जब सब पता तो झीरम घाटी नरसंहार के दोषियों पर कार्रवाई क्यों नहीं, दोषियों के नाम सार्वजनिक करे बीजेपी : ब्यास कश्यप

जांजगीर चांपा : बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के झीरम पर दिए बयान के बाद सियासी गर्मी बढ़ गई है. जेपी नड्डा के बयान पर कांग्रेस ने पलटवार किया है.पहले पूर्व सीएम भूपेश बघेल, फिर पीसीसी चीफ दीपक बैज और अब जांजगीर चांपा विधायक व्यास कश्यप ने जेपी नड्डा के बयान पर कड़ी आपत्ति दर्ज की है.
बीजेपी सरकार में थी तो कार्रवाई क्यों नहीं
ब्यास कश्यप ने कहा है कि जिस वक्त झीरम घाटी नरसंहार हुआ था,उस वक्त प्रदेश में बीजेपी की सरकार थी.इस वक्त भी प्रदेश में बीजेपी की सरकार है,यदि बीजेपी को पता है कि किन लोगों ने झीरम कांड करवाया था तो अब उन सभी के चेहरे बेनकाब करने चाहिए.कांग्रेस विधायक ब्यास कश्यप ने कहा कि जब झीरम घाटी कांड में यदि किसी की सांठगांठ थी तो उस वक्त बीजेपी की सरकार ने कार्रवाई क्यों नही की. अभी भी बीजेपी की केंद्र और राज्य में सरकार है.
अगर बीजेपी के नेता जानते हैं कि झीरम घाटी कांड में किसका हाथ है,तो उसका जल्द से जल्द खुलासा करें.यदि बीजेपी के नेता ऐसा नहीं करते हैं तो प्रदेश की जनता और शहीद के परिजनों से माफी मांगे – व्यास कश्यप, कांग्रेस विधायक
बिना जनादेश के ही मना रहे परब
वहीं ब्यास कश्यप ने राज्य सरकार के 2 साल पूरा होने पर आयोजित जनादेश परब पर सवाल उठाए. व्यास कश्यप ने कहा कि जांजगीर चांपा जिला की जनता ने बीजेपी को जनादेश नहीं दिया, फिर भी जांजगीर चांपा जिला में जनादेश परब कार्यक्रम में करोड़ों रुपए खर्च किए गए.बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के साथ प्रदेश के मुख्यमंत्री और पूरे मंत्री मौजूद थे.ऐसे में जांजगीर चांपा जिला को फूटी कौड़ी की सौगात नहीं मिली.आखिर जांजगीर चांपा की जनता के साथ भेदभाव क्यों किया जा रहा है.
झीरम घाटी पर जेपी नड्डा का बयान
आपको बता दें कि जांजगीर चांपा के जनादेश परब कार्यक्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने झीरम घाटी में कांग्रेसी नेताओं और जवानों के नरसंहार के मामले में कांग्रेस को ही कटघरे मे खड़ा किया था.झीरम घाटी में हुए नक्सली हमले को लेकर जेपी नड्डा ने कहा था कि हमले को अंजाम देने में अंदर के ही लोग शामिल थे, जिसकी वजह से कांग्रेस के नेताओं की हत्या हुई. जेपी नड्डा ने कहा कि अब डबल इंजन की सरकार यहां काम कर रही है. इसका नतीजा है कि बड़ी संख्या में नक्सली सरेंडर कर रहे हैं या फिर मारे जा रहे हैं.





