April 3, 2026 5:13 pm
ब्रेकिंग
महाकाल की शरण में 'दिग्गज'! केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और उमेश यादव ने टेका मत्था; भस्म आरती म... Man-Animal Conflict: पेंच रिजर्व में बाघों के हमले तेज, 90 दिनों में 4 की मौत; डरे ग्रामीण और प्रशास... चोरी की तो लगेगा 440 वोल्ट का झटका! पीथमपुर में रेलवे का चोरों के खिलाफ 'करंट' वाला मास्टरप्लान Tikamgarh Tourism: टीकमगढ़ के बड़ागांव धसान की खास पहचान हैं ये हनुमान जी, जानें क्यों कहा जाता है इ... राजेन्द्र भारती मामले में कोर्ट जाएगी कांग्रेस, शिवराज के बंगले पर अनशन की चेतावनी एमपी की सियासत में आधी रात का धमाका! विधानसभा पहुंचे जीतू पटवारी, कांग्रेस नेता के तेवर देख सचिवालय ... हापुड़ का 'बंटी-बबली' गैंग! महंगे शौक के लिए भाई-बहन ने व्यापारी के घर डाला डाका; लग्जरी लाइफ ने बना... मोतिहारी में 'जहर' बनी शराब! 4 लोगों की मौत, 3 की आंखों की रोशनी गई; पूरे बिहार में हड़कंप Rajasthan Mehndi Crisis: 250 करोड़ का घाटा! मिडिल ईस्ट की जंग ने फीकी कर दी राजस्थान की मेहंदी; बंद ...
विदेश

पैसा लो और देश दे दो!” क्या अमेरिका ग्रीनलैंड को खरीदने के लिए हर नागरिक को देगा 90-90 लाख? जानें वायरल खबर का सच

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दुनिया के सबसे बड़े द्वीप ग्रीनलैंड पर कब्जा जमाने के लिए हर मुमकिन विकल्प पर विचार कर रहे हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप ग्रीनलैंड के लोगों को अपने पक्ष में करने के लिए एक बेहद चौंकाने वाले प्रस्ताव पर मंथन कर रहे हैं. इस प्रस्ताव के तहत हर ग्रीनलैंड नागरिक को $100,000 यानी करीब 90 लाख रुपये तक की एकमुश्त रकम देने की योजना पर चर्चा चल रही है.

बताया जा रहा है कि वॉशिंगटन में इस मुद्दे को लेकर गंभीर बातचीत हो रही है और ट्रंप प्रशासन ग्रीनलैंड को अमेरिका के कंट्रोल में लाने के लिए अलग-अलग रणनीतियों पर विचार कर रहा है.अगर यह योजना लागू होती है, तो करीब 57,000 ग्रीनलैंडवासियों को कुल मिलाकर $5.7 बिलियन का भुगतान करना पड़ सकता है.

क्यों इतना अहम है ग्रीनलैंड?

ग्रीनलैंड भले ही आबादी में छोटा हो, लेकिन रणनीतिक और सैन्य नजरिए से यह बेहद अहम माना जाता है. ट्रंप पहले भी साफ कर चुके हैं कि ग्रीनलैंड का कंट्रोल अमेरिका के लिए बहुत जरूरी है. उनका कहना है कि यह इलाका सिर्फ भौगोलिक नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक तौर पर भी अमेरिका की वैश्विक ताकत के लिए जरूरी है. ट्रंप ने यहां तक कह दिया कि ग्रीनलैंड को हासिल करने और यूरोप के साथ रिश्ते बनाए रखने के बीच कोई न कोई विकल्प सामने आ सकता है। इस बयान के बाद यूरोपीय देशों में चिंता और नाराज़गी दोनों देखने को मिली.

सैन्य कार्रवाई की धमकी से बढ़ा तनाव

हाल ही में ट्रंप ने यह कहकर माहौल और गरमा दिया कि जरूरत पड़ने पर वह सैन्य विकल्प से भी पीछे नहीं हटेंगे. उनके इस बयान को नाटो देशों के लिए सीधी चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है. डेनमार्क और ग्रीनलैंड दोनों पहले ही साफ कर चुके हैं कि ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है, और किसी भी तरह की जबरदस्ती नाटो गठबंधन को खतरे में डाल सकती है.

ग्रीनलैंड में मिली-जुली प्रतिक्रिया

ग्रीनलैंड के लोगों में इस पूरे घटनाक्रम को लेकर डर और असमंजस का माहौल है. कई लोग ट्रंप की सैन्य धमकियों से चिंतित हैं. वहीं, मुख्य विपक्षी पार्टी नालेराक ने इसे मौके की खिड़की बताया है. पार्टी का मानना है कि अमेरिका की दिलचस्पी से ग्रीनलैंड के लोगों की जिंदगी बेहतर बनाने के ठोस मौके मिल सकते हैं. हालांकि पार्टी के नेताओं ने साफ किया कि ग्रीनलैंडवासी न तो अमेरिकी बनना चाहते हैं और न ही डेनिश, वे सिर्फ ग्रीनलैंडर के रूप में अपनी पहचान बनाए रखना चाहते हैं.

Related Articles

Back to top button