
बालोद: मुख्यमंत्री के बालोद जिले के दौरे के दौरान हंगामे की स्थिति बन गई. बाबा बालक दास के बुलावे पर मुख्यमंत्री का कार्यक्रम था. इस बीच सर्व आदिवासी समाज ने बाबा बालक दास पर जमीन कब्जे का आरोप लगाया. सैकड़ों लोग CM के आयोजन स्थल से करीब 5 किलोमीटर पहले सड़क पर धरने पर बैठ गए और नारेबाजी करने लगे.
समाज का क्या कहना है: आदिवासी समाज का कहना है कि उनका विरोध मुख्यमंत्री से नहीं बल्कि बाबा बालक दास से है. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि बाबा बालक दास के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध होने के बावजूद प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की है. साथ ही उन्होंने शासकीय भूमि पर कब्जा कर प्राकृतिक संसाधनों का दोहन किया है.
क्या है पुराना मामला: गोंडवाना समाज के जिलाध्यक्ष प्रेमलाल कुंजाम ने कहा कि बाबा बालक दास द्वारा उस क्षेत्र में जंगल की जमीन पर कब्जा कर लिया गया है. करीब 1 करोड़ 20 लाख रुपए की लागत से अवैध निर्माण कार्य भी किया जा रहा है. उन्होंने मांग की कि बाबा बालक दास को वहां से हटाया जाए क्योंकि वह स्थान आदिवासी समाज का देव स्थल है. यह विवाद वर्ष 2017 से जारी है और कई बार शासन-प्रशासन के समक्ष यह मुद्दा उठाया जा चुका है.
सतर्क रही प्रशासन: मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को लेकर प्रशासन ने भारी सुरक्षा व्यवस्था तैनात की थी. हालांकि, आदिवासी समाज के धरने के बाद प्रशासनिक अफसर मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों से चर्चा की कोशिश की. प्रदर्शन के कारण कार्यक्रम स्थल तक मुख्यमंत्री के काफिले को कुछ देर के लिए रोकना भी पड़ा.
समाज ने सरकार से मांग की है कि इस विवाद को जल्द सुलझाया जाए और देव स्थल वापस आदिवासियों को सौंपा जाए ताकि वहां की शांतिप्रिय परंपरा और जल-जंगल-जमीन की रक्षा हो सके.





