नवरात्रि 2025 : किन्नर समाज ने निभाई पुरातन परंपरा, मां दंतेश्वरी की पहली पूजा के बाद चढ़ाई चुनरी

जगदलपुर : बस्तर में शारदीय नवरात्रि का पर्व श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है. सोमवार सुबह से ही देवी मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ी रही है. वहीं बीती रात दंतेश्वरी मंदिर में एक खास परंपरा निभाई गई. जिसमें किन्नरों ने मां दंतेश्वरी की सबसे पहले पूजा करने के बाद चुनरी अर्पित की.
सुबह चार बजे दर्शन और फिर अर्पित की चुनरी : आपको बता दें कि नवरात्रि के पहले दिन दंतेश्वरी देवी के दरबार में सबसे पहले पूजा और चुनरी अर्पित करने का अधिकार किन्नर समाज को मिलता है. इस परंपरा के तहत रविवार-सोमवार की दरमियानी रात किन्नर समाज ने भव्य श्रृंगार यात्रा निकाली. बग्गियों में सवार सजे-धजे किन्नर देवी भजनों पर थिरकते हुए मंदिर पहुंचे. सुबह करीब 4 बजे जैसे ही दंतेश्वरी देवी का दरबार खुला वैसे ही किन्नर समाज ने पहला दर्शन किया और दंतेश्वरी देवी को चुनरी और श्रृंगार अर्पित किया.
किन्नर समाज की अध्यक्ष रिया सिंह परिहार ने बताया कि हर साल बस्तर के साथ-साथ पड़ोसी राज्य ओडिशा से भी किन्नर इस परंपरा में शामिल होते हैं. उन्होंने कहा कि दंतेश्वरी देवी के प्रति किन्नरों की गहरी आस्था है.
किन्नर समाज की पूर्वज रानी फूलमती राजघराने में रहती थी. जिसके बाद किन्नर समाज की गुरु बसंती ने चुनरी की परमपरा शुरू की थी. और अब किन्नर समाज पिछले 17 सालों से इस परंपरा को निभाते आ रही है. और इस पूजा का उद्देश्य बस्तरवासियों की खुशहाली, समृद्धि और सुख-शांति की प्रार्थना करना होता है – रिया सिंह परिहार, अध्यक्ष किन्नर समाज
किन्नर समाज को ही मिला सौभाग्य : मान्यता है कि नवरात्रि की शुरुआत में दंतेश्वरी देवी का पहला दर्शन और पहली चुनरी चढ़ाने का सौभाग्य केवल किन्नर समाज को ही प्राप्त होता है. यही परंपरा बस्तर की अनोखी पहचान है.
निसंतानों के लिए किन्नर रखते हैं उपवास : किन्नर समाज की गुरु मां ने इस मौके पर कहा कि किन्नर समाज दंतेश्वरी देवी को चुनरी चढ़ाने आया है. जिसको स्वीकार किया गया. इसके साथ यह भी प्रार्थना की है कि सभी बस्तरवासियों की मनोकामना पूरी हो और जगदलपुर का नाम रौशन हो.जो बिना वंश के हैं, उनके लिए किन्नर समाज निर्जला उपवास करके उनके गोदभराई के लिए प्रार्थना करती है.





