बेमेतरा के नवागढ़ में दुर्लभ शमी गणेश मंदिर, मान्यता अनुसार 704 ईस्वी में तांत्रिक विद्या से हुई स्थापना

बेमेतरा: नवागढ़ में श्री सिद्ध शमी गणेश मंदिर एक दुर्लभ और अत्यंत प्राचीन गणेश मंदिर है. भक्तों की मान्यता है कि इसकी 704 ईस्वी में तांत्रिक विद्या से हुई थी. इस मंदिर की मुख्य विशेषता इसके सामने विराजमान शमी वृक्ष है, जिसे शनि देव का अवतार माना जाता है, और यह भारत में अपनी तरह का अनोखा मंदिर है. मान्यता है कि यहां दर्शन करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं. यह मंदिर देशभर के भक्तों के लिए आस्था का बड़ा केंद्र है. गणेश चतुर्थी के दौरान हजारों हजार की संख्या में यहां भक्त भगवान के दर्शन और भजन के लिए आते हैं.
श्री सिद्ध शमी गणेश मंदिर: श्री सिद्ध शमी गणेश मंदिर 1300 साल पुराना बताया जाता है. मंदिर का निर्माण अष्टकोणीय है. वहीं मंदिर परिसर में एक कुंआ भी अष्टकोणीय है. मंदिर परिसर में कई प्राचीन शिलालेख भी हैं. मान्यता के मुताबिक यहां पूजा-अर्चना और समी पत्र प्राप्त करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. देश के विभिन्न कोनों से श्रद्धालु गणेश जी के दर्शन करने यहां बड़ी संख्या में सालों भर आते हैं. गणेश चतुर्थी पर यहां 10 दिनों तक विशेष पूजन का आयोजन होता है.
अदभुत है गणपति का दरबार: नवागढ़ के शमी मंदिर के चारों ओर देश और राज्य के प्रमुख सिद्ध गणेश मंदिरों की आकृतियां स्थापित की गई हैं. जैसे महाराष्ट्र के सिद्धी टेक, गिरिजात्मज, चिंतामणी, महागणपति, वरद विनायक, मयूरेश्वर, बल्लालेश्वर और विघ्नेश्वर के दर्शन यहां एक ही जगह पर भक्तों को हो जाते हैं.
तंत्र विद्या का केंद्र बिंदु है मंदिर-इतिहासकार: बेमेतरा जिला के इतिहासकार बसुबंधु दिवान ने बताया कि नवागढ़ रियासत के राजा नरवर साय ने श्री गणेश की मूर्ति की स्थापना की. मंदिर के अग्रभाग में शमी का वृक्ष है. यहां मंदिर परिसर में अष्टकोणी कुआं, प्राचीन शिलालेख लिखे मिलते हैं. कल्चुरी शासकों के परवर्ति शासकों ने मंदिर का निर्माण कराया था. इतिहास और साहित्य में इसकी बहुत जानकारी मिलती है. इतिहासकार बताते हैं कि गणेश मंदिर निर्माण 704 ई के आसपास हुआ है. मंदिर में निरंतर यज्ञ, कर्म, हवन होम पूर्व में चलते रहता था. लोग बड़ी संख्या में यहां अपनी मनोकामना पूरी करने और दर्शन को आते हैं. तांत्रिक पद्धतियों और तांत्रिक सिद्धियों के माध्यम से लोग अपनी मनोकामना की पूर्ति यहां करते आते हैं. कई प्राचीन ग्रंथों मे इसका उल्लेख मिलता है.
महाराष्ट्रीयन ब्राह्मणों ने शुरू कराई पूजा: शमी गणेश मंदिर की स्थापत्य कला देखने लायक है, यह अष्टकोणीय मंदिर है. यहां कुछ शिलालेख भी मौजूद हैं, लेकिन इस पर लिखी लिपि या भाषा का अब तक पता नहीं चल सका है. कई जानकर लोगों ने इसे पढ़ने की कोशिश की, मगर नहीं पढ़ सके. मंदिर परिसर में अष्टकोणीय कुआं भी है. बताते है कि 1880 में महाराष्ट्रीयन ब्राह्मणों ने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था और वहां से आए सैनिकों ने गणेश जी की पूजा शुरू की तभी से इस मंदिर का महत्व एक बार फिर लोगों तक पहुंचा.
मंदिर का जीर्णोद्धार: 20 वर्ष पूर्व तत्कालीन पर्यटन मंत्री दयाल दास बघेल के प्रयास से मंदिर का जीर्णोद्धार हुआ. श्रद्धालुओं के लिए ठहरने की कोई सुविधा यहां नहीं है. मंदिर तक पहुंचने वाली सड़कें संकरी हैं. स्थानीय पुजारी और श्रद्धालु शासन-प्रशासन से मंदिर के विकास की मांग कर रहे हैं. लोगों का कहना है कि सरकार अगर ध्यान दे तो इस मंदिर का महत्व और भी बढ़ सकता है. प्रदेश का यह अद्भुत श्री शमी गणेश मंदिर आस्था, इतिहासऔर चमत्कार का संगम है. भक्तों का विश्वास है कि यहां गणेश और शमी वृक्ष के दर्शन मात्र से जीवन के दुख दूर होते हैं और मंगलकामनाएं पूरी होती हैं.





