NHM के हड़ताली कर्मचारियों को अल्टीमेटम, ज्वाइनिंग नहीं देने पर होंगे बर्खास्त, नई भर्तियां भी होंगी शुरू

कोरबा: छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन(एनएचएम) कर्मचारी संघ के आह्वान पर जिले के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी 18 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं. लगभग 1 माह का समय बीत चुका है, स्वास्थ्य सुविधाओं का बुरा हाल है. एनएचएम कर्मचारियों के मांगों के संबंध में 13 सितम्बर को स्वास्थ्य विभाग की ओर से राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की कार्यकारिणी समिति की बैठक की गई थी. दावा है कि सकारात्मक रूप से मांगों का समाधान किया गया है. स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी सूचना के अनुसार कई मांगों को मान लिया गया है. इसके बाद 16 सितंबर की शाम तक कर्मचारियों को पदस्थापना स्थल पर ज्वाइन करने का अल्टीमेट जारी किया गया. ज्वाइनिंग नहीं देने वाले कर्मचारियों को एनएचएम की सेवा और शर्तों के अनुसार एक महीने का नोटिस थमाते हुए, सेवा समाप्ति की कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए गए हैं. वहीं जो स्थान रिक्त होगा उसपर नई भर्तियां भी शुरू करने की तैयारी की जाएगी.
NHM के हड़ताली कर्मचारियों को अल्टीमेटम: स्वास्थ्य विभाग की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार एनएचएम अधिकारी/कर्मचारियों को दुर्घटना अवकाश में प्रावधानित 30 दिन के अवैतनिक अवकाश को सवैतनिक अवकाश देने का निर्णय लिया गया है. इसी प्रकार वार्षिक कार्य मुल्यांकन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिकूल टिप्पणी की स्थिति में कार्य सुधार नोटिस/सेवा समाप्ति के पूर्व पर्याप्त अवसर दिए जाने का निर्णय हुआ है. माह जुलाई 2023 की स्थिति में संविदा कर्मचारियों को 5 प्रतिशत अतिरिक्त वेतन वृद्धि प्रदान करने संबंधी राज्य कार्यकारिणी समिति द्वारा सैद्धांतिक सहमति और वित्त विभाग छत्तीसगढ़ शासन से सहमति प्राप्ति हुई है. जिसके बाद वेतनवृद्धि प्रदान करने की कार्रवाई की जा रही है.
कर्मचारियों को मिलेंगी सुविधाएं: राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन अंतर्गत समस्त संविदा मानव संसाधन को स्वास्थ्य बीमा की सुविधा दिये जाने की प्रक्रिया प्रारंभ करने का निर्णय हुआ है. ग्रेड पे, अनुकम्पा नियुक्ति आदि जैसे मानव संसाधन से जुड़े अन्य विषयों के संबंध में 7 सदस्यीय राज्य स्तरीय समिति का गठन किया गया है. जो विभिन्न राज्यों के साथ ही छत्तीसगढ़ राज्य के विभिन्न विभागों में इस संबंध में प्रचलित प्रावधानों, पूर्व गठित समिति के प्रस्तावों, राज्य में पूर्व से प्रचलित नियमों का अध्ययन कर निश्चित समय सीमा में (गठन के तीन माह) के भीतर अपना प्रतिवेदन शासन को प्रस्तुत करेगी.





