April 3, 2026 7:16 pm
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मध्यप्रदेश

बड़वानी के गांव में जल संकट, 200 से अधिक परिवार कुएं का गंदा पानी पीने को मजबूर

बड़वानी: जिला मुख्यालय से करीब 17 किलोमीटर दूर अंजड़ तहसील के छोटा बड़दा पुनर्वास बसाहट में ग्रामीण गंभीर जल संकट से जूझ रहे हैं. बसाहट के आधे से अधिक हिस्से में पीने के पानी की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं है. जिसके चलते करीब 200 से अधिक परिवार एक खुले और बिना मुंडेर वाले कुएं का गंदा पानी पीने को मजबूर हैं.

गंदा पानी पीने को मजबूर लोग
सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना के तहत लगाए गए नल केवल कागजों तक ही सीमित रह गए हैं. नलों से पानी नहीं आने के कारण लोगों को कुएं पर निर्भर रहना पड़ रहा है. बसाहट निवासी गेंदा बाई ने बताया कि, ”कुएं के आसपास बड़ी संख्या में परिवार रहते हैं और सभी इसी गंदे पानी का उपयोग पीने के लिए कर रहे हैं. उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है.” ग्रामीणों का कहना है कि, कई बार जनप्रतिनिधियों, पंचायत और अधिकारियों को समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन आज तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला.

कभी-कभार टैंकरों के माध्यम से पानी पहुंचाया जाता है
पुनर्वास निवासी हितेश राठौड़ ने बताया कि, ”सांसद विकास निधि से कभी-कभार टैंकरों के माध्यम से पानी पहुंचाया जाता है, लेकिन वह नाकाफी साबित होता है. स्थायी समाधान न होने से ग्रामीणों में भारी नाराजगी है. आक्रोशित ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए उन्हें ‘मरा हुआ’ तक कह दिया.” ग्रामीणों का कहना है कि जीवन के लिए पानी सबसे जरूरी है, पानी साफ हो या गंदा, मजबूरी में उन्हें वही पीना पड़ता है, लेकिन आज तक उन्हें स्वच्छ पेयजल उपलब्ध नहीं कराया गया.”

कम पड़ जाता है टंकी का पानी
इस मामले में ग्राम पंचायत छोटा बड़दा के सरपंच पप्पू डाबी ने बताया कि, ”बसाहट में पानी की टंकी बनी हुई है. लेकिन एक टंकी से पूरी बसाहट में पानी की आपूर्ति नहीं हो पाती. कुएं की सफाई करवाई गई थी और पानी साफ करने के लिए मोटर लगाने का प्रयास भी किया गया, लेकिन ग्रामीणों ने उसे लगाने नहीं दिया. उन्होंने कहा कि, बसाहट में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी एनवीडी विभाग की है.”सचिव डोंगर खेड़े क्या बोले
वहीं, ग्राम पंचायत बड़दा के सचिव डोंगर खेड़े ने कहा कि, ”बसाहट में पानी की टंकी मौजूद है. कुछ लोग यदि गंदा पानी पी रहे हैं तो पंचायत क्या कर सकती है.” उन्होंने भी बसाहट की जिम्मेदारी एनवीडीए (नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण) विभाग पर डाल दी.

10 साल से परेशान हो रहे ग्रामीण
ग्रामीण रहीसा बाई ने बताया कि, ”वे पिछले 10 वर्षों से यहां रह रही हैं, लेकिन आज तक पानी की कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं हो सकी. सरपंच और सचिव मौके पर आते हैं, लेकिन निरीक्षण के बाद लौट जाते हैं. जब समाधान की मांग की जाती है तो पंचायत एनवीडी विभाग का हवाला देती है और एनवीडी विभाग पंचायत के पास भेज देता है। इस आपसी टालमटोल में ग्रामीण परेशान हो चुके हैं.”

मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी
इधर, एनवीडी-पीएचई विभाग के अधिकारी गोविंद उपाध्याय ने बताया कि, ”मीडिया के माध्यम से उन्हें जानकारी मिली है कि बड़दा बसाहट में लोग गंदा पानी पी रहे हैं.” उन्होंने कहा कि बसाहट में पानी की पर्याप्त व्यवस्थाएं की गई हैं, टंकी और ट्यूबवेल भी लगाए गए हैं. अब तक विभाग को ऐसी कोई शिकायत नहीं मिली थी, मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी.”

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