देशभर में शुरू होगी बाघों की गणना, वन मंडल का मास्टर प्लान तैयार, हर 4 साल में होती है काउंटिंग

इंदौर: राष्ट्रीय बाघ संरक्षण के निर्देश पर हर 4 साल में एक बार होने वाली बाघों की गणना के दौरान इस बार जंगलों के शाकाहारी और मांसाहारी दोनों प्रकार के वन्य जीवों की गिनती होगी. इधर, इंदौर में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के निर्देश पर बाघ गणना के लिए इंदौर वन मंडल का मास्टर प्लान तैयार किया गया है. इसके लिए पहली बार इंदौर वन मंडल में 2 दिनों तक गणना संबंधित अभ्यास किया जाएगा.
4 चरणों में होगी गणना
अखिल भारतीय बाघ गणना, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के दिशा निर्देश पर वन्य जीव संस्थान और सभी राज्य के वन मंडलों द्वारा हर चार साल में आयोजित की जाती है. इसके जरिए भारत सहित सभी राज्यों की वन संरक्षण नीतियों का निर्धारण किया जाता है. फिलहाल इस वर्ष अखिल भारतीय बाघ गणना 4 चरणों में होगी. पहले चरण में मैदानी सर्वेक्षण के दौरान, बाघों और अन्य मांसाहारी वन्य जीवों के पद चिन्ह, मल, पेड़ों पर और जमीन पर उनके पंजों की खरोंच, उनके द्वारा शिकार किये गये शिकारों के अवशेष संकलित कर दर्ज किए जाते हैं.
कैप्चर-रिकैप्चर तकनीक से होगी बाघों की गणना
दूसरे चरण में सेटेलाइट आधारित रिमोट सेंसिंग डेटा के साथ जोड़ कर वन की क्षति, अवैध कब्जे, वन्य जीवों के कॉरिडोर और मानवीय दखलंदाजी का आंकलन किया जाता है. तीसरे चरण में वन्य इलाकों की चयनित ग्रिडस में कैमरे से वन्य जीवों की निगरानी की जाती है. बाघों की खास धारियों के आधार पर उनकी पहचान कर कैप्चर-रिकैप्चर तकनीक से उनकी संख्या का अनुमान लगाया जाता है. चौथे चरण में सभी चरणों से प्राप्त आंकड़े अथवा जानकारियों का सांख्यकीय विश्लेषण कर अंतिम वैज्ञानिक रिपोर्ट तैयार होगी.
इंदौर में ऐसी है तैयारी
डीएफओ इंदौर प्रदीप मिश्रा ने बताया कि “बाघ गणना के लिए वन मंडल स्तरीय ट्रेनिंग पहले ही दी गई थी. हालांकि, इसके पहले 11 और 12 दिसंबर को 2 दिन की मॉक ड्रिल (बाघ की गणना) का अभ्यास किया जाएगा. बाघ गणना के दौरान प्रशासनिक समन्वय, एडमिनिस्ट्रेशन कोऑर्डिनेशन की जिम्मेदारी एसडीओ राला मंडला योहान कटारा और तकनीकी समन्वय की जिम्मेदारी वन रक्षक प्रवीण मीणा को दी गई है.”
इस अभियान के तहत इंदौर के वन्य क्षेत्र में लगभग 100 कैमरे लगाए जा रहे हैं जो कुल 700 वर्ग किलोमीटर में से 200 वर्ग किलोमीटर के वन क्षेत्र को कवर करेंगे. वन विभाग ने बाघों से संबंधित संभावना वाले क्षेत्र को 2 वर्ग किलोमीटर की ग्रिड्स में अलग-अलग विभाजित किया है. इसके जरिए कैमरे लगाकर वन्य जीवों पर नजर रखी जा सकेगी. विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, इसके लिए वाइल्ड लाइफ कंजर्वेशन ट्रस्ट का सहयोग लिया जा रहा है. कैमरा ट्रैपिंग कोऑर्डिनेशन की जिम्मेदारी वाइल्ड लाइफ कंजर्वेशन ट्रस्ट के बायोलॉजिस्ट प्रोग्राम मैनेजर विवेक तुमसरे को दी है.





