February 22, 2026 8:09 pm
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मध्यप्रदेश

पत्नी करती थी घर की ज्यादा साफ-सफाई, पति को नहीं था पसंद… 22 साल बाद कोर्ट ने तलाक पर सुनाया ये फैसला

मध्य प्रदेश की जबलपुर हाईकोर्ट ने बैतूल निवासी एक दंपति के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवाद को समाप्त करते हुए पति पत्नी के बीच तलाक की मंजूरी दे दी है. जस्टिस विशाल धगट और जस्टिस रामकुमार चौबे की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट कहा कि पति-पत्नी पिछले 22 वर्षों से अलग रह रहे हैं और अब मेल-मिलाप की कोई संभावना शेष नहीं है. इसलिए इस स्थिति में विवाह को भंग करना ही न्यायोचित है और यह कहते हुए दोनों को तलाक की मंजूरी दे दी.

दरअसल, बैतूल निवासी निरंजन अग्रवाल का विवाह नागपुर निवासी नीला के साथ 7 फरवरी 1988 को हिंदू रीति-रिवाजों से हुआ था. प्रारंभिक वर्षों में संबंध ठीक रहे, लेकिन बाद में नीला ने अलग घर बसाने की जिद की और उसका व्यवहार अजीब होता चला गया. स्थिति इतनी बिगड़ गई कि वर्ष 2003 में नीला मायके चली गई और तब से पति-पत्नी का साथ छूट गया. निरंजन का आरोप था कि पत्नी मानसिक रोग स्किजोफ्रेनिया से पीड़ित थी और यह तथ्य विवाह के समय छिपाया गया था.

खाना भी नहीं बनाती थी पत्नी

इसके साथ ही पति निरंजन अग्रवाल ने पत्नी नीला पर आरोप लगाया था कि उसकी सफाई को लेकर आदतें सामान्य दायरे से बाहर थीं. वह रोजाना घर की दीवारों से लेकर फर्श तक को धुलवाती थी और बाहर से लाई गई वस्तुओं को भी बार-बार धुलने के लिए बाध्य करती थी. बच्चों पर भी उसका यही दबाव था कि वे सुबह छह बजे से पहले स्नान करें. पति का कहना था कि नीला न तो समय पर भोजन तैयार करती थी और न ही बच्चों के टिफिन की व्यवस्था करती थी, जिसके कारण वे अक्सर बिना खाना खाए ही स्कूल चले जाते थे.

पति दे दी थी तलाक की अर्जी

पति निरंजन ने पहले ट्रायल कोर्ट में तलाक की अर्जी दाखिल की थी. लेकिन 13 मई 2005 को निचली अदालत ने उसका आवेदन खारिज कर दिया. इसके बाद निरंजन ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. हाईकोर्ट ने प्रस्तुत साक्ष्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए माना कि दोनों के बीच अब सहजीवन की गुंजाइश खत्म हो चुकी है. लगातार 22 साल अलग रहने और पत्नी के असामान्य आचरण को देखते हुए अदालत ने माना कि यह मानसिक क्रूरता का मामला है जो हिंदू विवाह अधिनियम के अंतर्गत तलाक का वैध आधार है. इस अपील की पैरवी अधिवक्ता अविनाश जरगर ने की. सुनवाई के दौरान पति की ओर से यह तर्क रखा गया कि पत्नी का व्यवहार न केवल असहनीय था बल्कि उसने वैवाहिक जीवन को कठिन बना दिया था.

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