February 23, 2026 12:20 pm
ब्रेकिंग
Calcutta High Court Decision: कलकत्ता हाई कोर्ट का सख्त आदेश: बीमारी के अलावा नहीं मिलेगी छुट्टी, जज... Trump Resort Intrusion: डोनाल्ड ट्रंप के रिसॉर्ट में घुसपैठ की कोशिश, सीक्रेट सर्विस ने 20 साल के सं... Business News: होली फेस्टिवल पर इकोनॉमी में उछाल: 80,000 करोड़ रुपये के कारोबार से झूम उठेंगे कारोबा... पंजाब के उद्योग मंत्री संजीव अरोड़ा की उद्योगपति सज्जन जिंदल से मुलाकात; राजपुरा में इस्पात क्षेत्र ... Digital Arrest Awareness: PM मोदी का देश को संदेश, डिजिटल अरेस्ट के फ्रॉड से कैसे बचें? जानें बैंक अ... Security Alert: 8 संदिग्धों की गिरफ्तारी से बड़ा खुलासा, पाकिस्तान-बांग्लादेश से जुड़े तार, कई शहरों... मेरठ वालों की बल्ले-बल्ले! पीएम मोदी ने शुरू की मेरठ मेट्रो, अब दिल्ली पहुंचने में लगेगा एक घंटे से ... Maharashtra Politics: राज्यसभा चुनाव से पहले आदित्य ठाकरे ने क्यों छेड़ा NCP विलय का मुद्दा? MVA के ... Crime News: गले पर चाकू और बेटी पर छोड़ा कुत्ता, मां को बचाने थाने पहुंची मासूम बच्ची; पुलिस ने ऐसे ... बड़ी खबर: अदालत के आदेश के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ कड़ा एक्शन, पुलिस ने शुरू की घटनास्...
छत्तीसगढ़

स्थानीय बोलियों में मिलेगी प्राथमिक स्कूलों में सरल शिक्षा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत पायलट प्रोजेक्ट

सरगुजा : छत्तीसगढ़ के स्कूलों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत द्विभाषीय पाठ्यक्रम अनिवार्य है. मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद अब प्रदेश की 23 स्थानीय बोलियों में से 16 बोलियों में पाठयक्रम बनाए गए हैं. साथ ही कक्षा पहली से पांचवीं तक छात्रों को स्थानीय बोली में पढ़ने की सुविधा दी जा रही है. इसके लिए शिक्षकों को जागरूक और प्रशिक्षित करने का सिलसिला बस्तर और सरगुजा में जारी है.

स्कूल में बच्चा लेकर आता है अपनी संस्कृति : एससीईआरटी के राज्य एमएलई एवं एनईपी प्रभारी सुशील राठौड़ के मुताबिक एससीईआरटी ने स्कूलों से ये जानकारी जुटाई तो पता चला कि छत्तीसगढ़ के स्कूलों में पहली क्लास में जब बच्चा आता है तो वो जन्म से अपनी एक भाषा और संस्कृति लेकर आता है. वो उस भाषा और संस्कृति में सहज होता है.अब अगर उसे किसी काम की अभियक्ति करना हो तो वो अपनी भाषा में उसे आसानी से व्यक्त कर देगा. लेकिन अगर पहली में ही उस पर एक ऐसी भाषा अनिवार्य कर दी जाए जिससे वो परिचित नही है तो बच्चे की प्रतिभा दबी रह जाएगी.

छत्तीसगढ़ में स्कूल आने वाले बच्चों की पहली भाषा जब देखी गई तो यहां मुख्य रूप से 23 बोलियां सामने आई. जिनमें कुछ उप बोलियां यानी की मिलती जुलती हैं. इसलिए 16 भाषाओं का चयन किया गया और इन भाषाओं में द्विभाषीय पाठयक्रम लागू किया गया है- सुशील राठौड़, NEP, NCERT

इस बारे में राज्य एमएलई विशेषज्ञ संजय गुलाटी ने बताया कि इसका उद्देश्य ये है कि जो बच्चों के अपने घर की भाषा है. जो स्कूल की भाषा से अलग है.उस भाषा के माध्यम से बच्चों को स्कूल की भाषा तक आगे ले जाएं ताकि वो अपने जीवन में आगे की पढ़ाई या नौकरी जो भी वो करना चाहता है वो उस लायक बन सके.

उद्देश्य सिर्फ इतना है कि अपनी भाषा की मदद से वो हिन्दी और अंग्रेजी भाषा तक पहुंच सके.इसके पीछे जो सिद्धांत हैं वो राष्ट्रीय शिक्षा नीति का चल रहा है.शिक्षा नीति ये कहती हैं कि कक्षा पांचवी तक और अगर संभव हो सके तो कक्षा आठवीं तक शिक्षा का माध्यम जो है वो घर की भाषा होनी चाहिए- संजय गुलाटी, एमएलई विशेषज्ञ

संजय गुलाटी के मुताबिक इन्हीं सब बातों के तहत राज्य सरकार के ये निर्णय लिया गया है कि हमको बच्चों को उनकी भाषा में प्रारंभिक शिक्षा देना है. उनके जरिए उन्हें मानक भाषाओं तक लेकर जाना है.

16 भाषाओं पर पाठ्यक्रम तैयार : छत्तीसगढ़ एक ऐसा राज्य है जहां हिंदी भी बोली जाती है, लेकिन जन्म से बच्चा जो भाषा घर में या मां से सीखता है वो हिंदी नहीं होती है. छत्तीसगढ़ के बच्चे अलग अलग क्षेत्रों में बोली जाने वाली स्थानीय बोली ही पहले सीखते हैं. छत्तीसगढ़ में सबसे अधिक करीब 65 प्रतिशत हिस्से में छत्तीसगढ़िया बोली जाती है. इसके बाद दूसरे नंबर पर सरगुजिहा करीब 11 प्रतिशत लोग बोलते हैं. फिर हलबी, गोंडी, सादरी, ओडिया जैसी 23 स्थानीय बोलियां हैं. इनमें से जो सबसे अधिक प्रभावी हैं ऐसी 16 भाषाओं पर एससीईआरटी ने काम किया है और द्विभाषीय पाठ्यक्रम तैयार किया है.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button