February 13, 2026 4:02 am
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मध्यप्रदेश

बारकोड स्कैन करते ही बोलने लगे मंडला के पेड़, जंगल पहुंचे स्टूडेंट्स की अनोखी अनुभूति

मंडला : जंगल और वन्य जीवों का ज्ञान किताबों से ज्यादा वहां जाकर ज्यादा बेहतर ढंग से प्राप्त किया जा सकता है. इसी के चलते मंडला में वन विभाग द्वारा बच्चों के लिए एक ऐसे कैंप की शुरुआत की गई है, जहां वे जंगलों में खुद जाकर प्रकृति और वन्य संपदा को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं. इस कैंप का नाम है अनुभूति जो अपने नाम के अनुरूप बच्चों को वाइल्ड लाइफ की अनोखी अनुभूति करा रहा है.

जंगल में लगा अनुभूति कैंप

शुक्रवार को मंडला के वन परिक्षेत्र अन्जनिया द्वारा अजगर दादर क्षेत्र में अनुभूति केम्प का आयोजन किया गया. इसका उद्देश्य बच्चों को पढ़ाई के साथ साथ पर्यावरण, वन्य जीवों और वन्य सुरक्षा नियमों की विस्तृत जानकारी देना है. इस कार्यक्रम में मंडला के औरई, चन्गरिया, मानिकपुर,घोंट आदि स्कूल के करीब 135 बच्चों ने भाग लिया. कैंप की शुरुआत में जहां बच्चों को अजगरों के प्रकार बताए गए, तो वहीं रेंजर लतिका तिवारी ने बच्चों को वन्य प्राणी, पेड़ पौधे और प्रकृति के बारे मे जानकारी दी.

जब क्यू आर कोड स्कैन करते ही बोलने लगा पेड़

स्कली बच्चों का रोमांच तब और बढ़ गया जब रेंजर लतिका द्वारा एक पेड़ का बारकोड स्कैन करते ही पेड़ खुद अपने बारे में जानकारी देते लगा. बच्चों व आमजन को पेड़ों की सही जानकारी देने के लिए वन विभाग की ये खास पहल है, जिसमें पेड़ की उम्र, प्रकार, विशेषता, लाइफ रेंज समेत कई तरह की रोचक जानकारियां बारकोड स्कैन करते ही मिल जाती हैं.

इस वजह से लगाया गया अनुभूति कैंप

कार्यक्रम की आयोजक वन परिक्षेत्र अधिकारी लतिका तिवारी ने बताया, ” अनुभूति कैंप का उद्देश्य छोटे बच्चों में पर्यावरण के प्रति संरक्षण और सुरक्षा की भावना जागृत करना है. हमने इस बार चुनरिया घाट और मानिकपुर के शासकीय विद्यालयों के बच्चों को बुलाया है. यहां करीब 135 बच्चे इकट्ठे हुए हैं. अजगर दादर का भ्रमण कराते हुए आसपास जो जंगल वाला क्षेत्र है, वहां बच्चों ने वन्य प्राणियों के मूवमेंट को देखा, उन्हें करीब से जाना है. हमने बच्चों को इसके साथ नेचर ट्रैक भी कराया. किताबों के अलावा बच्चे जब इस तरह प्रकृति को करीब से आकर देखते हैं, तो यह काफी प्रभावी होता है.”

कार्यक्रम में शामिल बच्चे अनुभूति कैंप से बेहद खुश नजर आए, कक्षा 9वीं की छात्रा ने कहा, ” मैं मानिकपुर से आई हूं और मुझे जाकर बहुत अच्छा लगा और मैं आई तो यहां पर पेड़ पौधों के बारे में रोचक जानकारी बारकोड से मिली. हमने सीखा कि कैसे वन को सुरक्षित रखते हैं और कैसे वन्य जीवों की रक्षा की जाती है.”

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