भू विस्थापितों की समस्या का करना होगा निराकरण, नहीं तो 35 विधायकों के साथ हरदीबाजार में देंगे धरना : भूपेश

कोरबा: छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और कद्दावर कांग्रेसी नेता भूपेश बघेल शुक्रवार को जिले के कोयलांचल क्षेत्र हरदीबाजार पहुंचे. यहां उन्होंने भू विस्थापित संगठन से मुलाकात की और उनकी समस्याओं से रूबरू हुए. भूपेश बघेल ने मंच से कहा कि भू विस्थापितों ने सार्वजनिक उपक्रम को अपनी जमीन दी है. जो वादा यहां के कलेक्टर और प्रशासन ने उनसे किया था. वह हर हाल में पूरा करना होगा.
बघेल ने भाषण की शुरुआत में यह भी कहा कि यहां के सरपंच और भू विस्थापित मुझसे मिलने आए थे और कहा कि हमारी समस्या बहुत गंभीर है. मैंने उनसे वादा किया था कि आज आऊंगा. मेरी तबीयत ठीक नहीं है, सर्दी खांसी एक नहीं तो दो दिन में ठीक हो जाएगी. लेकिन एसईसीएल ने जो दर्द यहां के भू विस्थापितों को दिया है. वह बेहद गंभीर है, जो उजड़ने का दर्द यहां के लोग झेल रहे हैं. उसकी पीड़ा बहुत अधिक है.
2025 के नियमों के हिसाब से देना होगा मुआवजा : भूपेश बघेल कहा कि भू विस्थापितों की जमीनों का अधिग्रहण तो अभी किया गया है. लेकिन मुआवजा 2004 के हिसाब से देना चाहते हैं.
बघेल ने कहा “मैं ऐसे लोगों को यह कहना चाहूंगा कि आप भी 2025 के हिसाब से तनख्वाह मत लीजिए, 2004 के हिसाब से अपनी तनख्वाह लीजिए. जब किसान को 2004 के हिसाब से मुआवजा दे रहे हो. तो आप भी 2004 के हिसाब से ही तनख्वाह लो. एक तरफा बात तो हो नहीं सकती. दूसरी बात यह है कि ये राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि राज्य के निवासियों, किसान, मजदूर, नौजवान,महिलाओं की रक्षा करें. एसईसीएल हमारे जमीन को अधिग्रहित करने वाला कौन होता है. हरदीबाजार में घुसकर मनमानी करने वाले यह कौन होते हैं. कलेक्टर, एसडीएम, तहसीलदार, आरआई, पटवारी इन्हें देखना चाहिए. जब तक राज्य सरकार अनुमति नहीं देगी. तब तक कोई दूसरा डिपार्मेंट किसी क्षेत्र में घुस नहीं सकता.”
भारत सरकार के कानून आपस में विरोधाभासी : भूपेश ने लोगों को संबोधित करते हुए आगे कहा “पेसा कानून यहां लागू है. यह क्षेत्र पांचवी अनुसूची में शामिल है. ग्राम सभा के बिना यहां कोई काम नहीं हो सकता. तो इसकी दूसरी तरफ कोल बेरिंग एक्ट है और इन दोनों एक्ट में झगड़ा चल रहा है. कोयला वाला डिपार्टमेंट कहता है, हम कोल बेरिंग एक्ट को मानेंगे. दोनों भारत सरकार के नियम हैं. भूमि अधिग्रहण नियम अलग है. वह भी भारत सरकार ने ही बनाया है.
लेकिन कंपनी अपना फायदा देखती हैं. हम अपनी गुंजाइश को देख रहे हैं. 2004 में जमीन की जो कीमत थी, आज के समय में वह कौड़ी की कीमत है. मिट्टी की कीमत भी नहीं कहा जा सकता. इसलिए इस समय कौड़ी की कीमत कहूंगा.”
डरना नहीं लड़ना चाहिए : मीडिया से चर्चा के दौरान भूपेश ने कहा कि 42 गांव की जमीन को एसईसीएल अधिग्रहण करना चाहती है. लोग जमीन देना भी चाहते हैं, लेकिन जमीन का रेट 2004 के हिसाब से मिल रहा है. जमीन की कीमत आज के अनुसार ठीक तरह से मिलनी चाहिए. व्यवस्थापन भी सही तरीके से होना चाहिए. सत्ता में रहते मैंने तब भी कहा था कि मुआवजा और नौकरी के बिना जमीन नहीं मिलेग. तब से वह रुका हुआ था. आज यहां जबरदस्ती की जा रही है. अभी और भी बहुत सारे ऐसे काम होंगे. महतारी वंदन योजना में भी नाम काटे जाएंगे. बिजली बिल दुगना आना शुरू हो गया है.” विपक्ष पर कार्यवाही के प्रश्न पर पूर्व सीएम ने कहा “इन्होंने मेरे बेटे को भी जेल में डाल दिया है. आज 3 महीने हो गए, मैं भी इनसे डरा नहीं रहा हूं.” अंत में भूपेश बघेल ने कहा यदि ग्रामीणों की समस्याओं का निराकरण नहीं होता है तो प्रदेश कांग्रेस कमेटी से बात करेंगे और छत्तीसगढ़ के सभी 35 कांग्रेसी विधायकों के साथ हरदीबाजार में ही धरना देंगे.





