March 3, 2026 6:45 am
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छत्तीसगढ़

अंबिकापुर को आई बैंक का इंतजार, निर्माण के लिए 3 साल पहले आ चुकी 25 लाख की राशि, फिर भी उदासीनता

सरगुजा: अंबिकापुर में मेडिकल कॉलेज और अस्पताल तो बन गया लेकिन अब भी यहां कई सुविधाओं का विकास नहीं हो पाया है. उदासीनता के चलते यहां राशि मिलने के बाद भी आज तक आई बैंक स्थापित नहीं हो पाया है. इसके चलते नेत्र दान करने और लेने वालों को समस्या हो रही है.

2022 में ही आ चुकी है राशि: जब भी यहां किसी का नेत्रदान होता है तो कार्निया को रखने की व्यवस्था नहीं है, जिस कारण कार्निया को कोल्ड चेन से बिलासपुर या रायपुर भेजना पड़ता है. जबकि वर्ष 2022 में ही आई बैंक निर्माण के लिए 25 लाख रुपए की राशि आ चुकी है लेकिन निर्माण अब तक नहीं कराया गया है.

नेत्रदान बहुत जरूरी है, इससे किसी के जीवन का अंधकार खत्म हो सकता है, लेकिन इसके लिए आई बैंक भी होना चाहिए, अभी नेत्रदान के लिये बिलासपुर जाना पड़ता है. जल्द ही सरगुजा में आई बैंक की सुविधा होनी चाहिए– ऑप्टिकल व्यवसायी चरन जीत

नेत्रदान के प्रति जागरूकता भी बहुत जरूरी है, आई बैंक भी बनना चाहिए, जिस तरह रक्तदान के लिये लोग जागरूक हैं उसी तरह अंगदान का महत्व के साथ डिटेल में जानकारी सबको पता होनी चाहिए और जब तक आई बैंक नही होगा तो लोग कहां नेत्र दान करेंगे– संजय सोनी, स्थानीय युवा

कॉर्निया को बाहर भेजना पड़ता है: नेत्रदान अंगदान अभियान चला रहे युवक रेड क्रॉस सोसायटी के सदस्य आयुष सिन्हा ने बताया कि सरगुजा में लोग नेत्रदान तो कर रहे हैं, लेकिन आई बैंक न होने के कारण कॉर्निया को बिलासपुर सिम्स भेजना पड़ता है. इससे समय और सुविधा दोनों में कठिनाई आती है. अंबिकापुर में आई बैंक की स्थापना अत्यंत आवश्यक है, ताकि सरगुजा संभाग के मरीजों को यहीं नेत्र प्रत्यारोपण की सुविधा मिल सके.

क्या है प्रबंधन का जवाब: मेडिकल कॉलेज अस्पताल के प्रभारी अस्पताल अधीक्षक डॉ. जे के रेलवानी ने बताया कि अम्बिकापुर में आई बैंक की स्थापना के लिये 2022 में 25 लाख की राशि CMHO कार्यालय को प्राप्त हुई थी. इसे अधिष्ठाता महोदय की ओर से CGMSC को दिया गया था, लेकिन आई बैंक बन नहीं सका है.

CMHO के माध्यम से फिर उन्हें अवगत कराएंगे और आई बैंक निर्माण जल्द बनाने के लिए लेटर भेजा जाएगा– डॉ. जेके रेलवानी, प्रभारी अस्पताल अधीक्षक

नेत्रदान करने के लिये अगर किसी व्यक्ति ने जिंदा रहते या मृत्यु उपरांत परिजनों ने सहमति दी तो उसकी आंख से कॉर्निया निकालकर ट्रांसप्लांट किया जाता है. लेकिन ये सीधे ट्रांसप्लांट नहीं किया जाता, पहले कॉर्निया को आई बैंक में सुरक्षित रखा जाता है और फिर जरूरत मंद व्यक्ति को ऑपरेशन की तैयारी के बाद कॉर्निया ट्रांसप्लांट की जाती है. इसमें सबसे महत्वपूर्ण काम आई बैंक का हो जाता है.

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