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अंतरिक्ष विज्ञान में अपार संभावनाएं, जशपुर के बच्चे भी आगे आये – ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला

# अंतरिक्ष संगवारी कार्य्रकम में जशपुर ने देखा अंतरिक्ष विज्ञान का महासंगम*

*ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला से रूबरू हुए जिले के 10 हजार विद्यार्थी*

जशपुरनगर 4 फरवरी 2026/ विज्ञान, नवाचार और राष्ट्रगौरव की अद्भुत छवि उस समय सजीव हो उठी जब भारत के अंतरिक्ष गौरव, भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन एवं गगनयात्री शुभांशु शुक्ला का आज जशपुर आगमन हुआ। उनके सम्मान में रणजीता स्टेडियम, जशपुर में ‘इंडिया इन स्पेस’ थीम पर भव्य अंतरिक्ष संगवारी कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें जिले के लगभग 10 हजार विद्यार्थियों ने सहभागिता कर इतिहास के साक्षी बने। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं और विद्यार्थियों में विज्ञान, तकनीक तथा अंतरिक्ष अनुसंधान के प्रति जिज्ञासा जागृत करना था। इस अवसर पर शुभांशु शुक्ला ने अंतर्राष्ट्रीय स्पेस स्टेशन में अपने 18 दिवसीय अंतरिक्ष प्रवास के अनुभवों को अत्यंत रोचक, सरल और प्रेरक अंदाज में साझा किया, जिसे बच्चों ने जिज्ञासु मन से गंभीरता और उत्साह के साथ सुना। कार्यक्रम में विधायक जशपुर  रायमुनी भगत, अध्यक्ष छत्तीसगढ़ माटीकला बोर्ड  शंभूनाथ चक्रवर्ती, नगर पालिका अध्यक्ष  अरविंद भगत, उपाध्यक्ष जिला पंचायत  यश प्रताप सिंह जूदेव, कलेक्टर  रोहित व्यास, एसएसपी  लाल उमेद सिंह, डीएफओ  शशि कुमार, जिला पंचायत सीईओ  अभिषेक कुमार, जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी, शिक्षकगण तथा हजारों विद्यार्थी उपस्थित रहे।

*जय जोहार से शुरू हुआ संवाद, जशपुर के बच्चों की सराहना की* –
अपने संबोधन की शुरुआत “जय जोहार” से करते हुए शुभांशु शुक्ला ने कहा कि उन्होंने देश के अनेक हिस्सों में अंतरिक्ष से जुड़े कार्यक्रमों में भाग लिया है, लेकिन जशपुर में बच्चों का उत्साह और संख्या सबसे अधिक रही। यह दृश्य यह साबित करता है कि यहां के बच्चे विज्ञान और अंतरिक्ष को लेकर बेहद जागरूक और जिज्ञासु हैं। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष विज्ञान में अपार संभावनाएं है। जशपुर के बच्चों में खूब जिज्ञासा और उत्साह है। यहाँ के बच्चे भी अंतरिक्ष के क्षेत्र में पढ़ाई और शोध के लिए आगे आये। उन्होंने विद्यार्थियों को संदेश दिया कि जीवन में कभी रुकना नहीं चाहिए, निरंतर मेहनत करते रहना चाहिए और छोटी असफलताओं से घबराना नहीं चाहिए। उन्होंने बताया कि बचपन में उनके मन में अंतरिक्ष यात्री बनने का विचार नहीं था, क्योंकि उस समय जागरूकता और संसाधन सीमित थे। अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा से प्रेरणा लेकर उन्होंने पहले फाइटर पायलट बनने का लक्ष्य चुना और निरंतर परिश्रम से आगे बढ़ते हुए अंतरिक्ष यात्रा तक का सफर तय किया।

*अंतरिक्ष की झलक: प्रदर्शनी से वीडियो तक* –

रणजीता स्टेडियम में चंद्रयान, मिशन मंगल, गगनयान सहित ब्रह्मांड और अंतरिक्ष विज्ञान पर आधारित आकर्षक प्रदर्शनी लगाई गई, जिसका अवलोकन स्वयं शुभांशु शुक्ला ने किया। कार्यक्रम के दौरान उनके अंतरिक्ष सफर पर आधारित वीडियो एलईडी स्क्रीन पर प्रदर्शित किए गए, जिन्हें देखकर पूरा स्टेडियम तालियों से गूंज उठा।
इस अवसर पर सौरभ सिंह द्वारा लिखित पुस्तक ‘द मैजिक ऑफ द नाइट स्काई’ का विमोचन भी किया गया। साथ ही अंतरिक्ष क्विज, स्लोगन और पेंटिंग प्रतियोगिताओं के विजेता विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया।

*अंतरिक्ष जीवन की सच्चाई*-

अंतरिक्ष के अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि वहां भी जीवन पूरी तरह अनुशासन और समय-सारणी से बंधा होता है। सुबह से लेकर रात तक हर गतिविधि निर्धारित होती है और अधिकांश समय वैज्ञानिक प्रयोगों में व्यतीत होता है। कठिन परिस्थितियों से निपटने के लिए कठोर प्रशिक्षण दिया जाता है, जिससे डर की जगह आत्मविश्वास पैदा होता है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि आज के समय में मोबाइल और इंटरनेट के माध्यम से ज्ञान के असीम संसाधन उपलब्ध हैं। ऐसे में समय व्यर्थ न करें, अपने लक्ष्य को पहचानें और जिस भी क्षेत्र को चुनें, उसमें पूरी निष्ठा से कार्य करें। ‘अंतरिक्ष संगवारी’ जैसे कार्यक्रम इसी दिशा में एक मजबूत कदम हैं।

*बच्चों से किये रोचक संवाद* –
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने अंतरिक्ष विज्ञान और अंतरिक्ष यात्री बनने की उनकी यात्रा से जुड़े कई प्रश्न पूछे। कक्षा 9वीं की छात्रा अनिशा भगत द्वारा अंतरिक्ष में जाने के संघर्षों पर पूछे गए सवाल के जवाब में  शुभांशु शुक्ला ने कहा कि अनुशासन और निरंतर कड़ी मेहनत से व्यक्ति अपने किसी भी लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है।कक्षा 11वीं की छात्रा दीक्षा दास ने उनसे उनकी प्रेरणा के बारे में प्रश्न किया, जिस पर उन्होंने बताया कि भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा से उन्हें प्रेरणा मिली। कक्षा 12वीं की छात्रा सुष्मिता के प्रश्न अंतरिक्ष में जाकर सबसे अधिक आश्चर्यजनक अनुभव क्या रहा के उत्तर में उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष में सोने सहित सभी गतिविधियाँ गुरुत्वाकर्षण के विपरीत होती हैं, जो एक ओर कठिनाई पैदा करती हैं तो दूसरी ओर बेहद आश्चर्यजनक भी होती हैं। छात्र करण चौहान द्वारा अंतरिक्ष में दैनिक दिनचर्या के संबंध में पूछे गए सवाल पर उन्होंने बताया कि सुबह उठने से लेकर सोने तक की पूरी दिनचर्या वैज्ञानिक पद्धति और तय कार्यक्रम के अनुसार होती है। कक्षा 11वीं के छात्र अनुज कुमार ने सीमित संसाधनों में तैयारी को लेकर प्रश्न किया, जिस पर श्री शुक्ला ने कहा कि आत्मविश्वास और मेहनत से सफलता निश्चित है। आज के समय में मोबाइल ज्ञान का खजाना है, इसका सही उपयोग कर छोटी-छोटी चीजों से भी बहुत कुछ सीखा जा सकता है। वहीं कक्षा 11वीं की छात्रा निवेदिता साहू के अंतरिक्ष में शरीर पर पड़ने वाले प्रभाव संबंधी प्रश्न पर उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष में कई तरह की शारीरिक चुनौतियाँ सामने आती हैं, लेकिन कड़ी ट्रेनिंग से उनका सामना किया जाता है। वहां हाइट बढ़ने लगती है, सिर भारी महसूस होता है, पर धीरे-धीरे शरीर इन परिस्थितियों के अनुरूप ढलना सीख जाता है।

*अशोक चक्र से सम्मानित अंतरिक्ष गौरव* –

उल्लेखनीय है कि ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को ए-एक्स-4 मिशन के दौरान असाधारण साहस और योगदान के लिए 77वें गणतंत्र दिवस पर अशोक चक्र से सम्मानित किया गया। उनका यह संवाद जशपुर के विद्यार्थियों के लिए केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सपनों को पंख देने वाला ऐतिहासिक क्षण बन गया, जिसने ‘इंडिया इन स्पेस’ के संदेश को जमीनी स्तर तक सशक्त रूप से पहुंचाया।

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