February 13, 2026 5:53 am
ब्रेकिंग
Goa Voter List 2026: गोवा की फाइनल वोटर लिस्ट 14 फरवरी को नहीं होगी जारी, चुनाव आयोग ने बदली तारीख सोनम वांगचुक मामला: केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया हलफनामा, रिहाई की मांग का किया विरो... Patna News: घर में मिली हाई कोर्ट की महिला वकील इंदिरा लक्ष्मी की अधजली लाश, मर्डर या सुसाइड की गुत्... Hardeep Puri vs Rahul Gandhi: एपस्टीन से मुलाकात पर हरदीप पुरी की सफाई, राहुल गांधी के आरोपों को बता... Lucknow Crime News: लखनऊ में बुआ-भतीजे ने ट्रेन के आगे कूदकर दी जान, लव अफेयर या पारिवारिक विवाद; जा... Rohit Shetty Case: रोहित शेट्टी मामले में बड़ा खुलासा, अब MCOCA एंगल से जांच करेगी पुलिस Vande Mataram New Rules: वंदे मातरम् को लेकर केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, जानें मुस्लिम धर्मगुरुओं और... Bhagalpur Hospital Controversy: मंत्री लेशी सिंह के बीपी चैकअप पर बवाल, आरोपी डॉक्टर के खिलाफ जांच क... Delhi News: 'जंगलराज' के आरोपों के बीच गरमाई दिल्ली की सियासत, AAP नेताओं ने कानून व्यवस्था को लेकर ... Delhi Metro Phase 4: दिल्ली मेट्रो के 3 नए कॉरिडोर को मंजूरी, 13 स्टेशनों के साथ इन इलाकों की बदलेगी...
मध्यप्रदेश

पेड़ों के लिए ‘जैन साहब’ का सत्याग्रह! सड़क किनारे बिस्तर बिछाकर गुजार रहे रातें, अकेले ही मेट्रो प्रोजेक्ट से भिड़ गया ये शख्स

इंदौर: दिल्ली जैसे महानगरों में घटती ऑक्सीजन के चलते जहां सांसों का संकट गहरा रहा है. वहीं, जिन शहरों में थोड़ी बहुत हरियाली बची है वहां भी विकास योजनाओं के कारण पेड़ पौधों को नष्ट किया जा रहा है. इंदौर के रीगल चौराहे पर ऐसे ही 235 पेड़ पौधों को बचाने के लिए अब शहर के जागरूक लोग गांधीगिरी करने को मजबूर हैं. 16 दिन से यहां जो विरोध प्रदर्शन हो रहा है, उसमें शहर के लोग अलग-अलग रूप से आकर पेड़ पौधों को बचाने के लिए अपनी हाजिरी दर्ज करा रहे हैं.

हजारों तोते गुजारते हैं पेड़ों पर रात
देश के स्वच्छ शहर इंदौर में फिलहाल ग्रीन कवर एरिया मात्र 9 पर्सेंट बचा है. इसके बावजूद शहर में विकसित किया जा रहे मेट्रो रेल नेटवर्क के कारण यहां बड़ी संख्या में पेड़ पौधों पर विकास की कुल्हाड़ी चल रही है. फिलहाल मेट्रो की जद में शहर के बीचो-बीच मौजूद रीगल चौराहे के वे हरे भरे पेड़ भी आ गए हैं, जिन पर शाम ढलते ही हजारों तोते रात गुजारते हैं.

पेड़ों को बचाने के लिए धरना
शहर में मेट्रो के अंडरग्राउंड रूट पर रीगल चौराहा पर स्थित रानी सराय का यह क्षेत्र है, जहां पर अंडरग्राउंड मेट्रो के लिए स्टेशन प्रस्तावित किया गया है. फिलहाल यहां स्टेशन का काम शुरू हो गया है और यहां के 235 पेड़ पौधों पर संकट मंडरा रहा है. इस स्थिति में इन्हें बचाने के लिए जनहित पार्टी के अभय जैन ने इंदौर जिला प्रशासन के अलावा नगर निगम और मेट्रो रेल प्रबंधन से इन्हें बचाने की गुहार लगाई थी. इसके बावजूद भी जब कोई प्रभावी सुनवाई नहीं हुई तो वह 1 जनवरी से पेड़ों के बीच में ही धरना देकर बैठ गए.

उनके साथ उनके कुछ सहयोगियों ने भी इन पेड़ पौधों और तोतों के आशियानों को बचाने के लिए उनके आंदोलन का समर्थन किया. जो उनके साथ मौके पर डटे हुए हैं. फिलहाल स्थिति यह है कि अब उनकी हरियाली बढ़ाने की मुहिम में शहर के ऐसे लोग भी शामिल हैं जो यहां किसी न किसी काम से आते हैं. लेकिन पेड़ पौधों को बचाने के लिए उनके अभियान को समर्थन देते हैं.

235 पेड़ पौधों का पंचनामा और रिकॉर्ड
फिलहाल विरोध प्रदर्शन के दौरान यहां 235 पेड़ों का पंचनामा तैयार किया गया है. जिसमें पेड़ की प्रजाति उसकी उपयोगिता और संबंधित पेड़ की और से उसे न काटने की गुहार लिखी गई है. इसके अलावा पूरे परिसर में पर्यावरण संरक्षण और पेड़ पौधों को बचाने के स्लोगन और सूत्र वाक्य लिखे गए हैं, जो इन पेड़ पौधों की सुरक्षा के लिए लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करते हैं.

अभय जैन बताते हैं कि, ”सभी जिम्मेदार लोगों को इस मामले में ज्ञापन और जानकारी दी गई है. इसके अलावा इंदौर हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका भी पेड़ पौधों को बचाने के लिए लगाई गई है जिसकी सुनवाई जल्द होगी. उन्होंने बताया, ”16 दिन और 16 रात से यहां धरना दिया जा रहा है जिससे कि पेड़ पौधों को दिन के अलावा रात में चोरी छुपे काटने से बचाया जा सके. साथ ही इन पर रहने वाले हजारों तोतों की जान भी बचाई जा सके.” इधर इस मामले में मेट्रो रेल कंपनी के जनसंपर्क अधिकारी हिमांशु ग्रोवर का कहना है, ”इस मामले में कोई भी फैसला शीर्ष प्रबंधन द्वारा ही लिया जा सकता है.”

फैशन आइकॉन से ज्यादा कुछ नहीं मेट्रो
इस अभियान से जुड़े जागरूक नागरिक और पर्यावरण विद् का मानना है कि, जयपुर कानपुर लखनऊ और पुणे जैसे शहरों में जो मेट्रो चल रही है उसमें गिनती के यात्री सवारी करते हैं. लेकिन ऐसे प्रोजेक्ट के लिए राज्य सरकार हैं हजारों करोड़ों का लोन ले रही हैं. इंदौर मेट्रो के भी यही हाल हैं जहां अव्वल तो मेट्रो कुछ किलोमीटर क्षेत्र में ही चल रही है, वहीं उसमें यात्रा करने वाले यात्री ही नहीं है. इसके बावजूद ऐसी मेट्रो के लिए शहर के हरे-भरे ग्रीन कवर एरिया को नष्ट किया जा रहा है.

पर्यावरण विद मनीष काले बताते हैं कि, ”मेट्रो जैसी परियोजनाएं सिर्फ फैशन आइकॉन बनकर रह गई हैं, क्योंकि यह विकास की पश्चिमी अवधारणा है वह भी उधारी में डूबी हुई है. ऐसी योजनाओं के बदले पेड़ पौधों का विनाश एक दिन लोगों को जरूर भुगतना होगा. क्योंकि दिल्ली जैसे शहर में अब सांसों का संकट है, वहीं विकास योजनाओं के कारण यदि इंदौर जैसे शहर में भी हरियाली नष्ट कर दी जाएगी, तो यही स्थिति भविष्य में यहां भी नजर आ सकती है.”

Related Articles

Back to top button