मौत का इंजेक्शन लगाने वाला फर्जी डॉक्टर अरेस्ट, युवक की हुई थी दर्दनाक मौत

बालोद : बालोद में फर्जी डॉक्टर के गलत इलाज के कारण युवक की जान चली गई. युवक की मौत का कारण सामने आने के बाद अर्जुंदा पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार करके न्यायिक रिमांड पर जेल दाखिल कराया है.आरोपी का नाम रेखराम साहू है. जो बिना किसी डिग्री के अवैध रुप से क्लिनिक चला रहा था.इसी क्लिनिक में सुभाष जनबंधु इलाज के लिए पहुंचा था.लेकिन उसे नहीं पता था कि इलाज के नाम पर वो अपनी जान का सौदा कर रहा है.
परिवार का आरोप इंजेक्शन से हुई मौत : पुलिस के मुताबिक इस पूरे मामले में मृतक के पिता ने डॉक्टर पर गलत इंजेक्शन लगाने का आरोप लगाया है.जिसके कारण उनके बेटे की तबीयत बिगड़ी और आखिरकार उसकी मौत हो गई. मृतक के पिता आनंदराव जनबंधु ने बताया कि उनका बेटा सुभाष जनबंधु लंबे समय से पाइल्स की बीमारी से जूझ रहा था. परिवार के लोग सुभाष को लेकर 8 मई 2025 को अर्जुंदा के क्लिनिक में पहुंचे.जहां कथित डॉक्टर रेखराम साहू ने पाइल्स के इलाज के नाम पर 8 हजार रुपए लिए और पाइल्स पर एक के बाद एक नौ इंजेक्शन लगा दिए.
इंजेक्शन लगाने के बाद बिगड़ी तबीयत : एसपी योगेश कुमार पटेल ने बताया कि अगले दिन 9 मई को सुभाष की तबीयत बिगड़ने लगी.इजेक्शन लगाने वाली जगह से लगातार खून बहने लगा.साथ ही साथ सुभाष का पेट फूल गया.जब सुभाष की तबीयत ज्यादा खराब हुई तो परिवार ने रेखराम साहू को इसकी जानकारी दी.लेकिन मरीज की कंडीशन सुनने के बाद रेखराम ने इलाज के बजाय अपना फोन ही बंद कर लिया.जब सुभाष की हालत और भी ज्यादा खराब हुई तो परिवार के लोगों ने उसे भिलाई के शंकराचार्य हॉस्पिटल में भर्ती कराया.
शंकराचार्य हॉस्पिटल में शुरुआती चेकअप में पता चला कि रेखराम साहू के गलत इलाज के कारण सुभाष की कंडीशन क्रिटिकल हो गई है. तीन दिन सुभाष का इलाज किया गया.लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी.मौत के बाद परिवार ने थाने में शिकायत दर्ज कराई. मामले की जांच एसडीओपी गुंडरदेही ने की.जांच में खुलासा हुआ कि रेखराम साहू की चिकित्सकीय डिग्री फर्जी है. छत्तीसगढ़ में उसका पंजीयन भी नहीं है. साथ ही उसने इलाज के दौरान गंभीर लापरवाही बरती, जिससे मौत हुई- योगेश कुमार पटेल, एसपी
अर्जुंदा पुलिस ने युवक की मौत के बाद आरोपी रेखराम साहू के खिलाफ इलाज में लापरवाही बरतने, फर्जी कागजों के सहारे प्रैक्टिस करने समेत छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान परिषद अधिनियम 1987 की धारा 24 के तहत कार्रवाई की.इसके बाद आरोपी को जेल भेजा गया है.





