सुकमा: बस्तर संभाग में नाबालिक युवतियों और महिलाओं के लापता होने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं. सुदूर आदिवासी इलाकों में नाबालिग लड़कियों और महिलाओं के लापता होने की बढ़ती घटनाओं पर राज्य महिला आयोग की सदस्य ने चिंता जताई हैं. सदस्य दीपिका शोरी का कहना है कि यह केवल संयोग नहीं, बल्कि सुनियोजित साजिश भी हो सकती है. साथ ही चेतावनी दी कि नाबालिग लड़कियां सोशल मीडिया के जरिए सबसे अधिक निशाना बन रही हैं.
अजनबियों के झांसे में आ रहीं नाबालिग: दीपिका शोरी का कहना है कि, फेसबुक, इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म के माध्यम से अजनबी युवक पहले दोस्ती करते हैं और फिर उन्हें प्रेम और शादी के झांसे में लेते हैं. इससे नाबालिग लड़कियां घर छोड़ने के लिए मजबूर हो जाती हैं.
सुकमा ज़िले में नाबालिग युवतियों की गुमशुदगी के आंकड़े (2021–2025)
वर्ष
लापता नाबालिग
बरामद
अभी भी लापता
2021
15
15
0
2022
19
19
0
2023
21
21
0
2024
17
17
0
2025
12
10
2
कुल
84
82
2
नोट- जबकि 2021 से 2024 तक सभी नाबालिग को पुलिस ने ढूंढ निकाला, वहीं पुलिस की मुस्तैदी से 2025 में भी 10 नाबालिग को ढूंढा गया है. हालांकि दो अभी भी लापता है.
दूसरे जिलों का भी हाल ऐसा ही: दंतेवाड़ा में भी 35 और बीजापुर में 5 महिलाएं लापता हैं जो अभी नहीं मिली हैं. इन आंकड़ों से साफ है कि बस्तर की आदिवासी महिलाएं सबसे ज्यादा प्रभावित हो रही हैं.
देह व्यापार जैसे गंभीर अपराध की आशंका: दीपिका शोरी ने एक गंभीर सामाजिक संकट की ओर इशारा किया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि नाबालिग और बालिग लड़कियों के भी लापता होने की घटना कोई सामान्य घटना या संयोग नहीं, बल्कि एक संभावित सुनियोजित मानव तस्करी का नेटवर्क हो सकता है. चंगुल में फंसने के बाद आगे उनका उपयोग मानव तस्करी, जबरन विवाह या देह व्यापार के लिए भी किया जा सकता है.
मेरी अपील है कि, मां-बाप इस तरह से बच्चियों को पालें और समझाएं कि वो सिर्फ माता-पिता की ही बात मानें, ना कि अजनबियों के झांसे में आएं. जब बेटियां घर से निकल जाती हैं तो वे अपराधियों के जाल में फंस सकती हैं.- दीपिका शोरी, राज्य महिला आयोग की सदस्य
सुकमा ज़िले में युवतियों और महिलाओं की गुमशुदगी के आंकड़े (2021–2025)
वर्ष
लापता महिलाएं
बरामद
अभी भी लापता
2021
24
23
1
2022
23
21
2
2023
29
25
4
2024
35
33
2
2025
21
18
3
कुल
132
120
12
कई केस सुलझे, कुछ अभी भी लापता: सुकमा जिले में कई लापता केस को पुलिस ने सुलझाया भी है. फिर भी 14 लड़कियां सिर्फ सुकमा जिले की अभी भी लापता हैं. 2021 से लेकर 2025 तक हर साल औसतन 15-20 नाबालिग लड़कियां लापता हुई हैं. हालांकि पुलिस ने अधिकतर को खोज निकाला है, अभी भी 2025 में 2 नाबालिग और 12 महिलाएं लापता हैं, जो चिंता का विषय है.
डिजिटल जागरूकता भी जरूरी: समाज, परिवार, स्कूल, पंचायतें और प्रशासन सभी को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी बेटी सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से बहकावे में न आएं. अभिभावकों को चाहिए कि वे अपने बच्चों पर सतत नजर रखें, संवाद बनाए रखें और उन्हें डिजिटल जागरूकता दें.
सुकमा के अलावा दंतेवाड़ा और बीजापुर जैसे जिलों में भी महिलाओं के लापता होने के मामले सामने आए हैं, जो बस्तर की आदिवासी महिलाओं की असुरक्षा को उजागर करता है.