March 29, 2026 7:02 pm
ब्रेकिंग
Jharkhand Ramnavami Celebration: हजारीबाग की सड़कों पर उमड़ा भक्तों का जनसैलाब, रामनवमी जुलूस की धूम Courier Drug Trafficking: पोस्ट ऑफिस के जरिए हो रही नशीले पदार्थों की सप्लाई, पुलिस ने शुरू किया विश... खौफनाक साजिश! प्रेमिका ने ही प्रेमी से कहा- 'मेरे होने वाले ससुर को उड़ा दो', फायरिंग के बाद दोनों ग... Bageshwar Dham Sarkar News: छत्तीसगढ़ के छुरी पहुंचे धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, शादी को लेकर कही यह बा... Jail Guard Suspended: कैदी को वीआईपी ट्रीटमेंट देने के आरोप में दो जेल प्रहरी सस्पेंड, जांच के आदेश बंदूकों से ज्यादा घातक साबित हो रहे जमीन में दबे IED! 25 साल में 1,277 धमाके, जानें क्यों थमी नहीं ह... Sukma Encounter: सुकमा में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़, माओवादियों का सेक्शन कमांडर ढेर छत्तीसगढ़ में माता कर्मा जयंती की भव्य तैयारियां! मुख्य अतिथि होंगे CM विष्णुदेव साय, जानें कार्यक्र... छत्तीसगढ़ की निकिता ने वेटलिफ्टिंग में सोना जीतकर रचा इतिहास! खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 की कुश्... Khelo India Tribal Games 2026: तैराकी में ओडिशा का दबदबा, खिलाड़ियों ने जीते 3 गोल्ड मेडल
उत्तरप्रदेश

अल-फलाह यूनिवर्सिटी का बड़ा आर्थिक अपराध! ED की जांच में खुलासा, धोखाधड़ी से करोड़ों कमाने का काला खेल

अल-फलाह ग्रुप के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को प्रवर्तन निदेशालय ने (PMLA) के तहत गिरफ्तार किया. मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून के तहत जांच के दौरान कई ऐसे कई सबूत मिले हैं. इन सबूतों से पता चलता है कि लोगों से ठगे गए पैसे और छात्रों की फीस को निजी और व्यक्तिगत इस्तेमाल में लगाया गया. कई लोगों ने माना है कि पैसों से जुड़े सभी बड़े फैसले गिरफ्तार आरोपी ही लेता था.

उदाहरण के लिए, अल-फलाह यूनिवर्सिटी के लीगल और चीफ़ फ़ाइनेंशियल ऑफिसर मोहम्मद राज़ी ने बताया कि वह सीधे चेयरमैन-कम-चांसलर यानी गिरफ्तार आरोपी को रिपोर्ट करते थे. उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी फ़ाइनेंशियल मामले का आख़िरी फैसला गिरफ्तार आरोपी करता था.

गड़बड़ियों का खुलासा

वित्तीय जांच में अल-फलाह चेरिटेबल ट्रस्ट और इससे जुड़े संस्थानों जैसे अल-फलाह यूनिवर्सिटी, अल-फलाह स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी और अन्य शैक्षणिक इकाइयों पर बड़े स्तर की कथित गड़बड़ियों का खुलासा हुआ है. जांच में सामने आया कि सभी संस्थानों के बैंक खाते और ITR एक ही PAN (AAATA0235F) पर चलते हैं, जिससे स्पष्ट है कि आर्थिक नियंत्रण एक ही ट्रस्ट के हाथ में है.

ITR में चौंकाने वाले आंकड़े

जांच एजेंसियों ने FY 2014-15 से 2024-25 तक के इनकम टैक्स रिकॉर्ड खंगाले. इसमें 2014-15 और 2015-16 में ट्रस्ट ने करीब ₹30.89 करोड़ और ₹29.48 करोड़ की कमाई दिखाई. इस कमाई को Voluntary Contributions यानी दान बताया गया था. 2016-17 से आगे, आय को Receipts from main object यानी शैक्षणिक कमाई बताकर दिखाना शुरू किया गया.

FY 2018-19 से 2024-25 तक आय में बड़ा इजाफा

शैक्षणिक फीस और अन्य चार्जेस के नाम पर हर साल भारी रकम दिखाई गई:

  1. 2018-19: ₹24.21 करोड़
  2. 2019-20: ₹41.97 करोड़
  3. 2020-21: ₹55.49 करोड़
  4. 2021-22: ₹55.15 करोड़
  5. 2022-23: ₹89.28 करोड़
  6. 2023-24: ₹68.87 करोड़
  7. 2024-25: ₹80.10 करोड़

कुल मिलाकर इन सात सालों में ट्रस्ट की कमाई ₹415.10 करोड़ तक पहुंच गई.

फर्जी मान्यता और धोखाधड़ी का शक

जांच एजेंसियों का कहना है कि ट्रस्ट मुख्य रूप से कॉलेज और यूनिवर्सिटी चलाता है. ऐसे में छात्रों से ली गई फीस ही इसकी मुख्य आय है. लेकिन, कई सालों तक संस्थान मान्यता (accreditation) के बिना चलते रहे. इसके बावजूद छात्रों से पूरी फीस वसूली गई, जिसे एजेंसियां धोखाधड़ी और जालसाजी मान रही हैं.

FIR नंबर 337/2025 और 338/2025 में यह आरोप शामिल है किगलत मान्यता दिखाकर छात्रों को एडमिशन दिया गया. फर्जी दस्तावेज़ तैयार किए गए और इन सबके आधार पर अवैध कमाई की गई. जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह पूरा मामला मनी लॉन्ड्रिंग और फर्जीवाड़े के दायरे में आता है और आगे भी कई खुलासे होने की संभावना है.

कब तक रिमांड पर भेजा?

जवाद अहमद सिद्दीकी को अल फलह ग्रुप से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी के दौरान मिली अहम जानकारियों और सबूतों के आधार पर गिरफ्तार किया गया. ईडी की तरफ से यह जांच दो FIR के आधार पर शुरू की गई थी. ये एफआईआर दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की तरफ से दर्ज की गई थी. मेडिकल कराने के बाद आरोपी सिद्दीकी को साकेत कोर्ट में पेश किया गया. दिल्ली स्थित साकेत कोर्ट ने अल फलाह विश्वविद्यालय के संस्थापक जवाद अहमद सिद्दीकी को 13 दिन की प्रवर्तन निदेशालय रिमांड में भेज दिया है. वह 1 दिसंबर तक रिमांड में रहेंगे.

Related Articles

Back to top button