देशभर में मशहूर राजनांदगांव की झांकी, पौराणिक कथाओं के साथ इस बार ऑपरेशन सिंदूर की भी झलक दिखी

राजनांदगांव: जिले में शनिवार रात गणेश विसर्जन की झांकी निकली. राजनांदगांव की ये झांकी देशभर में मशहूर है. रात में निकाली गई झांकियों का सिलसिला अगले दिन यानी रविवार सुबह 9 बजे तक चलता रहा. इस बार 40 झांकियां निकाली गई जिसे देखने जिले भर के ही नहीं छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के लोग भी पहुंचे थे.
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम: इस मनोरम झांकी को देखकर लोग मंत्र मुग्ध हो गए. वहीं DJ की धुन में हजारों युवक थिरकते हुए नजर आए. इसके लिए सुरक्षा व्यवस्था भी पुख्ता की गई थी. 900 से अधिक पुलिस के अधिकारी और जवान ड्यूटी पर तैनात थे.
झांकी की परंपरा: राजनांदगांव शहर में झांकी निकालने की परंपरा पिछले लगभग 100 सालों से चली आ रही है. शहर के मानव मंदिर चौक से होते हुए भारत माता चौक और अन्य प्रमुख मार्गों से होकर झांकी निकाली गई.
अलग-अलग थीम की झांकियां: झांकियों में कई धार्मिक कहानियों और आस्था से जुड़े दृश्य दिखाए गए. अनेक प्रकार लाइटों से झांकियां जगमगा रहीं थीं. जिसमें अयोध्या राम मंदिर, शिवलोक, हिरणकश्यप वध आकर्षण का केंद्र रहे. इसके अलावा इस साल की झांकियों में देशप्रेम, वीर जवानों और पौराणिक कथाओं के साथ-साथ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसी अनूठी थीम भी देखने को मिली.
राजनांदगांव में झांकी सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सालों पुरानी गौरवशाली परंपरा है. इन मनोरम दृश्यों को देखने का सिलसिला शाम 7 बजे से शुरू हुआ और सुबह तक जारी रहा. संस्कारधानी की झांकियां इतनी प्रसिद्ध है कि, इनमें से कई झांकियों को रायपुर की समितियां पहले ही बुक कर लेती हैं. इन झांकियों को किराये पर ही दिया जाता है, इसलिए पूरी टीम, जिसमें तकनीशियन, वेल्डर और ड्राइवर शामिल होते हैं, झांकी के साथ रायपुर जाते हैं.





