जीतू पटवारी की मुश्किलें बढ़ीं! क्या मार्कशीट में छिपाई अपनी असली उम्र? जन्मतिथि में हेरफेर के आरोपों से मचा सियासी हड़कंप

इंदौर : मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के तेजतर्रार नेता व प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी बड़ी मुश्किल में फंस सकते हैं. जीतू पटवारी पर निर्वाचन में अपनी उम्र छुपाने के आरोप लगे हैं. दरअसल, उनकी मार्कशीट से लेकर विधानसभा निर्वाचन तक उनकी डेट ऑफ बर्थ (जन्म दिनांक) अलग-अलग पाई गई है और उसमें काफी बड़ा अंतर है. हाल ही में भाजपा नेता श्याम साहू ने इस मामले को लेकर पटवारी पर गंभीर आरोप लगाते हुए मामले की शिकायत राज्य पुलिस,विधानसभा अध्यक्ष के साथ निर्वाचन आयोग को की है.
जीतू पटवारी की उम्र में 22 महीने का अंतर?
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और पूर्व मंत्री जीतू पटवारी की दो अलग-अलग जन्मतिथि का यह मामला अब चर्चा में है. दरअसल भाजपा नेता श्याम साहू ने शुक्रार को इंदौर में पटवारी के विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से लेकर कक्षा दसवीं की मार्कशीट समेत अन्य दस्तावेज सार्वजनिक करते हुए आरोप लगाया कि जीतू पटवारी ने अपनी उम्र में 22 महीने का हेरफेर कर अपनी उम्र को छुपाया है. आरोप है कि जीतू पटवारी ने विभिन्न स्थानों पर अपनी उम्र को कम बात कर वैधानिक लाभ लिया है. भाजपा नेता ने आरोप लगाते हुए कहा कि संभवत: पटवारी ने विधानसभा निर्वाचन से लेकर भत्ता पेंशन और अन्य मामलों में भी गलत जन्मतिथि का सहारा लिया है. इसके खिलाफ उन्होंने राज्य के डीजीपी के अलावा विधानसभा के अध्यक्ष और राज्य निर्वाचन आयोग को शिकायत कर पूरे मामले की जांच की मांग की है.

इंदौर के बिजलपुर रोड पर रहने वाले जीतू पटवारी पिता रमेश चौहान पटवारी की हाई स्कूल की मार्कशीट में जन्मतिथि 25 जनवरी 1973 दर्ज है, जबकि विधानसभा में उनके जो रिकॉर्ड पाए गए हैं उसमें जन्मतिथि 19 नवंबर 1974 है. इस मामले में कहा यह भी जा रहा है कि 2008 में जीतू पटवारी जब मध्य प्रदेश युवा कांग्रेस के अध्यक्ष बने थे उस समय कक्षा दसवीं की अंकसूची के हिसाब से उनकी उम्र 35 वर्ष से कुछ महीने ज्यादा हो रही थी, उसे समय युवा कांग्रेस अध्यक्ष बनने के लिए अधिकतम उम्र 35 वर्ष ही थी. संभवत: उसी दौरान जन्म तारीख में हेर फेर किया गया और फिर जो उम्र पटवारी द्वारा बताई गई उसी को बाद में विधानसभा निर्वाचन और अन्य दस्तावेजों में भी दर्शाया गया, जो पटवारी की वास्तविक जन्मतिथि से करीब 22 महीने कम है.
जन्म तिथि नहीं लिखी, केवल उम्र का जिक्र
प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार जहां-जहां जन्म तिथि लिखी जानी थी वहां फिलहाल पटवारी के दस्तावेजों में सीधे आयु ही दर्ज कराने का जिक्र है, चाहे वे निर्वाचन आयोग में प्रस्तुत नामांकन हो या फिर राऊ विधानसभा से चुनाव लड़ने के लिए दिए गए शपथ पत्र हों इसके अलावा 2008, 2013 और 2018 के लिए प्रस्तुत शपथ पत्र और निर्वाचन में भी जन्मतिथि के स्थान पर उम्र का ही उल्लेख है.

जीतू पटवारी की जन्म तारीख जानबूझकर 19 नवंबर रखी?
भाजपा नेता श्याम साहू ने पत्रकारों से कहा, ” मैंने जीतू पटवारी की मार्कशीट उनके स्कूल से निकलवाई है, जिसमें उनका जन्म 25 जनवरी 1973 लिखा हुआ है पर वे सभी को अपनी जन्म तारीख 19 नवंबर 1974 बताते हैं. मार्कशीट की जन्म तारीख कोई नहीं बदल सकता ये अपराध है. ऐसे में तारीख बदलकर जीतू पटवारी जी ने क्या लाभ लिए हैं? 19 नवंबर इंदिरा गांधी जी की जन्म तारीख है, तो क्या जीतू पटवारी की इस जन्म तारीख को चुनने में कांग्रेस के सभी नेता शामिल थे, लोगों की सहमति बटोरने के लिए?. इसकी जांच होनी चाहिए, ये अपराध है.” वहीं, इन आरोपों पर फिलहाल जीतू पटवारी या कांग्रेस की ओर से कोई बयान सामने नहीं आया है.
बर्थ सर्टिफिकेट से तिथि बदलने की आशंका
जन्मतिथि में परिवर्तन फिलहाल संभव नहीं है लेकिन जीतू पटवारी की जो डुप्लीकेट मार्कशीट शासकीय माध्यमिक विद्यालय मॉडल विलेज लालबाग इंदौर से सत्यापित कर जारी की गई, वह 2008 की है. संभवत इसके बाद जन्म प्रमाण पत्र बनवाया गया हो जिसमें जिसमें जन्मतिथि 19 नवंबर 1974 दर्शाया गया हो क्योंकि हाई स्कूल की सूची के विकल्प के तौर पर पासपोर्ट पैन कार्ड और आधार कार्ड में जन्मतिथि दर्ज करने के लिए जन्म प्रमाण पत्र का उपयोग किया जाता है.
मामला संज्ञेय अपराध की श्रेणी में
इस मामले में जानकार बताते हैं कि जन्म तिथि को छुपा कर दस्तावेजों में हेर फेर करना जालसाजी व अपराध है. ऐसा सिद्ध पाए जाने पर संबंधित के खिलाफ अपराध कायम हो सकता है. हाल ही में उत्तर प्रदेश के एक सरपंच को ऐसे ही मामले में सजा भुगतनी पड़ी है. इस स्थिति में जीतू पटवारी को अब अपनी जन्मतिथि को स्पष्ट करने को लेकर राजनीतिक रूप से भारी दबाव है. वहीं, भाजपा इस मामले में पटवारी के खिलाफ मैदान में उतर चुकी है.





