February 11, 2026 11:53 am
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1 लाख गांवों ने अपनाया विजन, 20 लाख लोगों को ट्रेनिंग… आदि सेवा पर्व में जनजातीय कार्य मंत्रालय ने हासिल की ये उपलब्धि

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनजातीय समुदायों के विकास के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है. पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार ने 15 नवंबर 2024 से 15 नवंबर 2025 तक जनजातीय गौरव वर्ष घोषित किया है. इस खास अवसर पर जनजातीय कार्य मंत्रालय ने ‘आदि कर्मयोगी अभियान’ का शुभारंभ किया. इस अभियान के तहत जनजातीय समुदाय सशक्त होगा और अगले 10 साल तक अपने गांव के विकास की दिशा खुद तय करेगा.

यह अभियान दुनिया का सबसे बड़ा जनजातीय नेतृत्व अभियान है. इस अभियान में लगभग 30 राज्यों के 1 लाख गांवों और टोलों में 11.5 करोड़ से अधिक जनजातीय नागरिक शामिल होंगे. इस पहल का औपचारिक उद्घाटन 17 सितंबर को मध्यप्रदेश के धार में पीएम मोदी के द्वारा किया गया.

10 साल तक खुद ही लेगा निर्णय

‘ट्राइबल विलेज विजन 2030’ के तहत हर जनजातीय समुदाय अगले 10 साल तक अपनी विकास की दिशाएं खुद तय करेगा, जो विकसित भारत 2027 के अनुरूप होगी. इस पहल के तहत, एक लाख ‘ग्राम विजन’ और ‘आदि सेवा केंद्र’ बनाए जाएंगे. इस केंद्र में प्रत्येक नागरिक हर एक सप्ताह में एक घंटे की सेवा देगा.

खुद ही तय किए लक्ष्य

इस पहल की खास बात यह है कि इसमें गांव के लोगों ने हिस्सा लिया और बैठकें और सर्वे के जरिए अपने लक्ष्य तय किए, जिसमें उन्होंने हर गांव में आदि सेवा केंद्र के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं पर भी ध्यान दिया. आदि सेवा केंद्र में हर ग्रामीण हर एक सप्ताह 1 घंटे अपनी इच्छा से सेवा देगा. इसके अलावा एक एआई-संचालित आदि वाणी ऐप बनाया गया है, जिसके जरिए ग्रामीण लोग सरकारी अधिकारियों से अपनी स्थानीय भाषा में बात कर सकेंगे.

20 लाख लोगों को दी जा चुकी है ट्रेनिंग

10 जुलाई से अब तक लगभग 20 लाख अधिकारियों, SHG की महिलाओं और आदिवासी युवाओं को आदि कर्मयोगी के रूप में 7 दिन की ट्रेनिंग दी गई है. इस अभियान के तहत 1 लाख गांवों ने ट्राइबल विलेज विजन 2030 को अपनाया. सरकार के इस अभियान के तहत आदिवासी नागरिक सशक्त हुए हैं और अपने निर्णय खुद लेने में सक्षम हुए हैं.

जनता के फैसले, जनता के लिए

केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री जुएल ओराम ने कहा कि जनजातीय ग्राम विजन 2030 को अपनाना भारत के जनजातीय समुदायों के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है. यह पहल हर एक गांव को अपना विकास रोडमैप तैयार करने का अधिकार देती है, और यह तय करती है कि गांव के सारे फैसले जनता द्वारा, जनता के लिए लिए जाएं. उन्होंने कहा कि यह स्थानीय शासन को मजबूत करेगा है, और लोगों भागीदारी की भागीदारी बढ़ाएगा.

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