Babulal Marandi Attacks CM: आउटसोर्सिंग कंपनियों पर कब्जे की बात बेमानी, बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को घेरा

रांचीः मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के बयानों पर किसी की नजर रहे या ना रहे, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी की जरुर रहती है. सीएम के हर सार्वजनिक बयान का जवाब देते हुए सवाल खड़े करने का कोई मौका नहीं छोड़ते हैं.
ताजा मामला धनबाद में झामुमो के स्थापना दिवस समारोह के दिन सीएम के संबोधन से जुड़ा है. सीएम ने युवाओं से आह्वान किया था कि अगर धनबाद की आउटसोर्सिंग कंपनियां रोजगार नहीं देती हैं तो उन्हें रोजगार के लिए उन कंपनियों पर कब्जा कर लेना चाहिए. बाबूलाल मरांडी ने इस बयान को भ्रामक बताते हुए कई सवाल खड़े किए हैं. आरोप लगाया है कि अब आउटसोर्सिंग कंपनियों पर कब्ज़े की बातें कर मुख्यमंत्री सीधे तौर पर जनता को बरगलाने और बेरोजगारों के जख्मों पर नमक रगड़ने का प्रयास कर रहे हैं.
स्वचालित मशीनों से होता है काम- बाबूलाल मरांडी
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा कर सीएम हेमंत सोरेन को टैग करते हुए लिखा है कि आप लोगों में भ्रम पैदा ना करें. क्योंकि आउटसोर्सिंग कंपनियों में करीब 95 प्रतिशत काम आज स्वचालित मशीनों से होता है. ऐसे में इन कंपनियों पर कब्जे से बड़े पैमाने पर रोज़गार सृजन का आपका दावा पूरी तरह भ्रामक है.
उन्होंने सीएम को संबोधित करते हुए कहा है कि अगर आपको आदिवासियों की सच में चिंता है तो शराब दुकानों का संचालन गरीबों और आदिवासियों के हाथों में क्यों नहीं दिया. अगर ऐसा होता तो राज्य की करीब 1500 शराब की दुकानों में चार-चार लोगों को रोजगार मिलने से कम से कम 6 हजार परिवार सीधे तौर पर लाभान्वित होते. लेकिन ऐसा करने के बजाए शराब दुकानों को क्लस्टर प्रणाली में बांटकर बाहरी पूंजीपतियों के हाथों में सौंप दिया.
रोजगार मामले में इस वजह से सरकार फेल- बाबूलाल मरांडी
नेता प्रतिपक्ष ने सीएम को संबोधित करते हुए कहा है कि उन्होंने बालू घाटों के संचालन को ग्राम सभा के माध्यम से कराने का सुझाव भी दिया था, ताकि स्थानीय लोगों को रोजगार मिल सके. लेकिन इसके बजाय खनन माफियाओं से सांठगांठ कर बालू घाटों पर भी बाहरी लोगों को बैठा दिया गया. उनका दावा है कि अगर उनके सुझावों पर अमल किया गया होता तो चार लाख स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष और परोक्ष रुप से रोजगार मिल जाता. नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया है कि पिछले छह वर्षों में वर्तमान सरकार रोजगार सृजन के मोर्चों पर फेल साबित हुई है.
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया है कि झारखंड सरकार के खजाने से 10,000 करोड़ की राशि गायब है. वित्त मंत्री ने वित्त सचिव को सभी विभागों के सचिवों की बैठक बुलाकर विस्तृत हिसाब लेने को कहा था. लेकिन वित्त सचिव ने मंत्री के आदेश का पालन करने के बजाय फाइल को मुख्य सचिव के पास भेज दिया गया, जो पिछले तीन महीनों से लंबित पड़ा है. आखिर सरकार जांच से क्यों कतरा रही है? उन्होंने ईडी के डायरेक्टर को टैग करते हुए कहा है कि इस गंभीर आर्थिक अपराध की जांच होनी चाहिए.
कांग्रेस का बाबूलाल मरांडी पर निशाना
पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर किये गए एक पोस्ट पर झारखंड कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. पार्टी के प्रदेश महासचिव और मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने कहा कि जनता द्वारा नकारे गए भाजपा और जदयू के नेता बाबूलाल मरांडी और सरयू राय अनर्गल प्रलाप कर रहे हैं. राकेश सिन्हा ने कहा कि 15 नवंबर 2000 को झारखंड राज्य के गठन के बाद 16-17 वर्षों तक भाजपा सत्ता में रही, उस दौर में एक के बाद एक कई घपले-घोटाले हुए, उनका कभी ऑडिट इन लोगों ने क्यों नहीं कराया?
कांग्रेस नेता ने कहा कि अब बाबूलाल मरांडी का कोई काम नहीं बचा है इसलिए वह सोशल मीडिया पर अनर्गल पोस्ट और पीसी करते रहते हैं. अपने शासनकाल में कुर्सी पर बैठकर मिठाई खाने वाले लोग आज पोस्ट करके न सिर्फ एक काम करने वाली सरकार को बदनाम कर रहे हैं बल्कि जनता में भ्रम फैला रहे हैं.





