February 24, 2026 3:39 am
ब्रेकिंग
Ramadan 2026- साल में दो बार आएगा रमजान का महीना? जानिए कब बनेगा ऐसा दुर्लभ संयोग और क्या है इसके पी... Paneer Shimla Mirch Recipe: शेफ कुनाल कपूर स्टाइल में बनाएं पनीर-शिमला मिर्च की सब्जी, उंगलियां चाटत... Kashmir Encounter News: घाटी में आतंक का अंत! 'ऑपरेशन त्रासी' के तहत सैफुल्ला सहित 7 दहशतगर्द मारे ग... Jabalpur News: जबलपुर के पास नेशनल हाईवे के पुल का हिस्सा ढहा, NHAI ने पल्ला झाड़ा; कहा- यह हमारे अध... बड़ा खुलासा: शंकराचार्य पर FIR कराने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी का खौफनाक अतीत! रेप और मर्डर जैसे संगीन ... Crime News Bihar: एक क्लिक पर बुक होती थीं लड़कियां, बिहार पुलिस ने उजागर किया मानव तस्करी का 'मामी-... Namo Bharat New Routes: दिल्ली-मेरठ के बाद अब इन 3 रूटों पर चलेगी नमो भारत, जानें नए कॉरिडोर और स्टे... Haryana News: पंचायतों के राडार पर सिंगर मासूम शर्मा, विवादित बयान/गाने को लेकर मचा बवाल, जानें क्या... बड़ी खबर: बिहार के IG सुनील नायक को आंध्र पुलिस ने पटना में किया गिरफ्तार! पूर्व सांसद को टॉर्चर करन... NCP-SP vs Ajit Pawar: पायलट सुमित कपूर की भूमिका पर उठे सवाल, विधायक ने अजीत पवार विमान हादसे को बता...
धार्मिक

कैसा था वो पांचजन्य शंख? जिसके शंखनाद से कौरव थर्रा उठते थे, और $18$ दिन तक कुरुक्षेत्र कांपा! जानें श्रीकृष्ण के शंख का रहस्य

भगवान श्रीकृष्ण के शंख पांचजन्य की एक बार फिर चर्चा हो रही है. ये चर्चा इस वजह से है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज यानी मंगलवार को हरियाणा के कुरुक्षेत्र जा रहे हैं, जहां कृष्ण के पवित्र शंख के सम्मान में नवनिर्मित ‘पांचजन्य’ का उद्घाटन किया जाएगा. ये वह शंख है, जिसके शंखनाद की आवाज कई किलोमीटर दूर तक जाती थी और कौरव थर्रा उठते थे व करुक्षेत्र भी कांप उठता था.

कथा के मुताबिक, भगवान श्रीकृष्ण ने गुरु सांदीपनि से शिक्षा हासिल की थी. शिक्षा पूरी होने के बाद गुरु सांदीपनि ने दक्षिणा में अपने पुत्र को मांग लिया. दरअसल, उनका पुत्र समुद्र में डूब गया, जिसे शंखासुर नामक राक्षस ने निगल लिया था. श्रीकृष्ण ने गुरु को वचन दिया कि वे उनका पुत्र लौटाएंगे.

भगवान ने कर दिया था शंखासुर राक्षस का वध

भगवान कृष्ण और बलराम गुरु सांदीपनि का पुत्र खोजने के लिए समुद्र में उतर गए और शंखासुर राक्षस से कहा कि उनके गुरु का पुत्र लौटा दो. ये बात राक्षस को नागवार गुजरी और वह भगवान से युद्ध करने लगा. युद्ध में राक्षस पराजित हुआ. पराजित होने के बाद उसने बताया कि उनके गुरु का पुत्र यमलोक पहुंच गया है.

भगवान ने राक्षस का वध कर दिया, जिसके बाद उसके शरीर से पांचजन्य शंख की उत्पत्ति हुई. भगवान ने शंख को अपने पास रखा और फिर यमलोक के लिए निकल गए, जहां उनके क्रोध को देखकर यमराज भयभीत हो गए और सांदीपनि के पुत्र की आत्मा को फिर से धरती पर भेज दिया. भगवान ने अपने गुरु को पुत्र के साथ शंख भी भेंट कर दिया, लेकिन गुरु सांदीपनि ने शंख श्रीकृष्ण को लौटा दिया, जिसके बाद से वह हमेशा के लिए भगवान का हो गया.

पांचजन्य शंख की खासियत

इस पांचजन्य शंख की खासियत थी कि इसकी ध्वनि कई किलोमीटर तक पहुंच जाती थी. कहा जाता है कि इसका शंखनाद इतना तेज था जोकि 1000 शेरों की गर्जना के बराबर माना जाता था. महाभारत युद्ध के समय कृष्ण ने इसी शंख का इस्तेमाल 18 दिन तक किया था. युद्ध की सुबह शुरुआत और अंत शाम को इसी शंख के शंखनाद के साथ होता था. जैसे ही सुबह शंख बजता था वैसे ही पांवड उत्साह से भर जाते थे, जबकि कौरव भयभीत हो जाते थे. यही नहीं, पांचजन्य शंख विजय के साथ समृद्धि और सुख का प्रतीक भी बताया गया है.

Related Articles

Back to top button