गिरिडीहः एके 47 जैसे खतरनाक रायफल को सामने तना देखकर भी सच बोलने की हिम्मत रखने वाले शख्स का नाम था महेंद्र सिंह, जिनकी आज 21वीं पुण्यतिथि है. इस मौके पर बगोदर बस स्टैंड परिसर में भाकपा माले के द्वारा जन संकल्प सभा का आयोजन किया गया है. भाकपा माले के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य सभा को बतौर मुख्य अतिथि शामिल हो रहे हैं.
उनकी पहचान जनता के दिलों में है
शहादत दिवस को लेकर बगोदर बाजार सहित ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लाल झंडे लगाए गए हैं. पुलिस की कार्रवाई, महाजनी प्रथा, भ्रष्टाचार के खिलाफ एवं शोषितों और पीड़ितों के अधिकार के लिए सड़क से सदन तक दहाड़ मारने वाले शख्स का नाम था महेंद्र सिंह. इन्हीं सब गुणों के कारण ही अन्य जनप्रतिनिधियों से महेंद्र सिंह की अलग पहचान थी. यही पहचान उनकी शहादत के 21 सालों बाद भी आम जनता, किसान, मजदूरों, छात्र – छात्राओं आदि को अपनी ओर खींच लाती है और शहादत पर सलाम करने के लिए आज भी हजारों मुठ्ठियां तनी दिखती हैं.
जी हां यह वही महेंद्र सिंह थे जिन्होंने बगोदर में लगातार तीन बार विधानसभा का चुनाव जीतकर इलाके का प्रतिनिधित्व किया था. वो गरीबों, मजलूमों, शोषितों, दलितों की विधानसभा में आवाज बनकर उभरे.
2005 झारखंड विधानसभा चुनाव के लिए वह चौथी बार तैयारी कर रहे थे. 21 साल पूर्व 2005 में आज ही के दिन 16 जनवरी को अपराधियों ने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी. एके 47 ताने अपराधियों ने जब भीड़ में पूछा कि इसमें कौन है महेंद्र सिंह, तब उन्होंने अपराधियों के सामने आकर बोला, जी मैं हूं महेंद्र सिंह, बोलिए क्या बात है. यही उनकी अंतिम बातें थीं और अपराधियों ने इतना सुनते ही उनके सीने में गोली मार दी.
शहीद महेंद्र सिंह एक व्यक्ति नहीं बल्कि एक विचार थे
उनकी हत्या के बाद आम जनमानस ने यह जता दिया कि अपराधियों ने भले हीं महेंद्र सिंह की हत्या कर दी लेकिन उनके विचार आज भी जिंदा हैं. उनकी हत्या के बाद पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन के लिए और वह भी ठंड के मौसम में उमड़े जन सैलाब ने यह बता दिया था कि वह एक व्यक्ति नहीं बल्कि एक विचार थे. उनकी हत्या कर उनके विचारों को दबाया नहीं जा सकता है.