February 23, 2026 6:43 pm
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मध्यप्रदेश

मध्य प्रदेश में अकाउंट से रकम हो रही फुर्र, SIR के नाम पर लोगों से धोखाधड़ी

भोपाल: साइबर ठगी करने वाले जालसाज ऑनलाइन ठगी के नाम पर लगातार नए-नए तरीके आजमा रहे हैं. मध्य प्रदेश सहित 12 राज्यों में चल रही एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के नाम पर भी लोगों को अपना निशाना बना रहे हैं. एसआईआर में नाम शामिल करने और मतदाता सूची में मतदाता के नाम का वेरिफिकेशन के नाम लिंक भेजकर लोगों के साथ जालसाजी की जा रही है. धोखाधड़ी की शिकायतें सामने आने के बाद अब साइबर सेल ने लोगों को धोखाधड़ी से बचने के लिए आगाह किया है.

इस तरह की जा रही धोखाधड़ी

एसआईआर के नाम पर धोखाधड़ी की कई शिकायतें साइबर सेल में पहुंची है. ऐसी ही धोखाधड़ी के शिकार हुए कोलार निवासी विनोद अहिरवार ने बताया कि “पिछले दिनों बीएलओ द्वारा एसआईआर के लिए फॉर्म दिया गया था. इस फॉर्म में 2003 की मतदाता सूची की कुछ जानकारी भरनी थी. इसी बीच एक जालसाज का फोन आया और उसने बताया कि आपको एक लिंक भेजी जा रही है. इसमें फॉर्म को भरते ही सभी जरूरी जानकारी मिल जाएगी.

जैसे ही मैंने यह एसआईआर एपीके फाइल को इंस्टॉल किया. उसके बाद मेरा मोबाइल हैक हो गया, लेकिन गनीमत यह रही कि मोबाइल नंबर से लिंक खाते में बहुत मामूली रकम ही थी.” इस तरह की कई शिकायतें साइबर सेल के पास पहुंची है. इसमें जालसाज लोगों को एसआईआर की एपीके फाइल इंस्ट्राल कराते हैं और इसके बाद मोबाइल नंबर से अटैच खाते से पैसा निकाल लेते हैं, क्योंकि ऐसा करने के बाद वे मोबाइल हैक कर लेते हैं और मोबाइल की पूरी जानकारी उन्हें मिल जाती है.

साइबर सेल ने बताए जालसाजी से बचने के तरीके

साइबर सेल ने लोगों को जालसाजी से बचने के लिए जागरुक रहने की सलाह दी है. लोगों से साइबर सेल ने अपील की है कि सरकारी दिखने वाले नामों और सरकारी लोगों को देखकर भ्रमित न हों.

किसी भी अनजान व्यक्ति द्वारा यदि फोन करके एसआईआर के संबंध में जानकारी मांगी जाती है या कोई ओटीपी भेजा जाता है, तो उसे दूसरों को बिलकुल भी न बताएं. बेहतर होगा कि संबंधित बीएलओ से संपर्क करके आवेदन फॉर्म भरें.

किसी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजी गई कोई भी लिंक या एपीके फाइल को इंस्ट्राल न करें.

यदि फोन करके कोई व्यक्ति धमकाता है और ओटीपी बताने का दबाव डालता है तो संबंधित थाने में जाकर इसकी सूचना दें और पुलिस की मदद लें.

क्राइम ब्रांच के एडीशनल डीसीपी शैलेन्द्र सिंह चौहान ने बताया कि “कोई भी सरकारी एजेंसी या विभाग कॉल करके, व्हॉट्सएप या एसएमएस से बैंक खातों और ओटीपी की जानकारी नहीं मांगती है.”

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