अमरकंटक में फिर जमी ओस की बूंदें, भीषण ठंड के बीच मैदानों पर सफेद चादर

अनूपपुर: मध्य प्रदेश में भीषण ठंड का प्रकोप जारी है. पिछले 2-3 दिनों से अनूपपुर में जबर्दस्त ठंड पड़ रही है, वहीं अनूपपुर से 65 किमी दूर पवित्र नगरी अमरकंटक में ओस की बूंदें जमने का सिलसिला जारी है. अनूपपुर में जहां गुरुवार-शुक्रवार की दरमियानी रात 6 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया, तो दूसरी ओर अमरकंटक में हाड़कंपा देने वाली ठंड पड़ी. मां नर्मदा की उद्गम स्थली अमरकंटक में वन व पहाड़ी क्षेत्र होने की वजह से शहरों की तुलना में 2-3 डिग्री तापमान और कम होता है. यही वजह है कि पिछले दो दिनों से यहां ओस की बूंदें भी जमने लगी हैं.
नर्मदा के उत्तर व दक्षिण तटों पर जमीं ओस की बूंदें
अमरकंटक में शुक्रवार को भी ओस की बूंदें जमने की खबरें आई थीं. वहीं, तापमान में हल्की बढ़त के साथ पारा 5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, बावजूद इसके शनिवार 20 दिसंबर को फिर यहां ओस की बूंदें जमी नजर आईं. फसलों, पेड़ पौधों और घास पर पड़ी बूंदों के जमने से यहां ऐसा नजारा था मानो हर ओर सफेद चादर बिछी हो. सुबह के समय घाटों, मैदानी क्षेत्रों और खुले इलाकों में जमी बर्फ ने अमरकंटक की सुंदरता को कई गुना बढ़ा दिया.
स्वास्थ्य विभाग ने जारी की एडवाइजरी
कोल्ड वेव के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग द्वारा एडवाइजरी जारी की गई है. स्वास्थ्य विभाग ने कहा है कि कोल्ड वेव के दौरान संवेदनशील समूह विशेषकर 65 वर्ष से अधिक उम्र के वृद्धजन और 5 वर्ष से कम आयु के बच्चे, हार्ट व बीपी पेशेंट, श्वास संबंधी रोगी व खुले में रहने वाले व्यक्ति विशेष सावधानी बरतें. इस दौरान खून गाढ़ा होने से ह्रदय संबंधी खतरे बढ़ जाते हैं. इस दौरान खुले में जाने से पहले शरीर को पूरी तरह गर्म कपड़ों से ढकें और रात के वक्त बाहर न रहें. वहीं, मौसम विभाग के मुताबिक दिसंबर से जनवरी के बीच अमरकंटक में जबर्दस्त ठंड पड़ती है और यहां के कुछ इलाकों में तापमान शून्य के बेहद करीब पहुंच जाता है.
अमरकंटक में जगह-जगह अलाव की व्यवस्था
भीषण ठंड को देखते हुए नगर परिषद अमरकंटक ने पर्यटकों और तीर्थयात्रियों के लिए अलाव की व्यवस्था की है. नगर परिषद के सीएमओ चैन सिंह परस्ते ने ईटीवी भारत को बताया, ” शीतलहर को ध्यान में रखते हुए नगर के विभिन्न स्थानों पर अलाव जलाए जा रहे हैं. जहां-जहां तीर्थयात्री व नर्मदा परिक्रमावासी ठहरते हैं, उन सभी स्थानों पर विशेष रूप से अलाव की व्यवस्था की गई है. विशेषकर बाजार क्षेत्र, मंदिर परिसर, माई बगिया, सोनमूड़ा, बस स्टैंड सहित अन्य प्रमुख स्थलों पर अलाव की लकड़ी उपलब्ध कराकर नियमित रूप से अलाव जलाए जा रहे हैं.”





