February 23, 2026 7:32 pm
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दिल्ली/NCR

दिल्ली वाटर अपडेट: लखवार-रेणुकाजी बांधों से बढ़ेगी पानी की सप्लाई, दशकों से लटकी परियोजनाओं पर लगी मुहर

दिल्ली को दीर्घकालिक जल समाधान मिल सकता है. दशकों से अटकी लखवार, रेणुकाजी और किशाऊ बांध परियोजनाओं को केंद्र सरकार ने फिर से मंजूरी देकर आगे बढ़ाया. इन परियोजनाओं से दिल्ली की पानी की कमी दूर करने और यमुना में पर्यावरणीय प्रवाह (ई-फ्लो) बनाए रखने में मदद मिलेगी. तीनों बांध मिलकर कम से कम 25 सालों तक दिल्ली की पेयजल जरूरतें पूरी कर सकते हैं.

दिल्ली की मौजूदा स्थिति की बात करें तो यहां उत्पादन 900 MGD (मिलियन गैलन पर डे) है जबकि, इसकी मांग 1,113 MGD है. करीब 10% आबादी को पाइप जल आपूर्ति नहीं.

अनुमानित जल आपूर्ति क्षमता:

लखवार बांध से दिल्ली को लगभग 135 MGD पानी मिलने की उम्मीद है. रेणुकाजी और किशाऊ प्रोजेक्ट से क्रमशः 275 MGD और 372 MGD पानी और मिल सकता है, जिससे नदी में एनवायरनमेंटल फ्लो (ई-फ्लो) को स्थिर करने और बहुत ज्यादा बदलने वाले मौसमी पानी पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी. अधिकारियों का अनुमान है कि इन प्रोजेक्ट्स से पानी की सप्लाई अगले पांच से सात सालों में शुरू हो सकती है.

ई-फ्लो का मतलब नदी के इकोसिस्टम और उस पर निर्भर लोगों की आजीविका को बनाए रखने के लिए जरूरी पानी के बहाव की मात्रा, समय, अवधि और गुणवत्ता से है. एक अधिकारी ने बताया कि ये तीनों प्रोजेक्ट ऊपरी यमुना बेसिन में स्थित हैं और इन्हें मॉनसून के उस पानी को इकट्ठा करने के लिए डिज़ाइन किया गया है जो अभी बिना इस्तेमाल हुए मैदानों में बह जाता है.

    1. •लखवार बांध (उत्तराखंड): 135 MGD
    2. •रेणुकाजी बांध (हिमाचल प्रदेश): 275 MGD
    3. •किशाऊ बांध (यमुनाटोंस संगम क्षेत्र): 372 MGD

परियोजनाएं ऊपरी यमुना बेसिन में मॉनसून के अलावा पानी को इकट्ठा करेंगी, जो अभी बेकार बह जाता है. परियोजना की स्थिति है.

  1. • लखवार: 12.61% निर्माण पूरा, पहले 1992 में रुकी थी.
  2. • रेणुकाजी: टेंडरिंग चरण में, साथ में 40 मेगावाट जलविद्युत उत्पादन
  3. • किशाऊ: अंतर-राज्यीय सहमति और मंजूरी प्रक्रिया में

अनुमानित समय सीमा

इन तीनों में से, लखवार प्रोजेक्ट सबसे बड़ा है. इसमें उत्तराखंड के देहरादून जिले के लोहारी गांव के पास यमुना नदी पर 204 मीटर ऊंचा कंक्रीट का बांध बनाना शामिल है. इसे 1976 में शुरू किया गया था, निर्माण शुरू हुआ लेकिन फंडिंग की कमी के कारण 1992 में रोक दिया गया.

  • लखवार 2031,
  • रेणुकाजी 2032,
  • किशाऊ 2033

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