छत्तीसगढ़ विधानसभा के पुराने भवन में अंतिम सत्र: रमन सिंह ने किया आसन को प्रणाम, 25 साल की उपलब्धियों का साझा स्मरण
रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा के पुराने भवन में आयोजित विशेष सत्र में एक भावनात्मक और ऐतिहासिक पल देखने को मिला. सत्र के दौरान विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और नेता प्रतिपक्ष डॉ चरण दास महंत ने पिछले 25 वर्षों की संस्मरणीय यात्रा, उपलब्धियों और भविष्य की दिशा पर अपने विचार साझा किए.
डॉ रमन सिंह ने अध्यक्षीय आसन को प्रणाम कर इस भवन से जुड़े अपने 23 वर्षों के अनुभव को याद किया, वहीं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस लोकतंत्र के मंदिर को जनता की उम्मीदों का केंद्र बताया. इस दौरान नेता प्रतिपक्ष डॉ चरण दास महंत ने जनता को सीधे विधानसभा से जोड़ने के लिए नई तकनीकी व्यवस्था लागू करने का सुझाव देकर सत्र में नई बहस को जन्म दिया.
चर्चाओं और संस्मरणों के बीच यह सत्र पुराने विधानसभा भवन को भावनात्मक विदाई देते हुए नए रायपुर के नए भवन में शुरू होने वाली नई संसदीय यात्रा का संकेत भी बन गया.
रमन सिंह हुए भावुक – आसन को प्रणाम करते हुए 23 साल की यात्रा का स्मरण: रमन सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि इस विधानसभा भवन के साथ उनके जीवन का 23 वर्ष का गहरा नाता जुड़ा है. उन्होंने बताया कि वे 15 वर्ष मुख्यमंत्री, 5 वर्ष विपक्ष और 2 वर्ष विधानसभा अध्यक्ष के रूप में इस सदन के साक्षी रहे। उन्होंने कहा कि विकास की जो बड़ी गाथाएं इतिहास के पन्नों में दर्ज हुई, चाहे वह खाद्यान्न सुरक्षा हो, पोषण सुरक्षा, कौशल उन्नयन, सड़क, शिक्षा या चिकित्सा क्षेत्र का विस्तार. इनकी आधारशिला इसी विधानसभा भवन में रखी गई.
रमन सिंह ने बताया कि 1 मेडिकल कॉलेज से छत्तीसगढ़ आज 15 मेडिकल कॉलेजों तक पहुंचा, 212 कॉलेजों से बढ़कर राज्य में 400 से अधिक कॉलेज हो गए, 84 नर्सिंग कॉलेज स्थापित किए गए और करीब 40 हजार स्कूल भवनों का निर्माण इसी सदन की नीतिगत मंजूरी से संभव हुआ. विधानसभा अध्यक्ष ने दंतेवाड़ा से सरगुजा तक 20–30 हजार किलोमीटर सड़क नेटवर्क, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की 30 हजार किलोमीटर तक की मंजूरी और ब्याज दर को 16% से घटाकर 0% करने जैसे फैसलों को राज्य की उपलब्धियां बताया.
रमन सिंह ने सत्र के अंत में अध्यक्षीय आसन को स्पर्श कर प्रणाम किया. उन्होंने कहा कि इसी आसन ने उन्हें संवैधानिक दायित्व निभाने का अवसर दिया और यह उनके जीवन की सबसे गौरवशाली उपलब्धियों में से एक है.
मुख्यमंत्री साय का वक्तव्य – पुराने भवन को लोकतंत्र का मंदिर बताया: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि यह पुराना विधानसभा भवन पिछले 25 वर्षों तक जनता की आशाओं, अपेक्षाओं और विश्वास का केंद्र बना रहा. उन्होंने कहा कि विशेष सत्र इस भवन का अंतिम सत्र है और इसमें पूरे दिन सत्ता और विपक्ष के सदस्यों ने संस्मरण साझा कर इस सदन को भावनात्मक विदाई दी.
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ के विकास से जुड़े सभी बड़े निर्णय, नियम और विधेयक इसी भवन ने देखे हैं. उन्होंने यह भी याद दिलाया कि 1 नवंबर को स्थापना दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए विधानसभा भवन का लोकार्पण किया और 14 से 17 दिसंबर तक पहली बार शीतकालीन सत्र नए भवन में आयोजित होगा. मुख्यमंत्री साय ने इस ऐतिहासिक पल को “पुराने सदन से नए सदन तक संक्रमण का महत्वपूर्ण अवसर” बताया.
नेता प्रतिपक्ष महंत का नया प्रस्ताव – जनता को सीधे विधानसभा से जोड़ने की मांग: नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत ने सत्र में एक महत्वपूर्ण सुझाव रखते हुए कहा कि आज की तकनीक के दौर में जनता को सीधे विधानसभा से जोड़ने की व्यवस्था शुरू की जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि जब विधानसभा सत्र चलता है, तो जनता एवं कार्यकर्ता कई मुद्दों पर सवाल पूछना चाहते हैं, लेकिन वे विधायकों तक पहुंच नहीं पाते या समय पर उनका जवाब नहीं मिल पाता. इसलिए ऐसी तकनीकी व्यवस्था लागू की जाए जिसमें जनता अपने प्रश्न सीधे विधानसभा को भेज सके और विधानसभा की समितियां उन प्रश्नों का परीक्षण कर संबंधित मंत्री या सदस्य से जवाब दिला सकें.
उन्होंने कहा कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को भी सीधा और सटीक उत्तर मिलेगा और लोकतांत्रिक प्रक्रिया और अधिक मजबूत होगी. महंत ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में कई बार प्रश्न अस्वीकार हो जाते हैं, समय पर नहीं पहुंचते या जवाब नहीं आता, लेकिन यदि जनता का सीधा कनेक्शन विधानसभा से होगा, तो पारदर्शिता बढ़ेगी और जनता का विश्वास और मजबूत होगा.
सत्र का समापन – पुराने सदन को भावनात्मक विदाई, नई शुरुआत की तैयारी: दिनभर चली चर्चाओं, संस्मरणों और अनुभवी सदस्यों के संबोधनों के बाद यह विशेष सत्र पुराने विधानसभा भवन में आयोजित अंतिम विधायी प्रक्रिया बन गया. रमन सिंह ने बताया कि 25वें वर्ष में 25 सदस्यों ने भाषण दिया—जिसे उन्होंने “रजत जयंती का सुंदर संयोग” बताया. सत्र के अंत में उन्होंने छत्तीसगढ़ की मीडिया की भूमिका की भी सराहना करते हुए कहा कि राज्य की पत्रकारिता देश के लिए उदाहरण है. सत्र का भावनात्मक समापन इस संदेश के साथ हुआ कि अब छत्तीसगढ़ की नई संसद यात्रा नए रायपुर स्थित अत्याधुनिक नए विधानसभा भवन में एक नए अध्याय के रूप में शुरू होगी.





