छत्तीसगढ़ शराब घोटाला, चैतन्य बघेल को 13 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत

रायपुर: शराब घोटाले में पूर्व सीएम भूपेश बघेल के बेटे बीते तीन महीने से जेल में बंद हैं. 18 जुलाई को हुई गिरफ्तारी के बाद से उनकी न्यायिक हिरासत की अवधि बढ़ती जा रही है. सोमवार 6 अक्टूबर को चैतन्य बघेल को कोर्ट में पेश किया गया. अदालत ने चैतन्य बघेल को 13 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है.
चैतन्य बघेल ने जमानत के लिए लगाई थी अर्जी: सोमवार 6 अक्टूबर को चैतन्य बघेल के जमानत के लिए आवेदन लगाई थी. इस पर सुनवाई और बहस 8 अक्टूबर को होगी. 24 सितंबर को चैतन्य बघेल को कोर्ट में पेश किया गया था. जिसके बाद ईओडब्ल्यू ने कोर्ट से रिमांड की मांग की थी जिसे कोर्ट ने मंजूर करते हुए 6 अक्टूबर तक रिमांड दे दी थी. आज रिमांड की अवधि पूरी होने के बाद फिर से कोर्ट में पेश हुए थे.
चैतन्य बघेल के वकील ने क्या कहा ?: चैतन्य बघेल की न्यायिक हिरासत बढ़ाए जाने के बाद उनके वकील फैजल रिजवी ने मीडिया को अहम जानकारी दी. उन्होंने बताया कि 24 सितंबर को ईओडब्ल्यू ने रिमांड की मांग की थी. जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया था और 6 अक्टूबर तक रिमांड मंजूर की थी.
सोमवार को कोर्ट में चैतन्य बघेल को पेश किया गया. कोर्ट ने 13 अक्टूबर तक के लिए न्यायिक रिमांड पर चैतन्य बघेल को जेल भेज दिया है. आज चैतन्य बघेल की जमानत के लिए आवेदन लगाया गया है. कोर्ट में बहस और सुनवाई 8 अक्टूबर को होगी- फैजल रिजवी, चैतन्य बघेल के वकील
चैतन्य बघेल पर ईडी के आरोप: ईडी ने चैतन्य बघेल पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं. ईडी के मुताबिक चैतन्य बघेल ने 16 करोड़ 70 लाख रुपए की अवैध कमाई को अपने रियल एस्टेट प्रोजेक्ट में इन्वेस्ट किया. उन्होंने यह पैसा नगद में ठेकेदारों को भुगतान किया. इसके अलावा फर्जी बैंक एंट्री और फ्लैट खरीदी के बहाने से उपयोग किया. वह त्रिलोक सिंह ढिल्लों के साथ मिलकर विट्ठलपुरम नामक परियोजना में फर्जी फ्लैट खरीद की योजना बनाकर 5 करोड़ रुपए प्राप्त करने के आरोप में भी घिरे हैं.
इन फ्लैटों को त्रिलोक सिंह ढिल्लों के कर्मचारियों के नाम पर खरीदा गया था, लेकिन असली लाभार्थी चैतन्य ही थे. जांच में यह भी पाया गया कि चैतन्य ने इस घोटाले से जुड़े 1000 करोड़ रुपए से अधिक की अवैध धनराशि को हैंडल किया और इसे अनवर ढेबर और अन्य के माध्यम से छत्तीसगढ़ कांग्रेस के तत्कालीन कोषाध्यक्ष तक पहुंचाया. यह राशि बघेल परिवार के गरीबी लोगों द्वारा आगे इन्वेस्ट के लिए प्रयोग की गई.
छत्तीसगढ़ ईओडब्ल्यू और एसीबी ने भी दर्ज किया केस: प्रवर्तन निदेशालय की जांच में एसीबी ईओडब्ल्यू रायपुर के द्वारा प्राथमिकी दर्ज की गई थी. इसके आधार पर आईपीसी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था. पुलिस और प्रवर्तन निदेशालय की जांच में यह बात सामने आई कि साल 2019 से साल 2020 के बीच हुए शराब घोटाले से राज्य सरकार को भारी वित्तीय नुकसान हुआ. कथित शराब घोटाले से करीब 2500 करोड रुपए की अवैध आय अर्जित की गई.





