नारायणपुर में स्कूल की टपकती छत, जलमग्न परिसर, रसोई घर और शौचालय भी जर्जर, शिक्षा व्यवस्था का ये हाल

नारायणपुर: छत्तीसगढ़ के कई जिलों में सरकारी स्कूल भवनों का बुरा हाल है. सरकार और प्रशासन के बेहतर शिक्षा व्यवस्था के दावे लगभग हर जिले में फेल हो रहे हैं. ऐसा ही हाल नारायणपुर जिले से भी सामने आया. जिला मुख्यालय से महज 5 किलोमीटर दूर एक गांव बिंजली है. यहां प्राथमिक एवं माध्यमिक स्कूल में एक तरफ भवन से पानी टपकता है तो दूसरी तरफ परिसर भी जलमग्न है.
एक नहीं, मुसीबत कई: यहां बच्चे कीचड़ और गंदे पानी से भरे परिसर से होकर अगर किसी तरह स्कूल भवन पहुंच भी जाएं तो वहां टपकती छत उनका इंतजार करती है. इसके बाद शौचालय अलग जर्जर हो रहे हैं. वहीं यहां की रसोई घर तक सुरक्षित नहीं है. ETV भारत की टीम ने इस स्कूल से ग्राउंड रिपोर्ट की.
1972 से संचालित है स्कूल: 1972 से संचालित इस स्कूल में नई और पुरानी दोनों ही इमारतें हैं, जो लचर व्यवस्था की गवाही देती हैं. प्री-फैब्रिकेटेड रूम तो उद्घाटन से पहले ही जर्जर हो चुका है. वहीं कई भवन अब भी अधूरे पड़े हैं और जो बने हुए हैं वो उपयोग में न आने से खस्ताहाल हालत में हैं.
शौचालयों की विडंबना: सबसे चौंकाने वाली तस्वीर शौचालय व्यवस्था की है. परिसर में कुल 9 शौचालय बने हैं, लेकिन सिर्फ एक शौचालय चालू है वह भी विधानसभा चुनाव के समय बनाया गया. बाकी सभी शौचालय ताला बंद और जर्जर हालत में पड़े हैं. शिक्षक भी मानते हैं कि बच्चे और स्टाफ उसी एक शौचालय का उपयोग करते हैं.
जानलेवा खतरे तक: स्कूल परिसर में कई सूखे और बड़े पेड़ मौजूद हैं. तेज आंधी-तूफान में इनके गिरने से बड़ी घटना हो सकती है. हाल ही में एक पेड़ गिरकर स्कूल भवन और हाईटेंशन तार पर टिक गया, जिससे कभी भी विद्युत दुर्घटना का खतरा होनी की आशंका है. शिक्षकों ने विभाग को इसकी जानकारी दी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया.
रसोई और महिला रसोइयों की पीड़ा: स्कूल में 2 अलग-अलग रसोई घर हैं. माध्यमिक शाला का रसोई टीन शेड में और बालिका आश्रम का रसोई एक कमरे में. दोनों ही जगह आज भी लकड़ी की भट्टी पर खाना पकाया जाता है. धुएं से भरे कमरे में महिलाएं आंसू बहाते हुए भोजन पकाने को मजबूर हैं. राज्य सरकार महिला उत्थान योजनाओं की बात करती है, लेकिन इन रसोइयों की पीड़ा अनदेखी की जा रही है.
बिजली और पानी की समस्या: यूं तो गांव का नाम बिंजली है, लेकिन यहां बिजली की आपूर्ति बेहद अस्थिर है. आधुनिकता के नाम पर लगाए गए प्रोजेक्टर बिजली कटौती के कारण अक्सर बेकार साबित होते हैं. विद्यार्थियों और शिक्षकों ने बताया कि आज तक समस्या का निदान नहीं हुआ है.
बारिश में कई कई दिनों तक तो लाइट आती ही नहीं. बिजली विभाग के अधिकारी या कर्मचारी उक्त दिशा में कुछ खास प्रयास ही नहीं करते हैं. वहीं शाला परिसर में पीने के पानी के लिए बच्चों को सीधे बोरवेल का पानी ही उपयोग करना पड़ता है क्योंकि वाटर फिल्टर प्लांट नहीं है.
परेशानियां हमारे संज्ञान में, किया जा रहा निराकरण: मीडिया के सवाल पर पहले तो नारायणपुर के जिला शिक्षा अधिकारी अशोक पटेल ने अनजान नजर आए. फिर उन्होंने जल्द ही इन परेशानियों के समाधान की बात कही.
मैं स्वयं शाला का निरीक्षण कर वहां के समस्याओं को देखूंगा. अगर वहां के शाला भवन जर्जर होंगे तो उनके मरम्मत कार्य किया जाएगा– अशोक पटेल, जिला शिक्षा अधिकारी
एक सकारात्मक पहलू भी: तमाम मुश्किलों और भ्रष्टाचार के बावजूद स्कूल की सबसे सकारात्मक तस्वीर शिक्षा की गुणवत्ता है. यहां कुल 8 शिक्षक बच्चों को पढ़ाते हैं. गणित का शिक्षक न होने के बावजूद आपसी तालमेल से सभी विषय पढ़ाए जा रहे हैं. बच्चों और शिक्षकों ने बताया कि प्रोजेक्टर से समय-समय पर शैक्षणिक गतिविधियां भी संचालित होती हैं.





