April 4, 2026 12:28 am
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छत्तीसगढ़

बलौदाबाजार में रेफरल सिस्टम पर सवाल, मरीज को निजी अस्पताल ले जाकर वसूले 10 हजार, इलाज भी नहीं किया

बलौदाबाजार: जिले में सामने आए एक मामले ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए है. दरअसल, पलारी विकासखंड के ग्राम सीतापार निवासी राजा ध्रुव एक सड़क हादसे का शिकार हुए. डॉ. अशोक वर्मा के अनुसार, बलौदाबाजार जिला अस्पताल में भर्ती कराने के बाद उन्हें रायपुर मेकाहारा रेफर किया गया. लेकिन परिजनों के अनुसार, जिला अस्पताल में ही एक एंबुलेंस ड्राइवर ने उन्हें ओंकार नाम के निजी अस्पताल पहुंचा दिया. यहां परिजनों से 10 हजार रुपये वसूले गए, साथ ही इलाज भी नहीं किया.

कैसे हुआ हादसा?: रविवार को राजा ध्रुव आदिवासी समाज के एक जिला स्तरीय कार्यक्रम में शामिल होने बलौदाबाजार आए थे. कार्यक्रम खत्म होने के बाद लौटते वक्त सड़क हादसे का शिकार हुए. हादसे में राजा का हाथ टूट गया, सिर और चेहरे पर गंभीर चोट आई. परिजनों ने उन्हें फौरन बलौदाबाजार जिला अस्पताल लेकर आए.

रेफरल सिस्टम का खेल: मेकाहारा रेफर करने के नाम पर राजा ध्रुव को एंबुलेंस में बैठाया गया. इस बीच रास्ते में एंबुलेंस ड्राइवर ने परिजनों को विश्वास में लिया और कहा मेकाहारा में बहुत समय लग जाएगा, वहां भीड़ ज्यादा है. ओंकार अस्पताल में तुरंत इलाज मिलेगा. गरीब और घबराए परिजन झांसे में आ गए.

निजी अस्पताल ने वसूले पैसे: परिजनों के मुताबिक, ओंकार अस्पताल प्रबंधन ने भर्ती के नाम पर 10 हजार रुपये वसूले और इलाज शुरू नहीं किया. मरीज के पिता ने कहा कि, अस्पताल ने आयुष्मान कार्ड के बाद भी कुछ फीस लगेगी कहा.

Referral Scam Private Hospital

वही डॉक्टर सरकारी में, वही प्राइवेट में भी?: परिजनों का यह भी आरोप है कि जो जिला अस्पताल में पदस्थ डॉक्टर वसीम रजा ही निजी अस्पताल में भी थे. पिता ने कहा कि, जो डॉक्टर जिला अस्पताल में ‘इलाज नहीं होगा’ कह रहे थे, वही प्राइवेट अस्पताल में इलाज के पैसे मांग रहे थे.”

जिला अस्पताल ने पल्ला झाड़ा: इस मामले में जब जिला अस्पताल प्रबंधन से जवाब मांगा गया तो सिविल सर्जन ने कहा कि, हमारे यहां से मेकाहारा ही रेफर करते हैं. आगे की जानकारी नहीं है.

24 तारीख को एक पेशेंट राजा ध्रुव को जिला अस्पताल लेकर आये थे. प्राइमरी ट्रीटमेंट किया गया जिसके बाद मरीज को हमने हायर सेंटर भेज दिया था– डॉ. अशोक वर्मा, जिला अस्पताल

प्राइवेट अस्पताल ने नहीं दिया कोई जवाब: इस मामले में ओंकार अस्पताल प्रबंधन से बात करने की कोशिश की गई लेकिन वर्जन देने से इनकार कर दिया गया. साथ ही पत्रकारों से बदसलूकी करने और धमकी देने का भी आरोप है.

उठ रहे कई सवाल-

  • अगर रेफर किया गया था तो एंबुलेंस ड्राइवर की जवाबदेही क्यों तय नहीं हुई?
  • क्या जिला अस्पताल प्रशासन की कोई निगरानी व्यवस्था नहीं है?
  • निजी अस्पतालों से जुड़े ऐसे दलाल नेटवर्क पर लगाम कौन लगाएगा?
  • स्वास्थ्य मंत्री के प्रभारी जिले में भी लापरवाही का जिम्मेदार कौन?
  • रेफरल सिस्टम के नाम पर कहीं दलाली तो नहीं हो रही?
  • एंबुलेंस ड्राइवरों और निजी अस्पतालों के बीच कोई मिलीभगत, या जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होगी?

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