स्वास्थ्य केंद्र समेत धान उपार्जन केंद्र की मांग,गांव में परेशानियों का अंबार, ग्रामीणों की कलेक्टर से गुहार

धमतरी : आजादी के 78 साल बाद भी धमतरी जिले के दूरस्थ अंचलों में सरकार की योजनाओं का हाल बेहाल है. दूर के इलाकों में जो तस्वीर दिखती है वो ये बताने के लिए काफी है कि सरकार की योजनाओं का कितना असर यहां तक हुआ है. ताजा मामला नगरी ब्लॉक के ग्राम कोंगेरा का है. जहां स्वास्थ्य केंद्र जर्जर है जिसके कारण स्वास्थ्य सेवाएं किराये के भवन से दी जा रही है.वहीं धान उपार्जन के लिए किसानों को आठ किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है. ग्रामीण इस समस्या को लेकर एक बार फिर प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं.
किराये के भवन में स्वास्थ्य केंद्र : धमतरी जिले का ग्राम कोंगेरा इन दिनों अपनी समस्याओं को लेकर चर्चा में हैं. गाव में उप स्वास्थ्य केंद्र भवन जर्जर से अति-जर्जर हो चुका है. हालात इतने खराब हैं कि अब स्वास्थ्य केंद्र को किराए के मकान में चलाया जा रहा है. आसपास के कई गांवों के लिए यही एकमात्र स्वास्थ्य सुविधा केंद्र है, जिससे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है. लेकिन जर्जर भवन और सीमित संसाधनों के कारण मरीजों को अपेक्षित सुविधा नहीं मिल पा रही. ग्रामीणों का कहना है कि इलाज कराने आने वाले मरीज कई बार ठीक होने के बदले और भी ज्यादा बीमार हो जाते हैं. फिर उन्हें मजबूरी में जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है.
आठ किलोमीटर दूर धान उपार्जन केंद्र: गांव के किसान भी परेशान हैं. धान बेचने के लिए उन्हें आठ किलोमीटर दूर उपार्जन केंद्र तक जाना पड़ता है. ग्रामीणों का कहना है कि उनके गांव का धान उपार्जन केंद्र पिछले कई सालों से बंद है. ऐसे में किसानों को समय और पैसे दोनों का नुकसान झेलना पड़ रहा है. किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि उनके गांव में ही उपार्जन केंद्र खोला जाए ताकि उन्हें राहत मिल सके. ग्रामीणों की मांगों को अब जिम्मेदार जल्द ही पूरा करने की बात कर रहे हैं.
जहां तक धान उपार्जन केंद्र की मांग है तो उसके लिए कृषि विभाग की ओर से आवेदन भेजा जाएगा.जहां तक उप स्वास्थ्य केंद्र की मांग है तो जो भवन जर्जर है उसका इस्टिमेट बनाकर स्वास्थ्य विभाग की टीम को भेजा जाएगा.ताकि ग्रामीणों को किसी भी तरह की असुविधा ना हो- रीता यादव, अपर कलेक्टर
सवाल यह है कि आजादी के 78 साल बाद भी अगर गांवों की यही स्थिति रही तो सरकार की योजनाओं का लाभ आमजन तक कब पहुंचेगा? स्वास्थ्य सेवा और किसान सुविधा के सरकारी दावे कागजों में भले मजबूत दिखें, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है.





