February 13, 2026 12:37 am
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विवादास्पद मंत्री की टिप्पणी: ‘पति vs देवाभाऊ’ के बयान से महाराष्ट्र में सियासी तूफान, विपक्ष ने घेरा

महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनाव प्रचार अपने चरम पर है और लाडकी बहिण योजना एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के ऐलान के बाद अब सरकार के ग्राम विकास मंत्री जयकुमार गोरे के बयान ने चुनावी माहौल और गर्मा दिया है. गोरे ने सोलापुर में एक चुनावी रैली में लाडकी बहिन योजना का गुणगान करते हुए कहा कि आपके पति आपको 100 रुपये नहीं देते जबकि देवाभाऊ ने आपको हर महीने 1500 रुपये दिए हैं. लोकसभा चुनाव के बाद शिंदे के सीएम रहते ही इस योजना की शुरुआत की थी.

विधानसभा चुनावों में यह योजना गेमचेंजर साबित हुई थी इसलिए अब निकाय चुनावों में भी इसका राजनीतिक महत्व बढ़ गया है. इस योजना का श्रेय लेकर राजनीतिक दल एक-दूसरे को चुनौती दे रहे हैं. एकनाथ शिंदे इसे अपनी सरकार की उपलब्धि बताते हैं. अजित पवार के वित्त मंत्री रहते यह योजना शुरू हुई, इसलिए एनसीपी भी इसे अपनी उपलब्धि मानती है.

‘आपके पति 100 रुपये नहीं देते लेकिन देवा भाऊ ने 1500 दिए’

बीजेपी ने इसे फडणवीस की “देवा भाऊ” छवि से जोड़ा था. वहीं बीजेपी के मंत्री जयकुमार गोरे ने लाडकी बहनों को कहा आपके पति 100 रुपये नहीं देते लेकिन देवा भाऊ ने 1500 दिए. सोलापुर में एक रैली को संबोधित करते हुए जयकुमार गोरे ने कहा कि आपका पति भी आपको 100 रुपये नहीं देता, लेकिन देवा भाऊ ने 1500 रुपये आपके खाते में भेजे हैं. इसके लिए थोड़ा आभार तो दिखाएं. गोरे ने लोगों को यह कहकर भी चौंकाया कि विरोधी पार्टी वाले पैसे देने आएं तो ले लीजिए, पर वोट सिर्फ बीजेपी को ही दीजिए.

गोरे सीएम फडणवीस के बेहद करीबी माने जाते हैं और उनके इस बयान को सीधे चुनावी संदेश के रूप में देखा जा रहा है. उन्होंने ये भी कहा कि राखी पर भाई 100 रुपये भी पत्नी से पूछकर देता है. गोरे ने कहा कि राखी पूर्णिमा पर आपका सगा भाई भी थाली में 100 रुपये तभी डालता है, जब उसकी पत्नी सिर हिलाती है. अगर पत्नी मना करे, तो भाई 100 रुपये वापस जेब में रख लेता है लेकिन मुख्यमंत्री फडणवीस बिना किसी शर्त के आपको 1500 रुपये दे रहे हैं.

‘देवा भाऊ नहीं रहे तो आपके खाते में 1500 रुपये आने बंद हो जाएंगे’

उन्होंने आगे दावा किया कि देवा भाऊ नहीं रहे तो आपके खाते में 1500 रुपये आने बंद हो जाएंगे. उन्होंने यह भी कहा कि अब साड़ी बांटने का जमाना गया और त्योहारी साड़ी भी मिलना बंद हो गया है, इसलिए महिलाओं को इस योजना का महत्व समझना चाहिए. इस बयान के बाद अब चुनावी तापमान चढ़ गया है. जयकुमार गोरे के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है.

महाराष्ट्र में पहले चरण का मतदान 2 दिसंबर को

विपक्षी दल इसे महिलाओं की भावनाओं और आर्थिक जरूरतों का राजनीतिक इस्तेमाल बता रहे हैं, जबकि भाजपा इसे सरकार की उपलब्धि और जनहितकारी योजना करार दे रही है. वहीं, एकनाथ शिंदे की पार्टी ने भी कहा है कि नेताओं को बयान सोच समझकर देने चाहिए. ये लाडकी बहिन योजना सरकार की है और पैसा जनता का है. महाराष्ट्र में पहले चरण का मतदान 2 दिसंबर को होगा.

मतगणना और नतीजे 3 दिसंबर को घोषित किए जाएंगे. निकाय चुनावों में लाडकी बहिण योजना कितनी प्रभाव डालती है, यह नतीजे तय करेंगे, लेकिन इतना तय है कि इस योजना पर सियासी बयानबाजी और तेज होने वाली है.

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