March 6, 2026 2:44 pm
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रायपुर जेल में कैदियों ने बनाई गणपति मूर्तियां, जमकर हो रही बिक्री, संवर रही बंदियों की जिंदगी

रायपुर: गणपति उत्सव हर किसी के जीवन में खुशियां लाए. ऐसा हर कोई चाहता है. इस बार रायपुर जेल प्रशासन ने भी यहां रह रहे कैदियों के जीवन में खुशियां भरने का काम किया है. रायपुर केंद्रीय जेल में जेल प्रबंधन ने कैदियों को मूर्तियां बनाने में मदद की. उन्हें प्रोत्साहित किया. जिससे यहां सजा काट रहे कैदियों ने भगवान गणपति की मूर्तियां बनाई. ये मूर्तियां अब लोग खरीद रहे हैं. इससे होने वाली आय को कैदियों के लिए जेल प्रबंधन ने संभाल कर रखा है. जो उन्हें दिया जाएगा.

कैद से कारीगरी तक की अनोखी यात्रा: रायपुर सेंट्रल जेल में सजा काट रहे कैदियों की बनाई मूर्तियां यहां जेल शॉपिंग मॉल में बिक रही हैं. यह लोगों के आकर्षण का भी केंद्र बन चुकी है. इससे न सिर्फ कैदियों को आय का जरिया मिला है. इससे कैदियों को सुधार और आत्मनिर्भरता की राह मिल रही है. जो हाथ कभी गलत राह पर चल पड़े थे, वही हाथ आज श्रद्धा और कला से भरी प्रतिमाओं को आकार दे रहे हैं. जेल शॉपिंग मॉल की प्रभारी मोनिका ने इस बारे में और जानकारी दी. उन्होंने बताया कि कैदियों की बनाई मूर्तियां बिक रही है.

इस बार करीब 150 गणेश प्रतिमाएं बंदियों ने बनाई थीं. कीमत इतनी सहज रखी गई है कि हर कोई इन्हें घर ले जा सके, 51 रुपए से लेकर 301 रुपए तक. आज हालत यह है कि अधिकांश मूर्तियां बिक चुकी हैं और अब केवल गिनी-चुनी प्रतिमाएं ही बची है- मोनिका,जेल एंपोरियम प्रभारी, केन्द्रीय जेल रायपुर

रायपुर जेल प्रबंधन की कोशिशों को मिल रही सराहना: जेल शॉपिंग मॉल में इन प्रतिमाओं को खरीदने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ रही है. आकर्षक रंगों और बेहतरीन कारीगरी से बनी ये प्रतिमाएं देखकर लोग न केवल प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि बंदियों के इस प्रयास की सराहना भी कर रहे हैं.

त्योहार में सुधार का संदेश: गणेशोत्सव के मौके पर यह पहल समाज को एक अनूठा संदेश देती है. गणपति बप्पा सिर्फ विघ्नहर्ता ही नहीं, बल्कि परिवर्तन और नई शुरुआत के देवता भी हैं. इन मूर्तियों को खरीदकर लोग एक तरह से सुधारात्मक प्रयासों और पुनर्वास की यात्रा को भी समर्थन दे रहे हैं.

रायपुर केंद्रीय जेल का यह प्रयास सिर्फ एक पहल नहीं, बल्कि एक प्रेरणा भी है. जीवन में गलती करने वाले इंसान भी सही अवसर और सही दिशा पाकर अपनी पहचान बदल सकते हैं और समाज की मुख्यधारा में शामिल हो सकते हैं.

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