्ता) एकमुश्त देने की बात कही गई थी. लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ. सरकार ने DA की घोषणा तो की है, लेकिन उसे नवंबर से लागू करने की बात कही गई है, जिससे कर्मचारियों में गहरा असंतोष है- कैलाश कुशवाहा, बस्तर प्रभारी, छत्तीसगढ़ फेडरेशन
पहले भी दिया था ज्ञापन, अब दूसरा चरण शुरू: फेडरेशन का कहना है कि उन्होंने 16 जुलाई को भी अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा था. लेकिन जब सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो यह आंदोलन उसके दूसरे चरण के रूप में किया गया.
अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी: कर्मचारी संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार जल्द उनकी मांगें नहीं मानती, तो वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जा सकते हैं. इस आंदोलन में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों से लेकर राज्य स्तरीय अधिकारियों तक ने हिस्सा लिया.
कामकाज ठप, जनता हुई परेशान: धरना-प्रदर्शन की वजह से कई सरकारी दफ्तरों में काम पूरी तरह ठप रहा. आम जनता जो अपने जरूरी कामों के लिए दफ्तर पहुंची थी, उन्हें बिना काम के ही लौटना पड़ा.
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि सरकार ने चुनाव से पहले जो वादे किए थे, अब उन्हें निभाने का समय आ गया है. यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया, तो आंदोलन और भी तेज होगा, जिसका सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा.





