February 13, 2026 3:13 am
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Dhurwa Dam Encroachment: धुर्वा डैम अतिक्रमण मामले की अब ACB करेगी जांच, भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने केस किया टेकओवर

रांची: राजधानी रांची के धुर्वा डैम के कैचमेंट एरिया में अतिक्रमण की जांच अब एसीबी (भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो) करेगी. इस मामले में रांची के नगड़ी थाने में दर्ज एफआईआर को मंगलवार को एसीबी ने टेकओवर कर लिया है. एसीबी अधिकारियों ने केस को टेकओवर करने की पुष्टि की है.

धुर्वा डैम के कैचमेंट एरिया में बड़े पैमाने पर हुए अतिक्रमण मामले की जांच एसीबी ने शुरू कर दी है. रांची के नगड़ी थाने में दर्ज मामले को मंगलवार को टेकओवर करते हुए एसीबी ने इसकी जांच शरू कर दी है.एसीबी अधिकारियों के अनुसार मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच एसीबी से करवाई जा रही है.

हाईकोर्ट ने दिया था जांच का आदेश

गौरतलब है कि झारखंड हाईकोर्ट में अपने आदेश में जमीन को अवैध तरीके से ट्रांसफर करने, इसकी जमाबंदी करने और लगान रसीद जारी करने में शामिल पदाधिकारियों को चिन्हित करने का आदेश दिया था. हाईकोर्ट ने ऐसे लोगों को चिन्हित कर उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित करने का आदेश दिया था. जिसके बाद रांची पुलिस के द्वारा मामले के जांच के लिए रांची के नगड़ी थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी.

कोर्ट में दायर की गई थी याचिका

अब इस मामले को एंटी करप्शन ब्यूरो ने टेकओवर कर लिया है. इससे पहले धुर्वा डैम के कैचमेंट एरिया में अवैध तरीके से जमीन खरीदने को लेकर याचिका दी गई थी. जिसमें कोर्ट को याचिकाकर्ता ने बताया था कि जमीन पर घर भी बनाया गया है. दूसरी ओर जमीन पर अतिक्रमण हटाने के लिए नगड़ी सीओ द्वारा नोटिस जारी किया गया था. जिसके बाद कोर्ट ने संबंधित पक्ष को दस्तावेजों के साथ नगड़ी सीओ के पास उपस्थित होने को कहा था.

मामले में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया था कि संबंधित जमीन धुर्वा डैम के कैचमेंट एरिया के अधीन है. जिसका अधिग्रहण पूर्व में सरकार कर चुकी है. उक्त जमीन की बिक्री नहीं की जा सकती है.

कैसे हुई अधिग्रहित जमीन की खरीद-बिक्री

धुर्वा डैम के कैचमेंट एरिया में बड़े-बड़े निर्माण किए गए हैं. सभी निर्माण कागजातों के हिसाब से जायज हैं. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर कैसे सरकार के द्वारा अधिग्रहित जमीन की खरीद-बिक्री की गई. उसके बाद उक्त जमीन पर नक्शा पास भी हुआ और बाकायदा सभी कागजात भी बने. अगर मामले की गहराई से जांच हुई तो इसमें कई सीओ और दूसरे विभागों के कर्मचारी भी नप सकते हैं.

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