बिना अनुमति हॉस्टल निर्माण पर 2 विभागों में तू-तू मैं-मैं, जीवाजी विश्वविद्यालय को 100 करोड़ का झटका!

ग्वालियर: जीवाजी विश्वविद्यालय में बन रही नवीन हॉस्टल बिल्डिंग तैयार होने से पहले ही सुर्खियों में है. वजह है इसके निर्माण पर नगर निगम ने रोक लगा दी है. आखि क्यों? तो इसका जवाब है कि, निर्माण से पहले इस बिल्डिंग की निर्माण स्वीकृति नगर निगम से नहीं ली गई है. ऐसे में नगर निगम इस निर्माण को अवैध मान रहा है.
इस स्थिति में न तो मध्य प्रदेश सरकार की निर्माण एजेंसी यानी भवन विकास निगम जो इसका जिम्मा संभाल रही है, काम आगे बढ़ा पा रही है और न ही विश्वविद्यालय प्रबंधन कुछ कर पा रहा है. इन दोनों के बीच अनुमति को लेकर खींचतान मची हुई है. इसका सीधा नुकसान विश्वविद्यालय और इसके छात्रों को होता दिखाई दे रहा है. क्योंकि इस लापरवाही में जीवाजी यूनिवर्सिटी को करोड़ों रुपये का सीधा नुकसान हो सकता है.
पीएम उषा स्कीम के तहत जेयू को मिले थे 100 करोड़ रुपये
असल में जीवाजी विश्वविद्यालय समेत मध्य प्रदेश की तीन यूनिवर्सिटी को वित्तीय वर्ष 2025-26 में पीएम उषा योजना के तहत 100 करोड़ रुपये की राशि केंद्र सरकार से मिली थी. ये राशि विश्वविद्यालय में विभिन्न विकास और निर्माण कार्य के लिए थी. इसी के तहत विश्वविद्यालय परिसर में रिनोवेशन के साथ साथ एक नया 100 सिटी गर्ल्स हॉस्टल बिल्डिंग बनाये जाने का प्रस्ताव दिया गया था. प्रस्ताव की स्वीकृति के बाद भूमिपूजन अगस्त 2025 में खुद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया था.
निर्माण से पहले अनुमति नहीं ली तो निगम ने रुकवाया काम
जीवाजी विश्वविद्यालय के इस नए गर्ल्स हॉस्टल के निर्माण की जिम्मेदारी प्रदेश सरकार ने मध्य प्रदेश भवन विकास निगम को दी है. कुछ महीने पहले इस बिल्डिंग का निर्माण शुरू हुआ लेकिन इस बिल्डिंग पर ग्रहण तब लगा जब नगर निगम की नजर इस पर पड़ी. इस प्रोजेक्ट के लिए किसी ने नगर निगम से कोई एनओसी या अनुमति ही नहीं ली और कार्य शुरू कर दिया. ये बात जानकारी में आने पर बीते 8 जनवरी को नगर निगम ने मौके पर पहुंच कर निर्माण कार्य पर रोक लगा दी.
भवन विकास निगम ने विश्वविद्यालय को बताया जिम्मेदार
इधर, इस मामले को लेकर भवन विकास निगम के अधिकारी भी अपने अलग तर्क दे रहे हैं. निर्माण एजेंसी भवन विकास निगम के उप महाप्रबंधक अक्षय गुप्ता का कहना है कि, ”ये निर्माण जीवाजी यूनिवर्सिटी के अंतर्गत किया जा रहा है. ऐसे में निर्माण अनुमति भी विश्वविद्यालय को ही लेनी है. हमारा काम सिर्फ इस हॉस्टल बिल्डिंग का निर्माण करना है, जो 30 करोड़ की लागत से बनना है.”
कार्यावधि को लेकर अलग-अलग डेडलाइन
इस अनुमति को लेकर भी दो बाते सामने आई हैं, जिन पर विश्वविद्यालय प्रबंधन और भवन विकास निगम के अधिकारी दो राय हैं. पहली भवन विकास निगम का मानना है कि, नगर निगम इस लिए अनुमति नहीं दे रहा क्योंकि जीवाजी विश्वविद्यालय ने पूर्व का भारी टैक्स नगर निगम को नहीं चुकाया है. वहीं, जीवाजी यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट का कहना है कि, टैक्स का मामला न्यायालय में विचारधीन है, ऐसे में अनुमति को लेकर इसे तर्क नहीं बनाया जा सकता. वहीं दूसरी ओर इस निर्माण कार्य की समय अवधि पर भी दोनों का अलग अलग जवाब है. जहां जीवाजी यूनिवर्सिटी का कहना है कि हॉस्टल का निर्माण मार्च 2026 तक पूरा होना है. जबकि निर्माण एजेंसी के महाप्रबंधक के मुताबिक, इस निर्माण की समयावधि दिसंबर 2026 तक है.
बिना अनुमति ढाई महीने में कैसे तैयार होगा हॉस्टल?
हालांकि भवन निर्माण अनुमति एक महत्वपूर्ण विषय बन चुका है. अनुमति को लेकर जल्द ही भवन विकास निगम के अधिकारी जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलगुरु के साथ बैठक कर जल्द से जल्द इस समस्या को दूर करने का रास्ता निकालने पर चर्चा करेंगे, जिससे की ये निर्माण तय समयावधि में पूरा हो सके. क्योंकि तीन मंजिला गर्ल्स हॉस्टल का निर्माण महज ढाई माह के अंदर पूरा हो जाये ये संभव नजर नहीं आता. खासकर तब जब इसके निर्माण को लेकर नगर निगम से अब तक कोई अनुमति ली ही नहीं गई.





